अवैध उत्खनन रेत भंडारण पर हुई कार्यवाही।
रेल्वे की जमीन पर माफिया ने किया था अवैध रेत भंडारण।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला उमरिया के घुंनघुटी थाना क्षेत्र घुंनघुटी रेल्वे स्टेशन के समीप रेल्वे की जमीन पर अवैध रूप से रेत का भंडारण बड़े पैमाने पर किया गया था जिस पर बुधवार को खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब 21 ट्रॉली रेत जब्त कर ली। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया, लेकिन इस पूरी कार्रवाई ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं ज्यादा नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
खनिज विभाग को स्थानीय मुखबिर से जानकारी प्राप्त हुआ था रेलवे की भूमि पर भारी मात्रा में अवैध उत्खनन रेत भंडारण किया गया है। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की मौके पर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं मिला और न ही रेत भंडारण के संबंध में कोई वैध दस्तावेज वहां मौजूद प्रस्तुत किया गया था।
इसके बाद संबंधित विभाग ने लगभग 21 ट्रॉली रेत जब्त कर वन विभाग की चौकी में सुपुर्द कर दिया गया है।
जिला में पदस्थ खनिज सर्वेयर ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि रेत उत्खनन भंडारण लावारिस हालत में मिली थी और फिलहाल संबंधित विभाग अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे है कि इसका वास्तविक मालिक कौन है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है संबंधित विभाग पुलिस प्रशासन बीट प्रभारी और वन विभाग की मिली भगत संदेह को जन्म दे रहा है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो जिस स्थान से रेत का स्टॉक जब्त किया गया, वहां से कुछ ही दूरी पर एक डग्गी (भारी वाहन) खराब हालत में खड़ी हुई थी। क्षेत्र के लोगों का दावा है कि इसी वाहन के माध्यम से रेत का भंडारण किया गया था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना स्थल पर एक संदिग्ध वाहन मौजूद था, तो उसे जब्त क्यों नहीं किया गया? क्या विभाग को उसके मालिक की जानकारी थी या फिर जांच अभी अधूरी है।
इधर गांव और बाजार में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार घुंनघुटी निवासी एक प्रभावशाली व्यक्ति, जिन्हें लोग मिश्रा जी के नाम से जानते हैं, इस पूरे खेल के कथित मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। जो दिव्य प्रकाश के साथ मथुरा के क्षेत्रों में रेत उत्खनन कारोबार धड़ल्ले से संचालित कर रहे हैं।हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी व्यक्ति का नाम विभागीय रिकॉर्ड में सामने आया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
फिर भी रेलवे की जमीन पर इतने बड़े पैमाने पर रेत का अवैध भंडारण होना कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत वहां पहुंची कैसे। किसके संरक्षण में यह स्टॉक तैयार किया गया। यदि रेत अवैध थी तो उसे वहां तक पहुंचाने वाले वाहन और जिम्मेदार लोग अभी तक जांच के दायरे में क्यों नहीं आए।
फिलहाल खनिज विभाग की कार्रवाई ने अवैध रेत कारोबारियों पर शिकंजा कसने का संदेश जरूर दिया है, लेकिन जब तक इस स्टॉक के असली मालिक और इसके पीछे काम कर रहे लोगों का खुलासा नहीं होता, तब तक घुंनघुटी का यह रेत रहस्य चर्चा का विषय बना रहेगा।