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अनुभवहीन निर्णायकों के निर्णय से प्रतिभावान के प्रतिभा का हुआ हनन।

जिला में हुई संभाग स्तरीय बाल रंग प्रतियोगिता में बनाए गए निर्णायकों को सुगम संगीत और लोक संगीत में नहीं है अंतर पता।

जिन्हें सुर- ताल का नहीं है पता उन्हें बना दिया बाल रंग प्रतियोगिता में निर्णायक कैसे करेंगे प्रतिभाओं का चयन।


रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल // मुख्यालय में हुई संभागीय बाल रंग प्रतियोगिता में पदस्थ निर्णायकों की भारी लापरवाही नहीं पता है लोक संगीत और सुगम संगीत में अंतर न ही संगीत की है जानकारी, फिर भी बनाएंगे प्रभारी।

संचालनालय लोक शिक्षण मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित बाल रंग प्रतियोगिता में शहडोल ज़िला में स्तरहीन साउंड सिस्टम एवं अव्यवस्थाओं के कारण बच्चे नहीं कर पा रहे अपना अच्छा प्रदर्शन यह हाल विगत 5 वर्षों से है, पर नहीं हो रहा स्तर हीन व्यवस्था में कोई परिवर्तन। ज़िम्मेदार कौन?

आपको बता दें कि दिनांक 18 नवंबर 2024 को उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक  विद्यालय के हाल में आयोजित बाल रंग की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता जिसमें भारी अव्यवस्थाओं को देखा गया एवं चारों तरफ गंदगी का अंबार रहा साउंड सिस्टम में एक छोटा सा बॉक्स रख दिया गया जबकि प्रतियोगिता में लोक नृत्य, सुगम संगीत, लोकगीत आदि तरह की विभिन्न प्रतियोगिताएं थी जिसमें कम से कम 5 से 10 माइक और अच्छे स्पीकर का होना जरूरी था। लेकिन मात्र दो माइक आउटपुट वाले साधारण से घर में उपयोग होने वाले स्पीकर से प्रतियोगिता संपन्न कराई गई जिससे प्रतिभागियों में काफी रोष उत्पन्न रहा और कहा गया कि ऐसे में प्रतिभाओं का हनन होगा ना की निखार।

बात करें निर्णायकों की तो निर्णायकों को यह ही नहीं पता की सुगम संगीत क्या है लोक संगीत क्या है और संगीत की कोई भी जानकारी उन्हें नहीं है फिर भी उन्होंने अपने मन से कुछ भी निर्णय दिया, निर्णायकों में से एक सविता चतुर्वेदी से पूछा गया की सुगम संगीत की यह प्रस्तुति अच्छी थी पर आपने इस प्रथम स्थान क्यों नहीं दिया तो उन्होंने कहा कि यह सुगम संगीत नहीं था यह लोक संगीत था, इसलिए मैंने नहीं दिया, अगर निर्णायक मैडम ने एक बार गूगल पर सर्च कर लिया होता तो सुगम संगीत क्या होता है तो उन्हें पता चल जाता की हो रही प्रस्तुति सुगम संगीत है या लोक संगीत,

निर्णायकों के विरोध में अरमान द्विवेदी जिसने सुगम संगीत में अपनी प्रस्तुति दी थी उसने लिखित रूप से प्राचार्य उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग शहडोल को आवेदन दिया है और पुनः प्रदर्शन कराने और जानकार निर्णायकों से निर्णय कराने का अनुरोध किया है।

शासन द्वारा संचालित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं पर इस तरह की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैये से जिस मनसा से इन प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है ऐसे में प्रतिभाओं का हनन होता है ना कि उनका उत्थान।

अब देखना यह है कि इस प्रतियोगिता के आयोजन  कर्ताओं द्वारा अगला क्या कदम उठाया जाता है जिससे प्रतिभागियों को सही निर्णय दिया जा सके।

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