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रिलायंस के सीबीएम प्रोजेक्ट गैस उधोग उत्पादन कंपनी के खिलाफ जनसुनवाई में हुई शिकायत।

समक्ष में जनसुनवाई आयुक्त महोदया संभाग शहडोल में दर्ज किया गया शिकायत।

आवेदक ने आवेदन देकर लगाए कई गंभीर आरोप।

शहडोल मुख्यालय मध्यप्रदेश राज्य में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के जिला शहडोल क्षेत्र में स्थित सी बी एम उद्योग द्वारा भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित आदिवासी विशेष क्षेत्र शहडोल में विहित खनिज अनुबंध न कराकर अवैध रूप तरीके से गैस उत्खनन, परिवहन तथा बहुमूल्य आदिवासी क्षेत्र की जमीनों में हेरा फेरी कि शिकायत एवं चिन्हित कर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ दांडिक कार्यवाही हेतु।

जिस पर संदर्भ 1 एक शहडोल खनिज विभाग द्वारा वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी, राजस्व क्षेत्र लेखा परीक्षा महालेखाकार अरेरा हिल्स भोपाल को लिखे गए पत्र क्रमांक खनिज/ 2020/ 1966 शहडोल दिनांक 3 जुलाई 2020, और उसके साथ शहडोल जिला प्रशासन को दुसरा पत्र लिखा गया जिसमें 2 - अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर द्वारा लिखे नोट सीट प्रकरण क्रमांक 24/अ- 24/2020-21 आदेश दिनांक भी 28.9. 2020,

विषयांतर्गत निवेदन है कि निवेदक त्रिलोकी नाथ गर्ग शहडोल में 36 वर्ष से पत्रकारिता क्षेत्र में तथा समाज सेवा में संलग्न आदिवासी बहुमूल्य विशेष क्षेत्र शहडोल का निवासी है। 

अनुरोध है कि संदर्भ पत्रों का अवलोकन करने की कृपा करें।

1- संदर्भित पत्र क्रमांक 1 का अवलोकन करने से स्पष्ट है कि शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र की भूमि से उत्खनन कर निकलने वाले सी बी एम प्रोजेक्ट के माध्यम से गैस के विशाल भंडार पर एकाधिकार का अधिकार मुंबई स्थित निवासी मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज कंपनी को 20 वर्ष पट्टे पर दिया गया है। और यह भी स्पष्ट है की 15 वर्ष करीब बीत जाने के बाद भी मुकेश अंबानी के द्वारा मध्यप्रदेश राज्य के जिला शहडोल के क्षेत्रों में अवैध रूप से सी बी एम प्रोजेक्ट के माध्यम से गैस का उत्पादन करने के साथ करते हुए मध्य प्रदेश खनिज अधिनियमों के अनुरूप विहित कानूनी अनुबंध नहीं किया गया है। जब कि खनिज विभाग अथवा शहडोल कलेक्टर द्वारा लगातार पत्राचार किया जाता रहा है। उद्योग द्वारा अपने प्रभुत्व का और अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर खनिज-अनुबंध न करने के के रास्ते बहाने ढूंढते गए हैं। मध्य प्रदेश लेखाकार द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में शहडोल कलेक्टर खनिज द्वारा स्पष्ट रूप से जानकारी प्रेषित की गई है।

मेरे सूत्रों के अनुसार मुकेश अंबानी द्वारा अपने उद्योग का मध्य प्रदेश खनिज अनुबंध की अवहेलना करके अथवा उसमें टाल-मटोल करके खनिज अनुबंध के द्वारा होने वाली कथित तौर पर 1000 करोड रुपए के शासकीय राजस्व स्टांप ड्यूटी की भुगतान न करके चोरी भी की गई है और बिना इस राजस्व को पटाए गैस का अवैध उत्खनन किया जा रहा है । स्पष्ट तौर पर जब इस पारदर्शी चोरी को शासन और प्रशासन के कर्तव्य हीनता के कारण किया जा रहा है तो गैस के मूल्य में गैस के उत्पादन में अथवा गैस परिवहन में भी भारी हेरा फेरी की जा रही होगी. जिसकी जांच करने की हैसियत प्रशासन नहीं दिखा पा रहा है क्योंकि उसकी कोई निष्पक्ष या पारदर्शी प्रक्रिया ना तो शहडोल के संबंधित ग्राम सभाओं को बताई जाती है और ना ही जिला प्रशासन अथवा राज्य शासन को दी जाती है। सिर्फ तथाकथित रॉयल्टी के नाम पर रॉयल्टी भुगतान किया जाता है। जो संदेह प्रकट करता है की वास्तविक और सत्य से परे हो सकता है। क्योंकि इसके विशेषज्ञ कम से कम शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्र में ना तो ग्राम सभाओं में हैं और ना ही खनिज विभाग के कर्मचारियों में क्षमता है। बल्कि दिल्ली में अपनी राजनीतिक पहुंच और भ्रष्टाचार के जरिए दबाव बनवा करके किसी न किसी बहाने से स्टांप ड्यूटी में छूट पाने और जवाब दे ही से बचाव किया जा रहा है। इसमें कोई शक नहीं है।

निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से तत्काल सक्षम प्रक्रिया से आदिवासी क्षेत्र की प्राकृतिक संसाधन के अवैध उत्खनन एवं वास्तविक उत्खनन को जांच की जाए एवं खनिज अनुबंध हेतु तत्काल दवा बनाकर कार्यवाही की जाए तब तक उद्योग पर रोक लगाई जाने की विधाई प्रक्रिया से प्रभावी कार्रवाई की जावे। 

2- पत्र में संदर्भित क्रमांक 2 में स्पष्ट तौर पर तहसीलदार सोहागपुर द्वारा लेख किया गया है की रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा खसरा नंबर में संदेहास्पद रूप से हेरा फेरी करके जमीन पर नाजायज कब्जा किया गया है। जिसके लिए ना तो कोई भुगतान किया गया है और ना ही किसी भी प्रकार का जवाब देही पूर्ण कार्यवाही की गई है। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज की इस गैर जिम्मेदारी से शासकीय राजस्व के साथ अन्य आसपास की आदिवासी विशेष क्षेत्र की जमीनों पर संविधान की पांचवी अनुसूची की मंशा के खिलाफ अतिक्रमण भी किया गया है, ऐसा प्रतीत होता है। जिसके लिए जिला प्रशासनिक अधिकारी सोहागपुर तहसीलदार द्वारा प्रभावी कार्यवाही अब तक नहीं की गई है। जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के आर्थिक भ्रष्टाचार का प्रमाण हैं। 

जिस पर तत्काल पृथक से कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृपा हो एवं दोषी व्यक्तियों के खिलाफ दांडिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

अनुरोध है कि भारत की संविधान की पांचवी अनुसूची में भी अनुसूचित और सुरक्षित शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र में यदि उद्योगों के नाम पर अवैध काम करने वाले मुकेश अंबानी और उनके सहयोगी तमाम व्यक्तियों को इस प्रकार से संरक्षण दिया जाएगा तो संविधान की मंशा के खिलाफ क्रियान्वयन तो होगा ही इस बहुमूल्य आदिवासी विशेष क्षेत्र की प्राकृतिक पर्यावरण और परिस्थिति की तथा आम आदमियों का जन जीवन तथा वन क्षेत्र में जैव विविधता के लिए भारी संकट खड़ा हो जाएगा।

क्योंकि " रिजिनल इंडस्ट्री कांक्लेव के नाम पर भी मनमानी तरीके से ऐसे ही उदाहरण के आधार पर औद्योगिक अराजकता को बल मिलेगा। तथा अधिकारी अपने कर्तव्यों से बचते रहेंगे। 

याद दिलाना उचित होगा किसकी पूर्व भी ओरिएंट पेपर मिल द्वारा गैर कानूनी तरीके से सोन नदी का पूरा पानी लिया जाता रहा 1992 में सतर्कता के बाद 1998 में नियम बने और तब यह स्पष्ट हुआ की करीब 300 करोड रुपए जलकर का राजस्व अकेले ओरिएंट पेपर मिल से पाना शेष है जो अपने राजनीतिक हैसियत व ताकत से घटकर करीब 100 करोड रुपए रह गया है जिसका भुगतान भी नहीं किया गया है।

आपसे विनम्र प्रार्थना है की आदिवासी विशेष क्षेत्र में उचित समिति बनाकर के अथवा सक्षम तरीके से जांच करके इस वृहत राजस्व चोरी की परंपरा को रोकने की कृपा करें साथ ही नींबू के तहत खनिज उत्पादन किया जाने से आम जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कृपा करें। इस हेतु मेरे स्तर पर जो भी सहयोग होगा मैं देने को तत्पर हूं।

शिकायत कर्ता त्रिलोकीनाथ गर्ग शहडोल।

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