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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की उड़ाई जा रही खुलकर धज्जियां संबंधित विभाग में पदस्थ अधिकारी कार्यालय प्रभारी के द्वारा।

सूचना के अधिकार 2005 के अधिनियम अनुसार आवेदन पत्र की फिर जांच कर,पारदर्शिता की भावना के अनुसार बिन्दुवार जानकारी दें। महुरकार  

कंपनी के सार्वजनिक हित फंड की जानकारी सीएसआर से सम्बन्धित जानकारी प्रदान करने के निर्देश। 

देश की सबसे बडी बीमा कम्पनी भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा सीएसआर फंड की जानकारी देने मे आनाकानी करने का मामला सामने आया है ।

यह बात अलग है कि इसके लिए आरटीआई आवेदक को शीर्ष संस्था सीआईसी (केन्द्रीय सूचना आयोग) मे अपील करना पडा ।








रिपब्लिक न्यूज।

शहडोल // शासन के द्वारा नियम निर्देशों का खुलकर सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है जबकि शासन के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 खंड 6 एक के द्वारा सार्वजनिक रूप या किसी भी कार्य में किए गए भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी अगर कोई भी लेना चाहे तो सूचना के अधिकार अधिनियम कानून के तहत सबको जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है संबंधित विभाग अधिकारी के कार्यालय द्वारा।

लेकिन एक ऐसा कार्यालय जहां सूचना के अधिकार अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। शहडोल कार्यालय भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा आरटीआई की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।

इस संबंध में अंचल के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा स्थानीय डीएम कार्यालय से जानकारी मांगी गई की 2020 तथा 2021 में सीएसआर सार्वजनिक हित फंड का ब्यौरा शहडोल मंडल अन्तर्गत इस योजना फंड का उपयोग कहा कहा किस कार्य के लिए किया गया है।

यह बात अलग है कि इस जानकारी को देने में भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा सीधे तौर पर इंकार किया गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत आपको सूचित किया जाता है कि सीएसआर जनकल्याण फंड का ब्यौरा भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय शहडोल में नहीं रखा जाता है अतः आप को उपलब्ध कराने में असमर्थ है।

 इस मामले में प्रथम अपील की गई उसमें भी अपील कर्ता को बताया गया कि भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय शहडोल से संबंधित 2020 तथा 2021 में सीएसआर जन कल्याण फंड का ब्यौरा मंडल कार्यालय शहडोल तथा क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल में उपलब्ध नहीं है अतः आप को उपलब्ध कराने में असमर्थ है।

भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा दिए गए जवाब से आरटीआई आवेदन कर्ता संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इस संबंध में उप पंजीयक सीआईसी (केंद्रीय सूचना आयोग) नई दिल्ली को एक पत्र के माध्यम से जानकारी मांगी गई जिसके प्रतिउत्तर में करीब 06 महीने बाद उनके द्वारा इस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 21 जून 2023 को सीधे तौर पर भारतीय जीवन बीमा निगम के संबंधित अधिकारी को लाइन में लेते हुए बात कराई गई ।

इस पूरे मामले में उल्लेखनीय तथ्य यह सामने आया कि केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली द्वारा 27 जून को दिए गए महत्वपूर्ण फैसले में संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया ।

मामले के तथ्यों और दोनों पक्षों द्वारा की गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए आयोग सीपी आईएल शहडोल को आरटीआई आवेदन की फिर से जांच करने और पारदर्शिता की भावना के अनुसार अपील कर्ता को बिंदुवार विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश देता है और आयोग को सूचना के तहत इस आदेश की प्राप्ति से 30 दिनों की अवधि के भीतर आरटीआई अधिनियम 2005 में नेट जवाबदेही कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सीएसआर की महत्वपूर्ण भूमिका और सामाजिक कल्याण पर इसके प्रभाव को उजागर करने वाले अपील करता के तर्क आलोक में आयोग सलाह देता है कि आरटीआई आवेदन में मांगी गई सीएसआर फंड पहल से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। 

उनके द्वारा अपने आदेश में यह भी उल्लेखित किया गया है कि एलआईसी के सीएसआर फंड द्वारा वित्त पोषित कई छात्रवृत्ति योजना और कल्याण कार्यक्रमों की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए इस डाटा की पारदर्शिता और पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। 

शहडोल मुख्यालय जैसे आदिवासी प्रधान क्षेत्र के कल्याण के लिए आवंटित धन के बारे में जानकारी की उपलब्धता की जानकारी रखने वाले समुदाय अत्यधिक महत्वपूर्ण रखते हैं।

केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा दिए गए इस फैसले की शहडोल मीडिया जगत में व्यापक प्रतिक्रिया देखी गई है। 

वहीं दूसरी ओर संबंधित भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय के अधिकारी इस बात के लिए चिंतित हैं कि वे अपनी ही बात को कैसे झूठला दें।

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