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 मनमुटाव चरम पर, बिगड़ सकते हैं जीत के समीकरण ! 


मध्यप्रदेश राज्य में किसकी बनेगी सरकार चुनावी सभा चल रहा जोरों शोरों से लेकर प्रदेश में विकास कार्य कराए जाने का नारा विंध्य क्षेत्र है हमारा।

शहडोल // मुख्यालय पर में सत्ता का रास्ता की 6 सीटों के नतीजों से तय होता रहा है। इसको लेकर चुनावी तानाबाना बुनने में लगी चिरपरिचित प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे को पटखनी देने का कोई मौका नहीं गवा रही है । दोनों दलों का न केवल फोकस इन्ही 6,6 सीटों पर है वरन चुनावी जमावट की रेस में वे एक - दूसरे से आगे निकलने की जी तोड कवायदों में जुटी हुई हैं । 

 

 जिले आते हैं । इनमें चुनाव दर चुनाव कांग्रेस के लिए खुशी के कम और गम के ज्यादा मौके आए हैं । बीते चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए जोर का झटका जोर से ही लगे कि तर्ज पर आए थे। में भाजपा से ज्यादा सीटों पर विजयी परचम फहरा कर कांग्रेस ने सत्ता की चाबी हासिल की थी । सत्ता की मलाई कांग्रेस 15 माह ही खा पाई और दलबदल के तूफान ने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया । एक बार फिर विधानसभा के महासंग्राम के लिए भाजपा - कांग्रेस चुनावी चौसर की जमावट में दिन दूनी रात चौगुनी गति से जुटी हुई है । 

  जिले की बात करे तो भाजपा के गढ़ बन चुके इस जिले में गत चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के वोट बैंक में न केवल सेंध लगाई बल्कि सीट पर विजयी परचम फहराकर जिले में जीत का खाता भी खोल दिया । इस सीट पर समर्थक पटेल ने कांग्रेस के लिए विजयी द्वार खोले थे । प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी मगर 15 माह बाद ही दलबदल के तूफान ने उपचुनाव करा दिया जिसमें भाजपा अंक गणित के जरिए फिर सत्ता में काबिज हो गई । इसी तरह की कहानी के ही जिले में भी दोहराई गई । यहां विधानसभा सीट से की समर्थक मानी जाने वाली ने चुनाव में कांग्रेस के लिए जीत दर्ज की फिर कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थाम और उपचुनाव में भाजपा का विजयी परचम फहरा दिया । इस तरह सियासी उठापटक के चलते शाह और मात का खेल चलता रहा ।  


जिले की ही विधानसभा सीट से गत विधानसभा चुनाव हारी समर्थक छाया मोरे ने भी हालही में कांग्रेस को अलविदा कह दिया है । उन्होंने  और छैगांव माखन ब्लाक में पार्टी द्वारा की गई ब्लाक अध्यक्षो की नियुक्ति पर एतराज जताकर प्रदेश संगठन से इनकी शिकायत की थी जिसमे उनकी चुनावी हार के लिए नवनियुक्तो को जिम्मेदार ठहराया गया था ! उनकी मांग को अनसुना कर दिए जाने से नाराज छाया मोरे ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया । इसी तरह जिले की विधानसभा के नेता दरबार ने भी कांग्रेस छोड़ दी है ! जिले में जहां एक ओर जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय जिले का दौरा कर कार्यकताओं को बैठके लेकर सांगठनिक मजबूती की कवायदे कर रहे है वही दूसरी ओर ताजा घटनाक्रम जिला कांग्रेस को झटका देने वाला साबित हो रहा है ।

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