जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ कनिष्ठ कर्मचारी वरिष्ठ कर्मचारी को दे रहे आदेश बनकर अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी।
एक छात्रावास अधीक्षिका वरिष्ठ कार्यालय कर्मचारी बनकर द्वितीय वर्ग प्रधानाध्यापक कर्मचारी को कर रही आदेश।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // मुख्यालय जिला अंतर्गत कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कर्मचारी स्वयं अधिकारी बनकर अपने विभाग के अधीनस्थ संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आदेश जारी कर अपनी मनमानी करते हुए देखे गए हैं।
इस तरह के कारनामे सिर्फ शिक्षा विभाग के नहीं कई विभागों के कार्यालय में देखने और सुनने को मिल रहा है लेकिन खासकर मुख्यालय के सहायक आयुक्त कार्यालय का नाम सर्वोपरि है कार्यालय के प्रमुख अधिकारी को गुमराह कर कनिष्ठ कर्मचारियों का इस तरह कारनामे को अंजाम दे रहे हैं।
एक ऐसा ही मामला जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित कार्यालय में कनिष्ठ कर्मचारी अधीक्षिका कार्य पर पदस्थ कर्मचारी के द्वारा अपने संबंधित विभाग के वरिष्ठ कर्मचारी प्रधानाध्यापक शिक्षिका को छात्रावास अधीक्षिका के द्वारा आदेश किया जा रहा है। मैं सहायक आयुक्त कार्यालय से बोल रही हूं कल से तुम इस कार्यालय में अपनी सेवा देने आ जाना मैं इस कार्यालय से बोल रही हूं।
जबकि संबंधित शिक्षिका वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं जब उस शिक्षिका के द्वारा पूछा गया आप कहां से बोल रही हैं तो छात्रावास अधीक्षिका ने अपने वरिष्ठ कार्यालय का नाम लेते हुए आदेश करती है। कल से तुमको एकीकृत परियोजना कार्यालय बैगा विकास में कार्य करना है। शिक्षिका के द्वारा पूछा गया कि मुझे अभी तक कोई आदेश नहीं आया है किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा तब कनिष्ठ छात्रावास अधीक्षिका के द्वारा बोला गया। अगर आदेश नहीं आया है तो तुमको आदेश नहीं मिला है तो अभी आधा घंटा में मिल जाएगा इन तरह के धमकी भरे शब्दों के साथ-साथ संबंधित कार्यालय प्रमुख अधिकारी को गुमराह कर आदेश किया जा रहा है कनिष्ठ कर्मचारी के द्वारा संबंधित विभाग के वरिष्ठ कर्मचारियों को। मुख्यालय में संचालित सीनियर कन्या छात्रावास में पदस्थ अधीक्षिका के ऊपर यह आरोप भी लगाया गया है कि इस अधीक्षिका के द्वारा अवैध वसूली भी की जा रही है अधिकारी के नाम पर।
शहडोल जिला के जनजातीय कार्य विभाग कार्यालय में कई ऐसे मामले उजागर हुए हैं जिसमें करोड़ों रुपए के घोटाले और ऐसे स्थानांतरण नीति जिससे शिक्षक विहीन विद्यालय किए गए हैं।
कार्यालय में कई वरिष्ठ कर्मचारियों के रहते हुए भी कार्यालय में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी कंप्यूटर ऑपरेटर कार्य में पदस्थ कर्मचारी स्वयं को कार्यालय प्रबंधक मानता है, और संबंधित विभाग के कर्मचारियों को अपना अधिकारी होने का रौब दिखाकर धमकी भरे शब्दों से नवाजता है अभी भेजता हूं तुमको सस्पेंशन ऑर्डर और कैसे निकलता है तुम्हारे संचालित छात्रावास का शिष्यवृर्ती मेरे बगैर कैसे हो रहा है तुम्हारे छात्रावास का भुगतान मैं देख लेता हूं इस तरह के शब्द है कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर रजनीश नामक व्यक्ति का आदेश जारी होता है।
जबकि इनके नियुक्ति की जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी कार्यालय में कैसे पदस्थ हुआ किसके आदेश से पदस्थ हुआ और कब हुआ इस बात की जानकारी पूर्ण रूप से साफ हो जाएगा।
कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर रजनीश दुबे की शाखा क्यों नहीं बदली जा रही है क्यों नहीं दिया जा रहा दूसरे कंप्यूटर ऑपरेटर को शिष्यवृर्ती से संबंधित भुगतान कार्य का प्रभार जबकि इससे अच्छे काबिल और अच्छे कार्य करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर भी कार्यालय में पदस्थ हैं।
संबंधित विभाग के विशेष सूत्र अनुसार प्राप्त जानकारी एक बार फिर से सुर्खियों में चल रहा है। एकीकृत परियोजना बैगा विकास कार्यालय में किसके आदेश से किया गया एक कंप्यूटर ऑपरेटर पदस्थ यह बाहरी व्यक्ति अभी कुछ दिन पहले सहायक आयुक्त कार्यालय रजनीश दुबे के बगल में बैठकर शासकीय गोपनीय कार्य के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया था अब यह बाहरी व्यक्ति को बैगा विकास कार्यालय के कंप्यूटर सौंपा गया। सूत्र बताते हैं यह रजनीश दुबे का मोहरा है इस बाहरी व्यक्ति के द्वारा रजनीश अपने अवैध वसूली कार्य को अंजाम देता है।
अगले अंक में उस कनिष्ठ शासकीय छात्रावास अधीक्षिका उसके नाम के साथ कैसे अधिकारियों को अपने काम क्षेत्र में घुमाती है इशारों पर और अधिकारी बन करती है आदेश अपने वरिष्ठ कर्मचारियों के साथ।
