पांच वर्ष से भाजपा पार्टी की सांसद की कहानी।
पति भी नहीं है साथ साथ फिर कैसे होगा क्षेत्रों में विकास।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // मध्यप्रदेश के शहडोल सांसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी का होने लगा विरोध।
क्षेत्र के जनता का एक ही सवाल पूछता है शहडोल का विकास कहा है पांच साल का हिसाब।
चुनाव के दिन है नज़दीक सांसद महोदया का दिखने लगा क्षेत्रों में तस्वीर।
देश में पुनः चुनाव का हुआ ऐलान चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा न की हो किंतु देश कि आज सबसे बड़ा राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लगभग आधी सीटों यानी 195 की संख्या प्रत्याशियों की अपनी पार्टी के सूची जारी कर दी और यह अपने आप में चुनाव की घोषणा की तरह देखा जाना चाहिए। क्योंकि चुनाव आयोग को बस अपनी एक औपचारिकता पूरी करनी है, जिस दिन मुहूर्त बनेगा उसी दिन वह औपचारिकता भी पूरी हो जाएगी। बहरहाल हम इन घोषित सीटों पर मध्य प्रदेश और विंध्य क्षेत्र की बात करेंगे।
शहडोल संसदीय क्षेत्र की जनता ने अगले बार आवाज उठाया था कि ऐसी संसद दुबारा ना दिजो भारतीय जनता पार्टी।
मध्य प्रदेश में जिन लोगों को आउट किया गया है उनमें से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल क्षेत्र की प्रज्ञा सिंह है जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल उस समय दुखाया था जब उन्होंने महात्मा गांधी के लिए अच्छे विचार नहीं रखे थे और तब मोदी ने कहा था कि वह प्रज्ञा सिंह को आत्मा से कभी माफ नहीं करेंगे। इस तरह अन्य घटनाओं को शामिल करते हुए प्रज्ञा सिंह ने अपनी उम्मीदवारी से नाम कटा बैठी।
वहीं और दूसरा महत्वपूर्ण चेहरा है शिवराज सिंह का जिन्हें विदिशा से चुनाव लड़ाने की घोषणा की गई है जबकि पुर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी प्रचंड जीत को बार-बार अपनी जीत बताते रहे किंतु भाजपा हाई कमान ने उन्हें खारिज करके नया चमत्कारिक मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को डॉक्टर मोहन यादव के नाम पर बना दिया।
इसके बाद लगने लगा था कि शिवराज सिंह के दिन अब बीतने वाले हैं अथवा उन्हें शिवराज के गुरु देश के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तरह मार्गदर्शक मंडल में शोभा के लिए रखा जाएगा। किंतु शिवराज सिंह ने अपना दबाव लगातार बनाए रखा इसके बाद उन्हें पहले ही सूची में विदिशा लोकसभा चुनाव से लड़ाकर मध्यप्रदेश से बाहर निकल जाने की भी घोषणा हो गई है; अगर वह चुनाव जीत जाते हैं तो..?
किंतु सीधी संसदीय क्षेत्र से विधायक चुनी गई रीति पाठक को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाया जा रहा है इस सीट को अभी अघोषित करके रखा गया है जबकि विंध्य क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों की घोषणा कर दी गई है।
जिसमें विधायक का चुनाव हार चुके सतना से गणेश सिंह ,रीवा से जनार्दन मिश्रा और शहडोल से हिमाद्री सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा कर दी गई है।
यह बताना रोचक होगा की सीधी संसदीय क्षेत्र की ब्राह्मण महिला रीति पाठक ने सांसद होने के बाद भी विधानसभा का चुनाव लड़ा और चुनाव जीतीं भी, जबकि ओबीसी नेता के सतना संसदीय क्षेत्र के सांसद गणेश सिंह ने सांसद रहते हुए विधायक का चुनाव हार गए थे, इसी तरह आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते मंत्री होने के बावजूद भी विधायक का चुनाव हार गए थे किंतु हाई कमान ने परिस्थितियों को देखते हुए उनके हार को सम्मानित करते हुए इन्हें पुन: एक बार संसद का चुनाव लड़ने के लिए सही ठहराया है। जबकि रीति पाठक विधायक का चुनाव जीत भी गई थी इसके बाद भी उन्हें ना तो कोई मंत्री पद दिया गया और ना ही सांसद बनने का दोबारा अवसर दिया गया, इससे कुछ ना कुछ विंध्य क्षेत्र में अवश्य संदेश जाएगा।
अब महत्वपूर्ण शहडोल लोकसभा क्षेत्र से हिमाद्री सिंह की उम्मीदवारी को लेकर के जो घोषणा है।
हिमाद्री सिंह भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक विरासत से आई हुई राजनेता नहीं है, बल्कि वह कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री रहे दलबीर सिंह और सांसद रही श्रीमती राजेश नंदिनी सिंह की एकमात्र पुत्री हैं जिन पर कांग्रेस ने अपना भाग्य आजमाया था और उन्हें भाजपा के ज्ञान सिंह से चुनाव लड़ने को भेज दिया था तब ज्ञान सिंह मंत्री थे, बावजूद इसके कि भारतीय जनता पार्टी की संगठन क्षमता और सत्ता मजबूत थी, कांग्रेस ने उन्हें चुनाव जीतने के लिए एक भी मजबूत नेता उस मध्य अवधि चुनाव में नहीं भेजा था ? जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपनी पूरी सत्ता की साम दाम दंड भेद की नीति के साथ शहडोल संसदीय क्षेत्र के कोने-कोने में चप्पे चप्पे पर भाजपा के पक्ष में काम किया था।
इसके बावजूद बहुत कम मार्जिन से भाजपा चुनाव निकाल पाई, जिससे हिमाद्री सिंह की विरासत की राजनीति की ताकत का एहसास न सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को है बल्कि उसे समय हाई कमान को भी यह सहज समझ में आ गया था की हिमाद्री सिंह लंबी दूर की नेता हैं और उन्होंने अपने तमाम पैसे फेंक कर हिमाद्री सिंह को भारतीय जनता पार्टी से अगला चुनाव लड़ाया।
भारतीय जनता पार्टी में हिमाद्री सिंह का यह दूसरा संसदीय कार्यकाल होगा अगर वह चुनाव जीतती हैं… तो बड़ी बात नहीं है की शहडोल को भाजपा की सत्ता बनने के बाद एक केंद्रीय मंत्री स्तर का बड़ा नेता मिल जाएगा… और हिमाद्री सिंह अपने माता-पिता की विरासत की वास्तविक हकदार होते हुए एक सफल नेता के रूप में उभर कर सामने आयेंगी फिलहाल भाजपा में उनके ससुर पूरे राजस्व मंत्री जय सिंह विधायक हैं उनके पति नरेंद्र मरावी पूर्व अध्यक्ष मध्य प्रदेश जनजाति आयोग हैं और सबसे बड़ा भाजपा का संगठन एक बाल उनके साथ है।
इस तरह शहडोल से अगर कांग्रेस ने भाजपा को हरी झंडी दे दी है कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि कांग्रेस शहडोल संसदीय क्षेत्र में इस तरह भगवान भरोसे बैठी है जैसे कि जब जनता अगर हवा बदलेगी तो हम भी हवा में उड़ आएंगे।इससे ज्यादा कांग्रेस की कोई संगठनात्मक सोच सामने फिलहाल तो नहीं दिख रही है। यह हिमाद्री सिंह के लिए प्लस पॉइंट है। हिमाद्री सिंह इस प्लस पॉइंट को मतदान पेटी तक कैसे टिका रख रख पाती हैं यह उनकी राजनीतिक कौशल और भाजपा की संगठन कुशलता का परिणाम होगा।