अवैध उत्खनन रेत भंडारण एवं परिवहन का धड़ल्ले से चल रहा कारोबार।
रिपब्लिक न्यूज़।।
शहडोल मुख्यालय मध्य प्रदेश के कई जिलों में अवैध रेत उत्खनन का कारोबार धड़ल्ले से संचालित किया जाता है जिसमें स्थानीय पुलिस प्रशासन के मिली भगत से माफियाओं के हौसले बुलंद रहता है ऐसा ही एक मामला शहडोल जिले अंतर्गत दोनों ब्यौहारी और जयसिंहनगर तहसील क्षेत्रों में कुदरत की अनमोल धरोहर और सरकारी खजाने पर डाका डालने का खुला खेल जारी है।
खुलेआम फल-फूल रहे अवैध रेत उत्खनन के कारोबार ने अब एक संगठित सिंडिकेट का रूप ले लिया है। आलम यह है कि इलाके के दर्जन भर से अधिक गांवों में दिन-रात पोकलैंड मशीनों और ट्रैक्टरों की गूंज से नदियां दम तोड़ रही हैं, लेकिन खनन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन का अमला मूंदकर बैठा हुआ है।
इस पूरे मामले में उठ रहे गंभीर सवाल अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं कि क्या कानून के रखवालों की आंखें सचमुच अंधी हो चुकी हैं या फिर कथित सांठगांठ और प्रत्येक माह मेनेजमेंट वारी के खेल में खाकी और प्रशासनिक अमला इस महाघोटाले का मूकदर्शक बना बैठा है?
शिकायत के बाद भी सुस्ती, आखिर किसकी सरपरस्ती?
हाल ही में एडवोकेट एवं आरटीआई एक्टिविस्ट अंशुमान सिंह परिहार द्वारा उच्च अधिकारियों को सौंपी गई लिखित शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शिकायत में नामजद उजागर किया गया है कि दोनों तहसील ब्यौहारी और जयसिंहनगर क्षेत्र के बरकछ, बराछ, रसपुर, खड्डूा, मनटोला, गोदावल, कलहारी, नौढ़िया, टांगर, रेकरा, जमुड़ी, पसगढ़ी, चरखरी, मझ, खामडांड सहित कई गांवों में अवैध रेत के विशाल पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं। बिना किसी वैध अनुमति के यहां से रीवा और सतना जिले के वाहनों के माध्यम से रेत का बेधड़क अवैध परिवहन जारी है। आरोप सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस और खनिज विभाग के उन अफसरों की ओर इशारा करते हैं जो शिकायतों के बाद भी दफ्तरों से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठाते।
सवाल उठना लाजिमी है कि जब बिना प्रशासनिक संरक्षण के एक डंपर रेत नहीं हिल सकती, तब इतने बड़े पैमाने पर करोड़ों के राजस्व का नुकसान और अवैध भंडारण किसकी शह पर हो रहा है? क्या जिला प्रशासन के पास इतनी बड़ी अवैध गतिविधि को रोकने की इच्छाशक्ति खत्म हो चुकी है या फिर रेत माफिया का रुतबा कानून से भी ऊपर हो चुका है?
पर्यावरण की बलि और जिम्मेदार तंत्र को सख्त चुनौती।
एनजीटी के सख्त नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नदियों के सीने को जिस बेरहमी से छलनी किया जा रहा है, उससे जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में आ गया है। जल स्रोतों के सूखने और पारिस्थितिकी तंत्र के तबाह होने के बाद भी केवल कागजी जांच का नाटक रचा जा रहा है। जनहित में अब यह बड़ी चुनौती है कि क्या जिला प्रशासन, पुलिस और खनिज विभाग ब्यौहारी तथा बाणसागर थाना क्षेत्रों में संयुक्त जांच दल गठित कर इन रेत माफियाओं और उनके आकाओं के ठिकानों पर कड़ा प्रहार करने का दम दिखाएंगे? अवैध रेत के स्टॉक को तुरंत जब्त कर वाहन मालिकों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई कब होगी?
अगर समय रहते इस सिंडिकेट और जिम्मेदार अधिकारियों की संदिग्ध चुप्पी पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि तंत्र पूरी तरह से माफिया के आगे नतमस्तक हो चुका है और निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली जनता के विश्वास को ताक पर रख दिया गया है।