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दो सौ टन कोयला एक्सपायर टी पी और अनाधिकृत रूट का खेल जांच में खुलासा हुआ।

रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल मुख्यालय अनूपपुर जिला में कोयले के अवैध कारोबार और हेराफेरी का एक ऐसा गठजोड़ सक्रिय है, जिसकी जड़ें सिर्फ सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एसईसीएल के खदान प्रबंधन से लेकर पावर प्लांट के दफ्तरों तक फैली हुई हैं। हाल ही में अनूपपुर पुलिस द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई ने इस संगठित तंत्र पर गहरा प्रहार किया है। बिजुरी थाना पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर देर रात दबिश देकर अवैध रूप से रूट बदलकर और एक्सपायर टीपी के सहारे दौड़ रहे 5 बड़े टेलरों को पकड़ा है, जिनमें लगभग 200 टन कोयला लदा हुआ था। पुलिस की यह कार्रवाई भले ही कागजी तौर पर एक परिवहन उल्लंघन दिखती हो, लेकिन इसके पीछे छिपा भ्रष्टाचार का पूरा का पूरा ग्रेड-बदली का खेल अब सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

यह कोई साधारण कागजी लापरवाही या रूट बदलने का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व और पावर प्लांटों को चूना लगाने वाली एक गहरी साजिश का हिस्सा है। शासकीय पावर प्लांटों के नाम पर ए-ग्रेड उच्च गुणवत्ता का प्रीमियम कोयला खदानों से उठाया जाता है, लेकिन कोल साइडिंग और अधिकारियों की सांठगांठ से रास्तों में ही इस बेशकीमती कोयले का ‘सौदा’ हो जाता है। पावर प्लांटों तक घटिया और कम ग्रेड का कोयला पहुंचा दिया जाता है, जबकि असली ए-ग्रेड कोयला अनाधिकृत रास्तों से ऊंचे दामों पर निजी उद्योगपतियों और माफियाओं के हाथों बेच दिया जाता है। रात के अंधेरे में बिजुरी पुलिस के हत्थे चढ़े ये 5 टेलर इसी बड़े सिंडिकेट का एक छोटा सा मोहरा मात्र हैं।

रात के सन्नाटे में पुलिस प्रशासन का छापा और माफियाओं में मचा हड़कंप।

अनूपपुर पुलिस अधीक्षक के कुशल निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी कोतमा के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अवैध उत्खनन व परिवहन रोधी अभियान के तहत यह सफलता मिली है। 

पुलिस प्रशासन द्वारा गश्त के दौरान रात्रि करीब 01:30 बजे बिजुरी पुलिस को खेडिया क्रेशर के पास बेलियाछोट की ओर से 05 संदिग्ध टेलर आते दिखे। पुलिस टीम ने जब घेराबंदी कर वाहनों को रोका और उनके दस्तावेजों की पड़ताल की, तो चालक किसी भी प्रकार का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

200 टन कोयला, एक्सपायर टी पी और अनाधिकृत रूट का खेल

जांच में खुलासा हुआ कि प्रत्येक टेलर में लगभग 40-40 टन कोयला लदा हुआ था। चालकों के पास मौजूद सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, उन्हें डोला होकर बिजुरी साइडिंग के तयशुदा रूट से जाना था। लेकिन इसके विपरीत बेलियाछोट से बिजुरी वाले अनाधिकृत और चोर रास्तों से होकर गुजर रहे थे। 

इतना ही नहीं, दो वाहनों की टीपी की समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी थी, जिसके बावजूद बेधड़क कोयले की ढुलाई की जा रही थी।

बिहार और कटनी के चालकों सहित 5 गाड़ियां जब्त पुलिसप्रशासन की इस सख्त कार्रवाई में जिन वाहनों को जब्त किया गया है, उनमें MP18ZC8029 (चालक शेख रमजान, निवासी कटनी), CG04PC1952 (चालक अमर सिंह गोंड, निवासी कटनी), CG10CA0657 (चालक राजेन्द्र रैदास, निवासी उमरिया), CG04RB5214 (चालक प्रदीप कुमार सिंह, निवासी औरंगाबाद, बिहार) और CG10BR9633 (चालक हीरा सिंह, निवासी अनूपपुर) शामिल हैं। इन सभी चालकों के खिलाफ धारा 18(1)(5) म.प्र. खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर वाहनों को थाने में खड़ा कराया गया है।

खनिज विभाग को सौंपा गया इस्तगासा, कड़ी कार्रवाई की तैयारी

चालकों द्वारा निर्धारित रूट का उल्लंघन करना और मर्यादा पार टीपी पर कोयला परिवहन नियमों का खुला उल्लंघन है। बिजुरी पुलिस ने सभी 05 वाहनों को विधिवत जब्त करने के बाद चालकों के विरुद्ध इस्तगासा तैयार कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई के लिए कलेक्टर कार्यालय (खनिज शाखा) अनूपपुर को प्रेषित कर दिया है। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने में संबंधित थाना प्रभारी के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन की सराहनीय भूमिका रही।

ए-ग्रेड कोयले की जगह पावर प्लांटों को ‘राख’ थमाने का महाघोटाला।

पुलिस की इस कार्रवाई से जो पर्दा उठा है, वह एक बेहद गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। नियमों के मुताबिक शासकीय पावर प्लांटों को बिजली उत्पादन के लिए ‘ए-ग्रेड’ का बेहतरीन कोयला भेजा जाना चाहिए। लेकिन सूत्रों की मानें तो कोल साइडिंग से लेकर पावर प्लांट के अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों पर तो ए-ग्रेड कोयला दर्ज होता है, मगर वास्तव में प्लांट में कम ग्रेड (घटिया) कोयला डंप कर दिया जाता है।

SECL अधिकारियों और बिचौलियों की साठगांठ कारोबारियों का होगा पर्दाफाश।

यह पूरा खेल एसईसीएल के जिम्मेदार अधिकारियों, और कोल ट्रांसपोर्टरों और बिचौलियों के एक मजबूत नेटवर्क के बिना संभव ही नहीं है। उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की रास्ते में ही अदला-बदली कर उसे निजी फैक्ट्रियों और ओपन मार्केट में दो से तीन गुना ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। इस बदस्तूर जारी हेराफेरी से जहां एक तरफ सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ घटिया कोयले के इस्तेमाल से पावर प्लांटों की कार्यक्षमता और सरकारी संपत्ति को भारी क्षति पहुंच रही है।

विजिलेंस और सीबीआई जांच से ही बाहर आएगा असली कोयला सिंडिकेट।

स्थानीय स्तर पर चालकों और गाड़ियों की जब्ती तो केवल सतह को खंगालने जैसा है। यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच विजिलेंस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराई जाए, तो एसईसीएल के शीर्ष अफसरों से लेकर पावर प्लांटों के उन सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं जो इस ‘काले सोने’ की दलाली में वर्षों से मलाई खा रहे हैं। देखना यह होगा कि अनूपपुर प्रशासन इस जब्ती को महज एक खनिज मामला मानकर दबा देता है या फिर इस अंतरराज्यीय कोयला सिंडिकेट की जड़ों पर कड़ा प्रहार करता है।

पुलिस अधीक्षक के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिले में अवैध खनिज परिवहन पर जीरो टॉलरेंस रहेगा।

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