भोपाल देश में नए कानून का किया जाए संचालन।
रिपब्लिक न्यूज।जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया है कि फैमिली कोर्ट का नाम बदलकर पारिवारिक समाधान केंद्र कर देना चाहिए, ताकि वहां आने वाले परिवारों और बच्चों को डर के बजाय समाधान का अहसास हो। उन्होंने बच्चों के मन से कानूनी माहौल का खौफ निकालने के लिए एक बड़ी बात कही कि जजों और वकीलों को काला कोट छोड़कर और पुलिस को वर्दी के बिना सामान्य कपड़ों में आना चाहिए। रोहिणी में नए कोर्ट परिसर के शिलान्यास पर उनकी इस पहल का मकसद कानूनी लड़ाई के बीच मानवीय रिश्तों और बच्चों की मासूमियत को बचाए रखना है।
न्यायपालिका को मानवीय चेहरा देने की दिशा में जस्टिस सूर्यकांत ने एक बेहतरीन सुझाव दिया है कि फैमिली कोर्ट का माहौल अदालती डर के बजाय घर जैसा महसूस होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के मानसिक सुकून के लिए जजों और वकीलों को काला कोट व गाउन छोड़कर और पुलिस को वर्दी के बिना सामान्य कपड़ों में रहने का प्रस्ताव दिया है। रोहिणी में नए कोर्ट परिसर के शिलान्यास पर उन्होंने इसे पारिवारिक समाधान केंद्र नाम देने की बात कही, ताकि कानूनी लड़ाई के बीच मासूमों के मन पर कोई बुरा असर न पड़े और रिश्तों को सुधारने का एक वास्तविक मौका मिल सके।
फैमिली कोर्ट का मकसद कानूनी झगड़े सुलझाना है-CJI।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि फैमिली कोर्ट का असली मकसद महज कानूनी झगड़े खत्म करना नहीं, बल्कि टूटते मानवीय रिश्तों को सहेजना है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि क्या हम इन अदालतों को 'पारिवारिक समाधान केंद्र' का नाम नहीं दे सकते? उनका तर्क था कि परिवार के विवाद किसी संपत्ति या दीवानी मुकदमे जैसे नहीं होते, ये उन लोगों के बीच का मामला है जो कभी एक-दूसरे के हमसफर थे और आज भी बच्चों की परवरिश जैसी साझा जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों में अदालती माहौल का लोगों के मन पर बहुत गहरा सामाजिक और भावनात्मक असर पड़ता है।