रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला में एक बार फिर बड़ी अनहोनी टली: फर्जीवाड़ा या मानव तस्करी की साजिश हुआ नाकाम।
कुछ दिनों पूर्व भी एक ऐसा मामला सामने आया था नाबालिक बच्चियों को बरगला के किसी कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर नाबालिक बच्चियों को एक जिले से दूसरे जिला बुलाया जाता है और फिर वही बच्चियों हो जाती है लापता एक ऐसा ही मामला आज शहडोल मुख्यालय नगर में स्थानीय सूत्रों से जानकारी मिली।
डिंडोरी जिला मध्यप्रदेश से शहडोल लाई गईं 9 नाबालिग बच्चियां जिन्हें एक कंपनी में काम दिलाने के नाम पर उन्हें ट्रेनिंग और मीटिंग पर बुलाया गया लेकिन उन बच्चियों को उसे कंपनी के बारे में किसी प्रकार से कोई जानकारी नहीं कि यह कंपनी किसकी है और कहां पर स्थित है और इस कंपनी में हमें क्या काम करना होगा, समाज सेवक एडवोकेट सुनील सिंह की सतर्कता से बचीं नाबालिक बच्चियां!
बिती रात समय लगभग 9 से 10 बजे के बीच, जब दुनिया अपने घरों में सुरक्षित होती है, तब डिंडोरी जिले के अलग-अलग गांवों की 9 नाबालिग बच्चियां सभी का उम्र लगभग 16-17 साल एक बस से शहडोल पहुंचती हैं।
वजह किसी कथित 'फर्जी सेल्स कंपनी' की मीटिंग!
इन बच्चियों के पास न रहने का ठिकाना था, न खाने की व्यवस्था। जरा सोचिए, अगर समय रहते इन्हें न संभाला जाता, तो रात के अंधेरे में इनके साथ कोई भी अप्रिय घटना घट सकता था।
लेकिन समाज सेवकों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए मुस्तैदी दिखाई और शासन के दृवारा जन सेवा में लगाए हुए वाहन को तुरंत डायल 112 को सूचना दी।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी बच्चियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, उनके रहने-खाने का प्रबंध किया और परिजनों से बात कर उन्हें सकुशल घर भेजने की व्यवस्था की। पुलिस ने परिजनों को समझाइश भी दी कि बच्चों को पढ़ाएं और ऐसे जालसाजों से दूर रखें।
शासन-प्रशासन और समाज से सीधे सवाल।
बिना वेरिफिकेशन के नाबालिग बच्चियां डिंडोरी से शहडोल कैसे आ गईं? क्या परिवहन विभाग और पुलिस चेकिंग के रास्तों पर कोई मुस्तैदी नहीं थी?
ये 'फर्जी सेल्स कंपनियां' कौन चला रहा है? जो ग्रामीण इलाकों की मासूम और गरीब बच्चियों को नौकरी या मीटिंग के नाम पर बहला-फुसलाकर शहरों में बुला रही हैं? क्या यह किसी बड़े 'मानव तस्करी' रैकेट का हिस्सा तो नहीं?
क्या इन फर्जी कंपनियों पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा? क्या इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सरगनाओं को जेल भेजा जाएगा, ताकि भविष्य में कोई और बच्ची इनका शिकार न बने?
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का इतना अभाव क्यों है? जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग गांवों में इस तरह के फ्रॉड के खिलाफ अभियान क्यों नहीं चलाता?
रिपब्लिक न्यूज टीम की अपील: आप सभी माता-पिता से हाथ जोड़कर निवेदन है कि अपनी बेटियों को पढ़ाएं-लिखाएं और जागरूक बनाएं।
बिना पूरी जांच-पड़ताल किए, किसी भी अनजान व्यक्ति या फर्जी कंपनी के झांसे में आकर अपनी बच्चियों को अकेले बाहर न भेजें।