रिपब्लिक न्यूज़।।
शहडोल मुख्यालय जिला की चौपाटी में जांच के नाम पर पहुंचे खाद्य विभाग के अधिकारियों की कथित दावत का वीडियो सामने आने से हड़कंप मच गया है।
वहीं विभाग ने अपने कार्यवाहीं में बड़े पैमाने पर चल रहे मिष्ठान्नों को छोड़कर सभी छोटे कारोबारियों पर जांच के नाम पर कार्रवाई करते हैं।
संबंधित विभाग के जिन अधिकारियों को दुकानदारों के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचनी थी, उन्हीं पर चाट-फुल्की और फास्ट फूड का स्वाद लेने, यहां तक कि खाने की सामग्री पैक कराकर ले जाने के आरोप लग रहे हैं। दुकानदारों का दावा है कि सामग्री का भुगतान भी नहीं किया गया, अब वायरल वीडियो के बाद सवाल उठ रहा है। क्या चौपाटी में खाद्य सुरक्षा की जांच हुई या फिर जांच के नाम पर ही पार्टी हो गई। शहडोल मुख्यालय नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत स्थानीय व्यवसायिक के कारोबार पर
मानसून के मौसम में खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम और नागरिकों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि विभाग की ओर से जिले में निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत विभाग की टीम शहडोल की चौपाटी पहुंची, जहां चाट-फुल्की और फास्ट फूड का कारोबार करने वाले दुकानदारों के खाद्य पदार्थों की जांच की गई और सैंपल लिए गए।
जांच के नाम पर संबंधित विभाग के कर्मचारियों का दावत।
जांच के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने दुकानदारों से खाद्य सामग्री लेकर उसका सेवन किया। और इतना ही नहीं टीम के कुछ सदस्यों ने खाने की सामग्री पैक कराकर घर ले जाने के लिए पार्सल भी कराया और उस सामग्री का भुगतान नहीं किया गया।
इसी दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या जांच के नाम पर अधिकारियों की दावत चल रही थी।
विशेष सूत्रों अनुसार जानकारी दबी जुबान में दुकानदारों ने बताई अपनी पीड़ा।
वहीं जब मामले की पड़ताल की गई तो चौपाटी के कुछ दुकानदारों दबी जुबान में अपनी पीड़ा साझा की। वहीं दुकानदारों का आरोप है कि महंगाई के दौर में वैसे ही कारोबार करना मुश्किल है और ऊपर से जांच के नाम पर खाद्य सामग्री खाने तथा पैक कराकर ले जाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, उनका यह दर्द भी कैमरे में रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि, वायरल वीडियो और दुकानदारों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अब सवाल यह है कि क्या विभाग इस पूरे मामले की जांच कराएगा और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।