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संबंधित विभाग के मिली भगत से किया जा रहा अंग्रेजी शराब का अवैध रूप कारोबार

 1500 लीटर अंग्रेजी शराब जब्त, आरोपी दोनों फरार।

शहपुरा पुलिस की शहडोल में दबिश हुईं नाकाम।

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।

रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल मुख्यालय से जबलपुर ले जाई जा रही शराब पर शहपुरा पुलिस की कार्रवाई; तीन आरोपी बनाए गए, एक गिरफ्त में, दो की तलाश जारी।

फरार आरोपियों की तलाश में शराब कारोबारी के ठिकाने तक पहुंची डिंडौरी पुलिस, कथित तौर पर नहीं मिला अपेक्षित स्थानीय सहयोग; अवैध पैकारी, ओवररेटिंग और बाहरी शराब की बिक्री को लेकर भी सवाल।

जिले में शराब कारोबार और कथित अवैध गतिविधियों को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच 1500 लीटर अंग्रेजी शराब की जब्ती ने एक बार फिर पूरे नेटवर्क को चर्चा में ला दिया है। शहपुरा पुलिस ने शहडोल से जबलपुर की ओर ले जाई जा रही बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब पकड़ी है। मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से एक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई जा रही है।

मामला केवल शराब की जब्ती तक सीमित नहीं रहा। फरार आरोपियों की तलाश में रविवार को शहडोल पहुंची शहपुरा पुलिस की कार्रवाई और उसे कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहडोल से जबलपुर जा रही थी 1500 लीटर शराब


जानकारी के अनुसार डिंडौरी जिले की शहपुरा पुलिस ने थाना प्रभारी अनुराग जामदार के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए करीब 1500 लीटर अंग्रेजी शराब जब्त की। पुलिस ने इस मामले में सीताशरण सहित तीन लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें शहडोल शहर में शराब कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति का नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है।

पुलिस अब तक एक आरोपी को पकड़ने में सफल हुई है, जबकि दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर शहडोल से जबलपुर की ओर किस उद्देश्य से और किस नेटवर्क के माध्यम से भेजी जा रही थी, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

आरोपियों की तलाश में शहडोल पहुंची शहपुरा पुलिस

बताया जा रहा है कि फरार आरोपियों की तलाश करते हुए शहपुरा पुलिस रविवार दोपहर शहडोल पहुंची। पुलिस टीम ने संबंधित ठिकाने पर दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन कार्रवाई सफल नहीं हो सकी।

यहीं से मामले ने नया मोड़ ले लिया। शहपुरा पुलिस से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान सोहागपुर पुलिस से जिस स्तर के सहयोग की अपेक्षा थी, वह नहीं मिला। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि पुलिस टीम के पहुंचने से पहले आरोपियों को कार्रवाई की भनक लग गई थी।

यदि ऐसा हुआ तो सवाल बेहद गंभीर है कि पुलिस कार्रवाई की जानकारी आरोपियों तक आखिर कैसे पहुंची?

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि दूसरे जिले की पुलिस जब गंभीर प्रकरण में आरोपियों को पकड़ने शहडोल पहुंची, तब स्थानीय पुलिस ने क्या भूमिका निभाई?


शहपुरा पुलिस की दबिश से पहले ही आरोपियों के गायब हो जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक नजर आती है।

यह भी जांच का विषय है कि संबंधित बीट और क्षेत्र में उस समय किन पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी थी तथा शहपुरा पुलिस ने स्थानीय थाने से किस प्रकार की सहायता मांगी थी और उसे वास्तव में कितना सहयोग दिया गया।

शराब के नेटवर्क की जड़ें कहां तक?

1500 लीटर शराब की बरामदगी ने एक दूसरा बड़ा सवाल भी पैदा किया है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में शराब शहडोल से दूसरे जिले की ओर भेजी जा रही थी तो क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है?

शहर और आसपास के क्षेत्रों में शराब की कथित अवैध पैकारी, निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री और दूसरे राज्यों की शराब की उपलब्धता को लेकर पहले भी शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में पुलिस और आबकारी विभाग के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि पकड़ी गई शराब कहां से आई, किसके माध्यम से भेजी जा रही थी और उसका अंतिम ठिकाना कहां था।

जांच का दायरा केवल वाहन और उसमें मौजूद शराब तक सीमित न रखकर सप्लाई चेन तथा उससे जुड़े लोगों तक पहुंचना आवश्यक है।

दुकानों पर रेट लिस्ट और क्यूआर कोड को लेकर भी शिकायतें

शहर में शराब दुकानों के संचालन को लेकर भी उपभोक्ताओं के स्तर पर कई सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कुछ दुकानों पर शराब की स्पष्ट मूल्य सूची प्रदर्शित नहीं की जाती, जिससे ग्राहकों को निर्धारित कीमत की जानकारी आसानी से नहीं मिल पाती।

क्यूआर कोड और निर्धारित दरों के प्रदर्शन को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि शराब निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेची जा रही है तो आबकारी विभाग को दुकानों की नियमित जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करनी चाहिए।

एक आरोपी गिरफ्तार, दो अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर

फिलहाल 1500 लीटर अंग्रेजी शराब के मामले में तीन आरोपियों में से एक पुलिस की गिरफ्त में बताया जा रहा है, जबकि शेष दो आरोपियों की तलाश जारी है। शहपुरा पुलिस द्वारा शहडोल में की गई दबिश के बावजूद आरोपियों का हाथ नहीं लगना अब पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू बन गया है।

पुलिस की आगामी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि फरार आरोपी कब गिरफ्त में आते हैं और पूछताछ में शराब के इस नेटवर्क से जुड़े कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।

एसपी स्तर से जांच की मांग, आखिर किसने दी आरोपियों को भनक?

इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शहपुरा पुलिस की दबिश की सूचना पहले ही लीक हो गई थी? यदि हां, तो सूचना किस स्तर से और किसके द्वारा दी गई?

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक स्तर से पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग उठना स्वाभाविक है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शहपुरा पुलिस ने सोहागपुर पुलिस से कब संपर्क किया, किससे सहयोग मांगा, कार्रवाई के दौरान कौन-कौन पुलिसकर्मी मौजूद थे और आरोपियों के फरार होने की परिस्थितियां क्या थीं।

यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा आरोपियों को संरक्षण देने अथवा पुलिस कार्रवाई की सूचना पहुंचाने की पुष्टि होती है तो संबंधित के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई अपेक्षित होगी।

फिलहाल 1500 लीटर अंग्रेजी शराब की जब्ती ने शहडोल के शराब कारोबार की परतें खोलने के साथ पुलिस और आबकारी व्यवस्था के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि फरार दोनों आरोपी कब पकड़े जाते हैं और पुलिस जांच शराब की खेप के वास्तविक स्रोत तथा पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाती है या मामला केवल शराब जब्ती और एक गिरफ्तारी तक सिमटकर रह जाता है।

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