भूमाफियाओं ने तोड़ा गरीब मजदूर परिवार की झोपड़ी।
वर्षो से कर रहा था निवास।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // मुख्यालय मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कब्जा कर भूमाफियाओं का बढ़ता आतंक, भूमाफियाओं के बढ़ते कदम अपने दबंगई से शासकीय भूमि के साथ साथ गरीबों और कमजोर मजदूर परिवार के भूमि पर कब्जा करते देखा जा सकता है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां दबंग भू-माफिया ने जिला प्रशासन अधिकारी स्थानीय नगर से लागे ग्राम पंचायत गरीब परिवार के आवास को किया नष्ट गोरतरा में गणेश क्रेशर के पास विगत कई वर्षो से हरिजन परिवार झोपड़ी बनाकर निवासरत रहा। वही नजदीक की भूमि में कब्जा दखल के भूमाफियाओं ने अपने निजी फायदे के लिए बिना किसी सूचना के रातों-रात गरीब परिवार का झोपड़ी गिरा कर नष्ट कर दिया। जिससे प्रार्थी हरिजन परिवार अत्यंत प्रताड़ित। इस मामले में पूर्व से ही भूमाफिया संतोष दुबे द्वारा हरिजन परिवार को कई बार परेशान किया गया और विवाद करते हुए घर गिराने की धमकी दी जाती रही, जिसकी लिखित शिकायत हरिजन परिवार द्वारा थाने में की गई है।
लेकिन संबंधित प्रशासन के द्वारा किसी प्रकार से कार्यवाही नहीं की गई। पीड़िता के बताया अनुसार कि ग्राम गोरतरा में भूमाफिया संतोष दुबे द्वारा कई जगह भूमि अधिग्रहण करके रखा गया है उसके आने-जाने के रास्ते में कुछ हिस्सा की भूमि झोपड़ी का आ रहा था जिसे हटाने के लिए संतोष दुबे के द्वारा मेरे परिवार को हटाने एवं घर गिरने की धमकी दी जाती थी। विगत दिनों पारिवारिक कार्य से परिवार के सभी लोग शहडोल अपनी बहन के यहाँ गये हुये थे तथा गोरतरा ग्राम वाले घर में कोई भी नहीं था।
उसी रात का फायदा उठाते हुये अपनी दबंगई के जोर पर उक्त गरीब परिवार की झोपड़ी को गिरा दिया गया जिससे उस परिवार का जीवन-यापन करने और खाने पीने का रखा सारा सामान नष्ट हो गया। मजदूर परिवार ने घटना के बाद से ही इस मामले की शिकायत के लिए थाने में कई चक्कर लगाये लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई और न ही एफ.आई.आर. लिखी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एसडीएम कोर्ट से विगत दिनों ग्राम गोरतरा के रकबा नं. 255 की बेदखली का आदेश पारित किया गया था जिस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। उसके विपरीत रकबा 225 जहाँ गरीब मजदूर परिवार झोपड़ी बनाकर निवासरत रहा उस भू-माफिया द्वारा पटवारी और आर.आई. से साँठ - गाँठ कर अपने निजी फायदे के लिए कार्यवाही की गई जिसका विरोध भी किया गया था।
लेकिन प्रशासनिक अधिकारी और भूमाफिया संतोष दुबे की मिलीभगत होने के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई।
उक्त घटना मे सम्बंधित पटवारी, आर.आई. की भूमिका भी संदिग्ध भूमिका नजर दिखाई देती है।
