आदिवासी छात्रावास में वर्षों से चल रहा अधीक्षक राज ।
बच्चों को घटिया भोजन दे कर उड़ा रहे हॉस्टल का बजट ।
रिपब्लिक न्यूज।
शहडोल। अनुसूचित जनजाति विभाग में कार्यरत शिक्षकों की विधालय और हॉस्टलों में ट्रांसफर का सिस्टम सुन ठन्डे बस्ते में हो चला है।
यहां अब केवल अधीक्षकों और शिक्षकों का राज चल रहा है। जिले के पांचों विकासखंड अंतर्गत कुछ छात्रावासों और आश्रमों में खुले आम भ्रष्टाचार चरम सीमा को पार करता हुआ देखा जा सकता है ।
मुख्यालय स्थित कन्या छात्रावास और आश्रमों में खुल कर मनमानी और भ्रष्टाचार। बैगा छात्रावासों आश्रमों और जिला अंतर्गत सभी छात्रावासों और आश्रमों जिस पर अधीक्षकों की मनमानी खुलें आम चल रहा है।
कन्या छात्रावास में अधीक्षिका का एक तरफा राज
जिले के कन्या शिक्षा परिसर सीनियर/ जूनियर कन्या छात्रावास और आश्रमों में खुले आम हो रहा भ्रष्टाचार।
स्टे की राह पर चले जाते हैं छात्रावासों आश्रमों के अधीक्षक / अधीक्षिका ।
जिले के कुछ छात्रावासों में वर्षों से पदस्थ अधीक्षक और अधीक्षिका का कहना रहता है हमें नहीं रहना है हमें यहां से हटा दिया जाए लेकिन जब हटने का समय आता है तो माननीय उच्च न्यायालय से स्टे लेकर आते हैं।
फिर ऐसा क्यों होता है।
शासन के प्रावधानों को एक बस्ते में लपेट कर अपने महिला होने का नजायज फायदा उठाते हुए महिला कर्मचारी होने का दुरुपयोग कर नियम निर्देश को खूंटी में टांग कर रखते है। यहां केवल सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग कार्यालय में कुछ चुनिंदा बाबूओं को संतुष्ट कर मक्खन भोग लगाकर नियम निर्देश का धज्जियां उड़ाया जा रहा है। इन केन्द्रों की अंधेरगर्दी जिम्मेदार अफसरों को दिखाई नहीं पड़ती है ।
गोहपारू जनपद के हॉस्टलों में क्या चल रहा है कौन देखे?
गोहपारू विकास खण्ड अंतर्गत यहां संचालित एक आदिवासी बालक छात्रावास जो कि बालिका छात्रावास परिसर में ही संचालित है, वर्षों से अंधेर मची हुई है। यहां का अधीक्षक रामअवतार सिंह पिछले करीबन कई वर्षों से पदस्थ है। और मनमानी रकम आहरित कर जिले के अधिकारियों के चहेते अधीक्षक बनें हुए है।
जबकि रामवतार सिंह माध्यमिक शाला के शिक्षक है। यहां के बच्चों को भोजन भी गुणवत्तापूर्ण नहीं मिल पा रहा है।
एक ही जगह पर संचालित हास्टल बालक / बालिका छात्रावास में पति पत्नी रहें अधीक्षक पत्नी के आकस्मिक निधन के बाद स्वयं अधीक्षक बताते रहे हैं। पहले उसी हास्टल में रामअवतार की पत्नी माया सिंह अधीक्षक के पद पर थी । लेकिन उसकी मृत्यु हो जाने पर रामअवतार आनन-फानन में विभाग से समीकरण बैठाकर स्वयं उसकी जगह पर अधीक्षक बन बैठा। इसके बाद वह अपनी जड़ें जमाने लगा। जिले के कुछ अधिकारियों से उसने अपनी गोटी बैठा ली और धीरे धीरे निकटतम होता चला गया। आज हालत यह है कि अब यहां उसकी तूती बोलती है। उसने कुछ भाजपा नेताओं से भी गहरी दोस्ती कर रखी है ताकि आड़े वक्त वे उसके काम आ सकें।
एक ही किराना दूकान से मनमानी खरीददारी और बिलों का भुगतान।
हॉस्टलों में हर माह 30-35 हजार रुपए का सामान क्रय किया जाता है और रकम आहरित की जाती है। किराने व अन्य जनरल सामान गोहपारू की एक ही दूकान से क्रय किया जा रहा हैं और वर्षों से यही चल रहा है। अधिकारियों ने यह कभी नहीं देखा कि हॉस्टल जैसी शासकीय संस्था के लिए एक ही जगह से हजारों रुपए की खरीदी कैसे हो रही है।
इस किराने दूकान से बिल भी बनवाए जाते हैं। खरीदी में किराना सब्जी व अन्य सामान जिनकी तत्काल में आवश्यकता नहीं है वे भी दर्शाए जाते हैं। बिल कभी चेक नही किए जाते हैं। अधीक्षक की मनमानी चल रही है।
बच्चों को शासन के आदेश अनुसार नहीं मिल पा रहा सामाग्री।
हॉस्टलों में आदिवासी बच्चों की सुविधा के लिए यह प्रावधान किया गया है कि उन्हे साबुन, तेल, तौलिया आदि सारी सामग्री हॉस्टल से ही प्रदान की जाएगी। लेकिन हर माह हजारों की ऊल जलूल खरीदारी दर्शाए जाने के बावजूद बच्चों को दैनिक उपयोग कि कोई सामान नहीं मिल पा रहा है। सब सामान उन्हे घर से ही लाना पड़ता है।
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी हॉस्टल की लाइट अक्सर गुल रहती है।
बच्चे क्यों लेकर आते हैं मिट्टी तेल और मोमबत्ती सूत्र ।
कुछ छात्रावास में लाने के लिए दबाव डाला जाता है। बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना उन्हे धमकी देना उन पर रोब झड़ना इनकी आदत बन चुकी है बच्चे डरे सहमे से रहते हैं ताकि अपने और परिवार के समक्ष जीवन यापन कर सकें।
मीनू बोर्ड लापता घटिया भोजन परोस रहा क्या अधीक्षक राज? ।
हॉस्टल के बच्चों को शासन ने गुणवत्तापूर्ण भोजन के साथ फल व दूध आदि प्रदाय करने के नियम बनाए हैं।
शासन के आदेश अनुसार साथ ही सप्ताह में अलग अलग व्यंजन वेरायटी देने के लिए मीनू भी जारी किया है। लेकिन इन हॉस्टल में चावल दाल खिचड़ी के अलावा कुछ नहीं मिल पा रहा है। दूध व फल तो बच्चों ने यहां कभी देखा ही नहीं है। सप्ताह के कुछ दिन हलवा पूड़ी और खीर दिए जाने का प्रावधान है लेकिन बच्चे इन पकवानों का स्वाद ही नहीं जानते। हॉस्टल में कभी यह व्यंजन नहीं परोसे गए। इस तरह से कहां जाता है यह अधिकारियों ने कभी अधीक्षकों से पूछने की जरूरत नहीं समझा।
जिला के धनपुरी और खैरहा थाना क्षेत्र अंतर्गत अवैध कारोबार का बढ़ता करवा।
धनपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत धनपुरी तीन नम्बर चिप हाउस सिलपरी बंगबार कालोनी बेम्हौरी स्थित कई स्थानों पर जुंआ और सट्टे बाजार का कारोबार गांजा और नशीले पदार्थों का फैला हुआ है अवैध व्यापार का कारोबार जिसमें शामिल हैं । सोनू , चंद्र भान,अमन, अंकित,पवन कुमार,आशू, और विक्रम नाम के नव युवक इस अवैध कारोबार में लिप्त है जिसमें बीट प्रभारियों के कार्य प्रणाली पर उठ रहा सवाल। यही हाल खैरहा थाना क्षेत्र अंतर्गत धमनी कला सिरौंजा और कालोनी में जुंआ और सट्टे बाजार का कारोबार गांजा और नशीले पदार्थों का फैला अपार अवैध कारोबार जिसमें शामिल सट्टा जुआं किंग सिरौंजा कालोनी में संजय नामक व्यक्ति का घर और रास्ते में स्थित स्थान से हों रहा कारोबार धमनी कला में माहिर अपने अवैध कारोबार में बीट प्रभारियों कि मिली भगत से चल रहा है व्यापार। संबंधित थाना प्रभारी अंजान क्योंकि बीट प्रभारी हो सकतें हैं भागीदार ?! पवन कि तरह विशाल रूप से फैलता हुआ है धमनी कला में सट्टा किंग का अवैध रूप से कारोबार जिसमें शामिल हैं गांजा, नशीले इंजेक्शन, और ड्रग्स कोकिन का व्यापार। अगले अंक में प्रकाशित होगा सट्टा जुआं कारोबार किंग के नाम स्थान सहित।
