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अपने मांगों को लेकर ग्रामीण विकास उपयंत्री अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे।

रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल मुख्यालय जिला प्रशासन में पदस्थ मध्यप्रदेश राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत पदस्थ उपयंत्री पुरे प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं।

यह हड़ताल राज्य के सभी जिलों में चल रहा है जिससे सभी मनरेगा से जुड़े ग्रामीण विकास के कार्यों पर गहरा असर पड़ रहा है। 

उपयंत्री संघ का कहना है कि वे कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने रख रहे हैं लेकिन किसी भी प्रकार से समाधान या शासन का आश्वासन आदेश नहीं निकल रहा है जिसके बाद सभी उपयंत्रीयों को अपने मांगों को लेकर धरना पर बैठना पड़ा।

मनरेगा उपयंत्री संघ की मुख्य 8 सूत्रीय मांगें निम्नलिखित हैं।

वेतन विसंगति का समाधान, उपयंत्रियों की सबसे बड़ी मांग यह है कि उनके वेतनमान में सुधार किया जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से उनके वेतन में विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।

पदस्थ सभी क्षेत्रों में उपयंत्री सेवा अवधि के अनुसार वेतन मान में वृद्धि पदस्थ उपयंत्री चाहते हैं कि उनकी सेवा अवधि के आधार पर वेतन में वृद्धि की जाए।

ताकि उन्हें उनकी वर्षों की सेवा का उचित लाभ मिल सके।

अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान, अगर सेवा के दौरान किसी उपयंत्री की मृत्यु हो जाती है, तो उनके आश्रित को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। इस मांग को वे मानवीय आधार पर बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं।

नियमितीकरण, संविदा पर कार्यरत उपयंत्रियों को नियमित किया जाए। यह एक पुरानी मांग है, जिसे पूरा करने के लिए संघ लगातार प्रयास कर रहा है।

अनुशासनिक कार्रवाई में रोक, अधिकारियों द्वारा की जाने वाली एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उनका मानना है कि कई बार उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।

सुरक्षित कार्यस्थल, उपयंत्रियों के लिए काम करने का माहौल सुरक्षित बनाया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव या डर के अपना काम कर सकें।

तकनीकी और प्रशासनिक अधिकार, उपयंत्रियों को तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों में और अधिक अधिकार दिए जाएं, जिससे वे मनरेगा के कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें।

हड़ताल का प्रभाव सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे मनरेगा के कार्यों पर पड़ रहा है।

विकास कार्य ठप, मनरेगा के तहत होने वाले सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, और अन्य विकास कार्य रुक गए हैं, जिससे मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है।

मजदूरों पर असर, मनरेगा से जुड़े लाखों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ऑनलाइन कार्य प्रभावित, मनरेगा से संबंधित ऑनलाइन कार्य, जैसे मजदूरी का भुगतान, योजनाओं का पंजीकरण, और अन्य तकनीकी काम भी पूरी तरह से ठप हो गए हैं।

प्रशासनिक गतिरोध, जिला और जनपद पंचायतों में मनरेगा से जुड़े सभी प्रशासनिक कार्य रुक गए हैं, जिससे शासन की कई योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

उपयंत्री संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों को सरकार द्वारा लिखित में स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सामूहिक इस्तीफा देने तक की चेतावनी दी है। यह देखना बाकी है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और कब तक यह गतिरोध समाप्त होता है।

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