व्यवस्था की लाचारी या बच्चों को ढाल बनाकर होती मैनेजमेंट की राजनीति?
छात्राओं का छलका का दर्द परिसर के मैनेजमेंट के खिलाफ।
अधीक्षक और प्राचार्य के मिलीभगत से क्या हो रहा भ्रष्टाचार।
रिपब्लिक न्यूज़।।
शहडोल मुख्यालय जिला के शासकीय माता शबरी कन्या आश्रम कंचनपुर कन्या शिक्षा आवासीय परिसर से एक बार फिर छात्रों का कर संबंधित विभाग पर टूट पड़ा जहां अधीक्षक के साथ-साथ कन्या शिक्षा परिसर में पदस्थ प्रभारी प्रचार और संबंधित विभाग के अधिकारियों के ऊपर मिली भगत मैनेजमेंट के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए छात्राओं ने लगभग 15 किलोमीटर बारिश में भयंकर जिला कलेक्ट कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज किया छात्रावास में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ लगभग 28 छात्राएं 15 किलोमीटर बारिश में भींगते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गईं।
छात्राओं ने अपने आरोप में खाने में कीड़े मिलते हैं और नाश्ता कामचलाऊ रहता है।
पिंग गंभीर विषयों पर छात्रावास के अधीक्षक और प्रचार के खिलाफ अपने शिकायत दर्ज किये।
लेकिन वही अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वाकई यह सिर्फ बुनियादी सुविधाओं की कमी है, या फिर हॉस्टल प्रबंधन की अंदरूनी खींचतान में मासूम बच्चियों को मोहरा बनाया जा रहा है?
बार-बार पैदल ही क्यों? जब भी कोई विवाद होता है, छात्राओं को सीधे सड़क पर 15 किमी पैदल चलाकर 'लाइमलाइट' और प्रशासनिक दबाव बनाने की रणनीति क्यों अपनाई जाती है?
क्या यह आक्रोश पूरे हॉस्टल का है या पूर्व और वर्तमान अधीक्षकों की आपसी गुटबाजी का नतीज़ा या संबंधित विभाग में कार्यरत पदस्थ अधिकारियों की लापरवाही किसकी?
अगर यह किसी के बहकावे में किया गया स्टंट है, तो पर्दे के पीछे से राजनीति करने वालों पर शिकंजा कब कसेगा?
चाहे वजह घटिया व्यवस्था का हो या हॉस्टल की अंदरूनी मामला राजनीति, सड़क पर भींगना इन बेटियों को ही पड़ता है। जांच समितियां तो पहले भी बनी हैं, लेकिन समाधान कब निकलेगा? अधिकारियों की क्या राय है क्या यह छात्राओं का वास्तविक दर्द है या प्रशासनिक राजनीति का नया आखाड़ा।