सारंगपुर गैस सिलेंडर रिफिल आपूर्ति ठप।
ग्रामीणों में जनाक्रोश फूटा गुस्सा जब हर जगह पहुंच रही गाड़ियां, तो यहां क्यों नही।
सारंगपुर कुशवाहा गैस एजेंसी का मामला।
रिपब्लिक न्यूज ।।
शहडोल मुख्यालय जिले के खैरहा थाना क्षेत्र स्थित सारंगपुर गांव में एचपी गैस सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह से ठप्प। हालात गंभीर होते नजर आ रहा हैं।
स्थानीय क्षेत्र अंतर्गत ग्रामीणजन सैकड़ों परिवार पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर के इंतजार में परेशान हैं, लेकिन एजेंसी की गाड़ियां आज दिनांक तक गांव में पहुंचने में असमर्थ हो रही हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आसपास के अन्य गांवों और कस्बों में यही गाड़ियां नियमित रूप से सिलेंडर वितरण कर रही हैं, जिससे सारंगपुर कुशवाहा गैस एजेंसी क्षेत्रों के ग्रामीण खुद को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार एजेंसी और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत की, लेकिन हर बार केवल सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है, जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं दिखाई दें रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। महिलाएं और बुजुर्ग लकड़ी और कंडों पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जिससे धुएं के कारण स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों और कामकाजी लोगों की दिनचर्या भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा सारंगपुर गांव के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। जब अन्य जगहों पर गैस की आपूर्ति निरंतर रूप से जारी हो रही है, तो क्या सारंगपुर को नजरअंदाज करना कई सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को स्थानीय जन मजबूर होंगे।
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की चुप्पी भी संदेहास्पद का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल रिफिलिंग डीलर से संपर्क कर गैस आपूर्ति को सुचारू रूप से कराया जाए और जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिसमें आम जनता को पुनः इस तरह की किसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
सारंगपुर की यह समस्या अब केवल गैस आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह जिला प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की खामियों का भी बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक ग्रामीणों को राहत मिल पाती है।