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अवैधकबाड़ कारोबार का बढ़ता साम्राज्य फल फूल रहे अनीस रहीम नूरूल उर्फ़ गुड्डू, जानूं ख़ान माफियाओं का व्यापार।

जिले में बढ़ता काले कारोबार का साम्राज्य।

रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल मुख्यालय जिला शहडोल अनूपपुर उमरिया में इन दिनों कानून व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारियों को सीधी चुनौती देते हुए कबाड़ माफिया का एक ऐसा खौफनाक और संगठित सिंडिकेट सक्रिय हो चुका है, जिसने पुलिस महकमे के तमाम आला अधिकारियों की चौकसी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

क्षेत्र में एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी जैसे कड़क प्रशासनिक अमले की मौजूदगी के बावजूद 'कबाड़ सिंडिकेट' पूरी तरह बेखौफ होकर फल-फूल रहा है। 

शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक आए दिन होने वाली लाखों-करोड़ों रुपये की चोरियों का खुलासा न हो पाना अब केवल एक संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। 

सूत्रों की मानें तो इस पूरे अवैध कारोबार साम्राज्य की कमान संभाग के दो बड़े चेहरों के हाथों में है, जिन्होंने पूरे कोयलांचल की सुरक्षा व्यवस्था को अपंग बना कर रखा है।

यह दोनों अवैध कबाड़ माफियाओं गुड्डू और जानू का नेटवर्क' शहडोल से अनूपपुर,उमरिया तक कारोबार साम्राज्य स्थापित है।

विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार, इस पूरे कबाड़ सिंडिकेट को दो हिस्सों में बांटकर चलाया जा रहा है। शहडोल जिले में इस अवैध कबाड़ कारोबार के खेल को सिंडिकेट बना कर गुड्डू ख़ान नामक कथित कबाड़ माफिया के पास है, तो वहीं पड़ोसी जिले अनूपपुर में कबाड़ के इस काले कारोबार के खेल का मालिकाना हक जानू ख़ान नाम का व्यक्ति के पास बताया जा रहा है।

 इन दोनों ने मिलकर पूरे संभाग स्तर पर एक ऐसा अदृश्य और मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया गया है, जिसके चलते सरकारी और निजी संपत्तियों को रात के अंधेरे में लगातार निशाना बनाया जाता है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं कि बिना किसी ठोस और ऊंचे रसूख के बिना इतने बड़े पैमाने पर कबाड़ कारोबार जो सिंडिकेट और इतने लंबे समय तक बिना किसी बड़ी कानूनी अड़चन के संचालित नामुमकिन है।

नाबालिगों को गुमराह कर बनाया जा रहा मोहरा,चार पहिया वाहन में सवार होकर देकर रात तक चलता है चोरी का कारोबार।

इस सिंडिकेट का सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें देश के भविष्य यानी नाबालिग युवाओं और छोटे बच्चों को जानबूझकर धकेला जा रहा है। 

सूत्रों का दावा है कि सिंडिकेट के आका इन नाबालिगों को, जिनमें कुछ दूर-दराज के रिश्तेदार और स्थानीय गरीब तबके के युवा शामिल हैं, अपनी चार पहिया गाड़ियां और कबाड़ काटने के आधुनिक औजार मशीनें मुहैया कराते हैं।

जिससे इन युवाओं को दिन के उजाले में पूरी तरह शांत रखा जाता है और जैसे ही रात का सन्नाटा पसरता है, इन्हें संभाग के अलग-अलग चिन्हित क्षेत्रों जैसे बंद कालरी व औद्योगिक संपत्तियों पर डाका डालने के लिए रवाना कर दिया जाता है। रात भर जागकर चोरी करने वाले ये लड़के सुबह 4 से 5 बजे के बीच माल लोड कर गुड्डू और जानू के सुरक्षित गोदामों तक पहुंचा देते हैं।

कॉलरी, रेलवे और रिलायंस के क्षेत्रों में सेंधमारी 

बुढ़ार, धनपुरी और अमलाई बने मुख्य केंद्र यह सिंडिकेट किसी आम चोरी को अंजाम नहीं दे रहा, बल्कि इसकी नजरें रिलायंस के क्षेत्रों, रेलवे की संपत्तियों और एसईसीएल की चालू व बंद पड़ी कोयला खदानों पर टिकी हैं। बुढ़ार धनपुरी, नवलपुर, अमलाई, जैतपुर, नौरोजाबाद, पाली और घुनघुटी जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और कॉलरी क्षेत्रों में इस सिंडिकेट ने अपनी जड़ें बेहद गहरी कर ली हैं।

 सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भारी मशीनरी, लोहा और कीमती औद्योगिक सामग्री गायब हो रही है। 

बंद पड़ी कालरियों के मलबे और रेल्वे के प्रतिबंधित क्षेत्रों से रात के अंधेरे में करोड़ों का लोहा काटकर कबाड़ के गोदामों में पहुंचा दिया जा रहा है, जिससे राजस्व को भारी चपत लग रही है।

सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध,बीएसएफ,गार्ड और अधिकारियों से साठगांठ की चर्चा

आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बाद भी चोरियां कैसे मुमकिन हैं? यह सवाल आज आम जनता के जेहन में कौंध रहा है। जिन क्षेत्रों में चोरियां हो रही हैं, वहां आम तौर पर बीएसएफ (BSF) के जवान, निजी सुरक्षा गार्ड और कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारी तैनात रहते हैं। बावजूद इसके, सिंडिकेट के गुर्गे बेधड़क अंदर घुसते हैं, घंटों तक गैस कटर और क्रेन जैसी भारी मशीनों का उपयोग करते हैं और माल लेकर चंपत हो जाते हैं। सूत्रों का आरोप है कि कबाड़ माफिया गुड्डू और उसके सहयोगियों की इन क्षेत्रों के कुछ भ्रष्ट सुरक्षाकर्मियों और जमीनी अधिकारियों के साथ कथित तौर पर गहरी मिलीभगत है। जब तक यह सांठगांठ अंदरूनी स्तर पर नहीं होगी, तब तक प्रतिबंधित क्षेत्रों से भारी-भरकम लोहा चोरी कर ले जाना किसी आम चोर के बस की बात नहीं है।

इंकार करने पर पुलिसिया कार्रवाई की धमकी देता गुड्डू, भय और मजबूरी के जाल में फंसे युवा

जांच का विषय यह भी है कि आखिर ये युवा इस दलदल से बाहर क्यों नहीं निकल पा रहे हैं? अंदरूनी सूत्रों ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि सिंडिकेट के कर्ताधर्ताओं द्वारा इन लड़कों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बनाया जाता है। यदि कोई युवक या नाबालिग इस अवैध काम को करने से इंकार करता है या दूरी बनाने की कोशिश करता है, तो उसे कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है। माफियाओं द्वारा साफ तौर पर कहा जाता है कि अगर रात को माल नहीं निकाला, तो उन्हें पुलिस की कथित सेटिंग के दम पर किसी भी झूठे और संगीन मामले में फंसा दिया जाएगा, जिससे उनकी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे सड़ जाएगी। इसी भय और रोज के मामूली 'खर्चा-पानी' के लालच में यह युवा पीढ़ी इस सिंडिकेट के इशारों पर नाच रही है।

सुबह की रोशनी से पहले गोदामों में डंप होता है माल,बेअसर साबित हो रही पुलिस गश्त 

इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली इतनी सटीक है कि पुलिस की रात्रि गश्त की दावों की हवा निकल जाती है। हर रात के लिए अलग-अलग क्षेत्र और टारगेट पहले से तय किए जाते हैं। चोरियों के बाद सुबह की पहली किरण फूटने से ठीक पहले, सारा माल गुड्डू और जानू के विभिन्न गुप्त और चिन्हित गोदामों में डंप कर दिया जाता है। दिन के समय ये शातिर चेहरे पूरी तरह कानूनगो बन जाते हैं और रात होते ही इनका सिंडिकेट सक्रिय हो जाता है।

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