विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से अवैध कोयला खदान में संचालित हो रहा अवैध कारोबार।
प्राइवेट कर्मचारी तिवारी नामक व्यक्ति कि भूमिका संदिग्ध।
उपमहाक्षेत्रिय प्रबंधक के नाम पर अवैध वसूली।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला के सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत कोल माइंस के ओपन कास्ट एवं अंडरग्राउंड माइंस से ट्रक-ट्राला के माध्यम से कोयला चोरी के जानकारी से सनसनीखेज मामले में पुलिस भले ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लेता हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण में एरिया सेल्स मैनेजर की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बावजूद न तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की विभागीय या कानूनी कार्रवाई हुई है इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
कांटे पर प्राइवेट कर्मचारियों को बैठना इस कड़ी में कहीं ना कहीं संदिग्ध भूमिका निभाने का काम करता है।
विभागीय जानकारी अनुसार प्राप्त खबर जैसा कि सोहागपुर क्षेत्र में अंतर्गत साइडिंग पर एक प्राइवेट कर्मचारी तिवारी नाम का व्यक्ति के तार कहीं ना कहीं ऐसे संदिग्ध लोगों से जुड़े हैं जो कोयला चोरी के मामले पर पूरे सोहागपुर क्षेत्र पर काम कर रहे हैं। अपने अपाहिज पिता को पहुंचाने के नाम पर कांटा पर बैठकर यह तिवारी नाम का व्यक्ति उन्हें संदिग्ध लोगों के साथ उठना बैठना और रात भर पार्टी करता रहता है इसके पिता के पेमेंट से यह साबित होता है कि इनका रहन-सहन ऐसा नहीं हो सकता तो फिर कहां से आता है इतनी कमाई कि तिवारी नाम के व्यक्ति करोड़ों के खेल में शामिल है सूत्रों के जानकारी अनुसार हर माह लाखों रुपए इसके अकाउंट पर पेड़ हो रहा है कहीं ना कहीं संबंधित विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत या उनके कार्य शैली पर सवाल खड़ा तो किया जा सकता है।
अखबार में प्रकाशित खबर एवं न्यूज चैनल में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खुली खदान से कोयला लोड ट्रक - ट्रालों को सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मुख्य द्वार से बाहर निकाला जा रहा है मामले के उजागर होने के बाद खदान प्रबंधन ने प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
बताया जा रहा है कि कोयला चोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा था और इसमें खदान प्रबंधन, सुरक्षा कर्मियों तथा रोड सेल से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है नियमों के अनुसार बिना वैध दस्तावेज, वजन पर्ची और अधिकृत अनुमति के कोयले का परिवहन संभव नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यह सब एरिया सेल्स मैनेजर की जानकारी के बिना कैसे होता रहा।
कोयला खदानों में संचालित रोड़ सेल का काम निजी लाभ के लिए संबंधित अधिकारियों की मिली भगत से किया जाता है।
सूत्रों का कहना है कि रोड सेल और कोयला डिस्पैच से जुड़े सभी अहम नियंत्रण एरिया सेल्स मैनेजर के अधीन होते हैं इसके बावजूद भी संबंधित अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा जाना संदेह को और गहरा करता है न तो पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है और न ही कंपनी प्रबंधन की ओर से उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया है
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं केवल छोटे कर्मचारियों और ट्रक चालकों की गिरफ्तारी कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि असली सूत्रधार अब भी सुरक्षित हैं
अब सवाल यह है कि क्या एरिया सेल्स मैनेजर को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
फिर जांच को जानबूझकर एक सीमित दायरे में रखा जा रहा है?