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आई पी एल मैच का चल रहा खेल। सट्टे और जूएं का बढ़ रहा कारवां।

आईपीएल के साथ शहडोल संभाग में सट्टे का जाल सक्रिय, कोतमा बना संचालन का नया अड्डा।

संभाग के कई शहरों तक फैला नेटवर्क, स्थानीय एजेंटों के जरिए चल रहा खेल, पुराने सटोरिए की छाया में नया चेहरा सक्रिय।

रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल मुख्यालय जिला में इस समय सट्टे जूएं का कारोबार बढ़ाता हुआ जिसमें देश में संचालित इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत के साथ ही शहडोल संभाग में अवैध क्रिकेट सट्टा कारोबार एक बार फिर तेजी से पांव पसारने लगा है।

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार अनूपपुर जिले का कोतमा कस्बा इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालन केंद्र बनकर सामने आया है। यहीं से पूरे संभाग में फैले सट्टा कारोबार को नियंत्रित किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि इस संगठित नेटवर्क ने शहडोल संभाग के कई प्रमुख क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। भालूमाड़ा, अनूपपुर, अमरकंटक, अमलाई, धनपुरी, बुढार, शहडोल, पाली, नौरोजाबाद और उमरिया सहित कई जगहों पर एजेंट तैनात किए गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर सट्टा लगवाने और रकम के लेन-देन का काम संभाल रहे हैं।

अचानक चर्चा में आया नया नाम,जोशी ने संभाली बड़ी जिम्मेदारी।

सूत्रों के अनुसार कोतमा निवासी जोशी का नाम पहले इस अवैध धंधे में ज्यादा सामने नहीं आता था, लेकिन इस बार वह पूरे नेटवर्क के प्रमुख संचालक के रूप में उभरकर सामने आया है। बताया जाता है कि शहडोल का एक पुराना और सक्रिय सटोरिया क्रांति, जिस पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं, इस बार खुद सामने आने के बजाय परदे के पीछे रहकर काम कर रहा है और संचालन की जिम्मेदारी सुशील जोशी को सौंप दी गई है।

कम समय में ही जोशी ने पूरे नेटवर्क पर पकड़ बना ली है और कोतमा को कंट्रोल सेंटर बनाकर पूरे कारोबार की निगरानी कर रहा है।

नए चेहरों के जरिए पुराना खेल, कार्रवाई से बचने की रणनीति।

जानकारों का कहना है कि प्रशासन की नजरों से बचने के लिए सटोरिए अब नई रणनीति अपना रहे हैं। पुराने और चिन्हित चेहरों के बजाय नए लोगों को सामने लाया जा रहा है, जबकि असली संचालन पर्दे के पीछे से किया जा रहा है। सुशील जोशी का तेजी से उभरना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं, कार्रवाई पर उठ रहे सवाल।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस नेटवर्क को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यही वजह मानी जा रही है कि इतने बड़े स्तर पर गतिविधियां संचालित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

प्रशासन के लिए चुनौती बना बढ़ता नेटवर्क।

आईपीएल के दौरान सट्टा कारोबार अपने चरम पर रहता है, ऐसे में इस नेटवर्क का तेजी से विस्तार प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध कारोबार और अधिक मजबूत होकर व्यापक रूप ले सकता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और इस संगठित सट्टा नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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