जब आ गए चुनाव के दिन नज़दीक कार्यक्रम में दिखने लगे सांसद की तस्वीर।
भारतीय जनता पार्टी की जारी पहली सूची ने विराम दे दिया है बीते चुनाव में शहडोल लोकसभा क्षेत्र 85 से 2019 मे कांग्रेस से महज दो महीने पहले सदस्यता लेने वाली हिमांद्री सिंह को भाजपा की उम्मीदवारी मिली वहीं भाजपा से टिकट को लेकर नाराज प्रमिला सिंह कांग्रेस पार्टी के सिंबल से लड़ी लेकिन भाजपा को मिले वाक ओभर वोट में बंपर जीत मिली, कांग्रेस को हार।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // संसदीय क्षेत्रीय एरिया से बड़वारा, मानपुर, बांधवगढ़, जैतपुर, जयसिंहनगर, अनूपपुर, कोतमा एवं पुष्पराजगढ़ कुल आठ विधानसभा को मिलाकर बना है।
शहडोल (एसटी) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य के 29 लोकसभा (संसदीय) निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है।यह एसटी श्रेणी की संसद सीट है। इसमें संपूर्ण अनुपपुर जिला शामिल है। कटनी जिले का हिस्सा और शहडोल जिले का हिस्सा और. संपूर्ण उमरिया जिला आता है बल्कि शहडोल का एक हिस्सा सीधी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। यहां लोकसभा क्षेत्र की साक्षरता दर लगभग 57.51% है।
शहडोल (एसटी) संसद सीट पर एससी मतदाताओं की संख्या लगभग 1712640 है जिनमें 872872 पुरुष मतदाता तो वहीं 839738 महिला मतदाता के साथ साथ लगभग 30 थर्ड जेंडर मतदाताओं का आंकड़ा सामने है।
शहडोल (एसटी) संसद सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 60 हजार है 2019 के संसदीय चुनाव के अनुसार शहडोल (एसटी) संसद सीट के कुल मतदाता- 1646230 रहें, 2019 के संसदीय चुनाव के अनुसार शहडोल (एसटी) संसद सीट के मतदान केंद्रों की संख्या - 2187 थी 2019 के संसदीय चुनाव में शहडोल (एसटी) संसदीय सीट पर बंपर मतदान 74.5% हुआ।
आइए समझते हैं राजनीतिक दलों की उतार चढ़ाव वाला इतिहास 2009 में जिस भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मरावी को कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ी केंद्रीय मंत्री रहे दलवीर सिंह की पत्नी राजेश नंदनी ने 13415 वोट से हराया था आज वही पराजित प्रत्याशी भाजपा की वर्तमान सांसद का राजेश नंदनी के दामाद हैं। दरअसल आंकड़े की बात करें तो 2009 में 263463 मतों को प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी को मिले 250019 ही वोट मिले इस कांटे की टक्कर में 13 हजार 415 वोट से भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा, 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो यहां भारतीय जनता पार्टी ने दलपत सिंह परस्ते को मैदान में उतारा था जिन्हें चुनाव में 525419 प्राप्त कर कांग्रेस पार्टी की राजेश नंदनी को 241301 वोट से हराया था इसके बाद 2016 में सांसद दलपत सिंह परस्ते की अचानक बिगड़ी तबीयत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था वहीं इलाज में लापरवाही हीलाहवाली के चक्कर में उनकी मौत हो गई थी और फिर शहडोल में उपचुनाव हुए इस बार भाजपा ने पुष्पराजगढ़ के ठीक विपरीत उमरिया से ज्ञान सिंह को लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था वहीं इस बार भी कांग्रेस ने राजेश नंदनी को मैदान में उतारा चुनाव नतीजे में कांग्रेस को 421015 मतो से संतुष्ट हो पड़ा तो वहीं भाजपा 4 लाख 81 हजार 3 सौ 98 वोट मिले भाजपा ने 60 हजार 3सौ 83 वोट से कांग्रेस को हराया, इसी क्रम में बीता चुनाव 2019 में हिमांद्री सिंह ने पाला बदलकर कांग्रेस पार्टी से भाजपा में शामिल हो गई और वहीं भाजपा से ही टिकट की दौड़ में पिछड़ी आईएएस की पत्नी प्रमिला सिंह ने टिकट के चक्कर में कांग्रेस पार्टी से ताल ठोक दी चुनाव दिलचस्प था लेकिन जयचंदो के चक्कर में कांग्रेस पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ी प्रमिला सिंह को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा,पला बदलकर भाजपा में आई हिमांद्री सिंह को 747977 वोट हासिल हुए तो वहीं कांग्रेस को मात्र 344644 वोट से संतुष्टी करना पड़ा, कांग्रेस को करारी मिली हार के बाद से यहां कांग्रेस पार्टी सदमे से गुजर रही है कि कौन अपना कौन पराया वही वर्तमान समय में पूर्व लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ बोलने वाली भारतीय जनता पार्टी के एक बार फिर पलटी मार चुकी है जो सीएम दौरे के बाद से ही टिकट की लाबिंग में सबसे आगे दिखाई दे रही थी लेकिन पार्टी ने रत्ती भर तवज्जों नहीं दी।
विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी में हम आपको बता दें कि शहडोल संसदीय क्षेत्र से सांसद बनने वाले लोगों में हीरा सिंह श्याम मनोज सिंह आर्मो और प्रमिला सिंह,सबसे उपर थे।लेकिन इस पर विचार करने की बात तो छोड़िए इन सभी में विराम लगाते हुए भाजपा ने पुनः हिमांद्री सिंह को एक बार फिर मौका दे दिया है। अब देखना यह है कि पूर्व में जनता से किए वादों पर कितना खरी रही सांसद घर घर दस्तक किस मुंह से देंगी। या इनके पास भी मोदी की गारंटी ही एक मात्र ब्रह्मास्त्र का सहारा लेकर जाना है।