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पानी बिजली के लिए ग्रामीणजन हो रहे परेशान, संबंधित विभाग अधिकारी बने अंजान।

खलौद मझोखर में बिजली के नाम पर महज चिमनी जैसी रोशनी, पंखे तक नहीं चलते।

नल-जल योजना भी बेअसर, ग्रामीण बिजली और पानी दोनों समस्याओं से परेशान।

रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल मुख्यालय देश प्रदेश शासन ने अपने सभी राज्य जिलों के विकास के लिए पानी की तरह पैसा बह रही है लेकिन सिर्फ विकास कागजों पर ही सीमित रह गई है ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के ग्राम खलौद मझोखर में बिजली और पेयजल की समस्या से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में बिजली की स्थिति ऐसी है कि घरों में लगे बल्ब महज चिमनी के आकार की रोशनी देते हैं। अक्सर कम वोल्टेज के कारण घरों में लगे पंखे तक ठीक से नहीं चल पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली मौजूद होने के बावजूद उसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक शाम होते ही घरों में रोशनी के लिए बिजली पर निर्भर रहना मुश्किल हो जाता है। कम वोल्टेज के कारण बल्ब पूरी क्षमता से नहीं जलते और पंखे चलाना भी मुश्किल रहता है। गर्मी और उमस के बीच बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।

नल लगे, पानी नहीं पहुंचा

बिजली की समस्या के साथ गांव में पेयजल संकट भी बना हुआ है। शासन की घर-घर नल पहुंचाने की योजना के तहत ग्रामीणों के घरों में नल कनेक्शन तो कर दिए गए हैं, लेकिन नियमित जलापूर्ति नहीं होने से योजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल लगे होने के बावजूद पानी के लिए दूसरे जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना के संचालन के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी जरूरी है। 

जब गांव में पर्याप्त वोल्टेज ही नहीं है तो पानी की मोटर और अन्य उपकरण किस तरह संचालित होंगे, यह बड़ा सवाल है।

अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव की बिजली और पेयजल व्यवस्था की जमीनी स्थिति जानने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गंभीरता से निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। शासन द्वारा ग्रामीणों की सुविधा के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी नियमित निगरानी नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित बिजली एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से गांव का स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति देखने की मांग की है। 

वहीं ग्रामीणों की मांग है कि कम वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और हर घर नल-जल योजना के माध्यम से नियमित एवं पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के नाम पर चिमनी जैसी रोशनी और नल के नाम पर सूखे कनेक्शन किसी योजना की सफलता नहीं हो सकते। शासन को कागजी दावों के बजाय गांव में योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कर ग्रामीणों को राहत दिलानी चाहिए।

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