RSS में मचा है हंगामा;
मैया, मैं तो चंद्र खिलौना लैइहौं….। (त्रिलोकी नाथ)
रिपब्लिक न्यूज।।
भोपाल // मध्यप्रदेश शहडोल हम आदिवासी विशेष क्षेत्र के निवासी हैं और अंतत: यही अर्धसत्य है कि हम आदिवासी हैं अगर हमने यहां की पर्यावरण और परिस्थितकी को स्वीकार लिया है याने हमने मातृ भूमि मान लिया।
वैसे भी इसकी घोषणा स्वयं आदिवासी वर्ग की भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने शहडोल के लालपुर हवाई अड्डे पर आकर की थीं। इसमें कोई शक नहीं है।
इसलिए अपनी-अपन समझ की स्तर पर जो हम समझ पाए हैं उसके अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण वर्ग के समापन पर नागपुर में मोहन भागवत, नई मोदी सरकार बनने के साथ ही जितना चिल्ल-पों को मचा रहे हैं। उससे यह पता चलता है कि बच्चा भूखा बहुत है और उसे मां को दूध पिलाना चाहिए…?
आप कह सकते हैं, बिन बाप का बच्चा हां जी.. के दौर में जो आरएसएस संगठन में विवाह न करने पर उसके प्रमुख बनाए जाने की घोषणा होती है वहां पर कोई किसी का मां अथवा बाप कैसे बन सकता है..? फिर भी भारत देश की इस गैर पंजीकृत सबसे बड़े संगठन की विचारधारा से भारतीय जनता पार्टी का जन्म हुआ है। इसी तरह की rss के और भी कई लड़के हैं..। यह होता चला आया है देखा भी गया है विषेश कर मुस्लिम शासक परिवारों में सत्ता के लिए लड़कों ने अपने बाप को कैद करवा दिया या हत्या कर दी देखा भी गया है। जब लड़का बड़ा हो जाता है तो वह मित्र हो जाता है और उसकी अपनी नई सोच विकसित हो जाती है यही सोच rss की भाजपा के मोदी-सरकार नामक लड़के में हुई. उनका एक मैनेजर भाजपा के अध्यक्ष हैं चड्ढा जी ने अपने मीडिया के इंटरव्यू में स्पष्ट भी कर दिया था कि अब भाजपा को rss की जरुरत नहीं है.. यह अलग बात है की चुनाव परिणाम में मोदी-सरकार को जब उसकी औकात का पता चल गया, सब मोदी-सरकार की सदस्यों की भाषा बदलने लगी है. किंतु वह अभी भी rss को प्रायोगिक तौर पर तवज्जो देने के मूड़ में नहीं है इससे गुस्साए कभी मोदी-सरकार के परवरिशकर्ता रहे मौका देख जोर-जोर से रोना चालू कर दिया है। ताकि सरकार की हिस्सेदारी उनकी भी सुरक्षित रहे जितना वह अनुपात मे मानते हैं। जो स्वभाविक है ।
लेकिन rss ने मोदी-सरकार के साथ गठबंधन में गुप्त चुनाव नहीं लड़ा था इसलिए मोदी-सरकार हिस्सा क्यों देगी…? अब तो मोदी सरकार के प्रमुख नरेंद्र मोदी ने निर्देश भी जारी कर दिया है कि अपने सोशल मीडिया से “मोदी का परिवार” नाम हटा दीजिए…। याने जो आदेश नहीं मानेगा उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता..?
होता है हर घर में, होता है; किसी लड़के को जिम्मेदारी मिल जाती है और धोखे से वह शक्ति संपन्न हो जाता है तो
पूरे परिवार का संपत्ति, मान-सम्मान को अपनी प्रॉपर्टी समझने लगता है और उसे लूटने का प्रयास करता है। उसे इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता बाकी की परिवार के लोग भीख मांगने की श्रेणी में आ जाएंगे और यदि इसका विरोध उसे जन्म देने वाले मां-बाप भी करते हैं तो वह उन पर भी गाली-गलौज कर मारने पीटने भी करता है ताकि उसकी तानाशाही के खिलाफ कोई खड़ा न हो।यह अलग बात है इस कृत्य से उसका भी नाश सुनिश्चित हो गया होता है और परिवार बुरी तरह से सफर कर जाता है।
दरअसल राष्ट्रीय स्वयंसेवक जिसे पहले जनसंघ के नाम से पैदा किया था वह बाद में भारतीय जनता पार्टी के नाम पर अपना अस्तित्व बनाई शायद पालन पोषण में कुछ कमी रह गई, जिसकी वजह से भाजपा के अंदर “मोदी-सरकार” नाम की नई कॉर्पोरेट संस्था स्थापित हो गई।
“या देवी सर्व भूतेषु भ्रांति रूपेण संस्थिता “
मंत्र नाम जाप कर के इसे पाल-पोस कर बड़ा किया वह “मोदी सरकार” नाम की कॉर्पोरेट संस्था बन गई..
और भारत सरकार का संविधान कहता है जिसकी बहुमत है सरकार उसी की है । और शायद संबंध में सनातनी तनातनी के दौरान ही यह चुनौती सामने आ गई कि हम 400 बार करके दिखाएंगे… और शायद मोदी-सरकार नामक संस्था के कॉन्फिडेंस डरी हुई rss परिणाम का इंतजार कर रही थी । जैसे ही परिणाम कमजोर आया नागपुर से rss प्रमुख मोहन भागवत ने वर्षों पुराना भागवत-प्रवचन सुना दिया। और इसे इतना जोर-जोर से बोला कि वह हाय-तौबा… चिल्लपों… जैसा लगने लगा। या फिर यह कुछ गठबंधन सरकार को नियंत्रित करने का स्क्रिप्टटेड (पूर्व लिखा हुआ) प्लान है। क्योंकि जहां बिना मर्जी के पत्ता भी नहीं हिलता हो, वहां “दासी-मीडिया”इतना प्रचार-प्रसार नहीं करती…..।
अथवा इस बागी हो चुके “मोदी-सरकार” को अब मां मानकर अपनी भूंख दिखाने की लिए भूखे बच्चे की तरह चिल्ल-पों किया जा रहा है…? की “मैया, मैं तो चंद्र खिलौना लइहों…”किंतु गठबंधन की राजनीति में समस्या यह है कि वह किसको कितना बांटे…? क्योंकि चुनाव में जो सोर मोदी-सरकार के प्रमुख नरेंद्र मोदी ने चीख चीख कर कहा थे की “वे मंगलसूत्र छीनकर उन्हें बांट देंगे..”और जिस प्रकार से भारत या राज्यों को गिरवी रख कर के देश चलाया जा रहा है तो अब मंगलसूत्र ही गिरवी रख कर के गठबंधन सरकार को चलाना पड़ेगा…?
वर्तमान राजनीति परिदृश्य की समस्या है कि जो पितृ-पुरुष है वह कभी मातृ -संस्था हो जाती है.., जो पुत्र है कभी उसे मां मानना पड़ता है..? जो मुस्लिम आरक्षण को गैर कानूनी बताते थे अब उन्हें उठकर मुस्लिम आरक्षण को बंदे मातरम बताना पड़ता है… क्योंकि तथाकथित घोषित मुस्लिम आरक्षण को आंध्र प्रदेश और बिहार में सम्मान देना पड़ेगा…इन परिस्थितियों के बीच में सिर्फ मंगलसूत्र ही रह जाता है इसे बेचना ही होगा और दुर्भाग्य यह है, जहां पति है वहां पत्नी नहीं है जहां पत्नी है वहां पति नहीं है। जहां परवरिश कर्ता की पहचान नहीं है वहां पर भारत का संविधान को पुनः प्रणाम करते दिखने वाले मोदी-सरकार, संघ विचारधारा को कितना हिस्सा दे पायेगी…?
यह बाद rss प्रमुख मोहन भागवत भी जानते हैं इसीलिए वे ज़ोर ज़ोर से बोलकर रो रहे हैं…अन्यथा उन्हें अभी जो सब कुछ दिख रहा है एक साल पहले से क्यों नहीं दिख रहा था…?
क्योंकि हम शहडोल आदिवासी क्षेत्र के नागरिक हैं इसलिए हमें लगातार दिख रहा है हमारा खनिजकोयला, हमारा पानी, हमारा पत्थर, हमारे पेड़ पौधे, हमारी हवा हमारे नाला हमारी नदी हमारे रेत…आदि कॉर्पोरेट, मोदी-सरकार की समझ से नीलाम कर दिया गया है और हम आदिवासी क्षेत्र निवासी लोगों को जो शहज सुलभ प्रकृति दत्त था उसे भी छीन कर शासन ऑफ प्रशासन के चौकीदार खड़े करके माफियाओं द्वारा हमीं को बेचा जा रहा है। और हम सुनियोजित तरीके से लूटे जा रहे हैं….। जबकि हम लाखों की संख्या में है तो अगर लड़का नालायक निकल जाए और मारे पिटे चुपचाप बर्दाश्त करना चाहिए या फिर युद्ध करना चाहिए, हिस्सा नहीं मिलेगा यही अभी तक का संविधान हमने देखा है ।
तो अगर औकात है तो युद्ध करिए भागवत जी, नहीं तो हम आदिवासी क्षेत्र के लोगों की तरह अर्धसत्य आदिवासियों की तरह शोषण बर्दाश्त करिए और अपने सेष जीवन को राम नाम जपिए जिन्हें इसी मोदी-सरकार के साथ आप अयोध्या में मंदिर में स्थापित करते आए हैं… शायद वही आपका उद्धार करें… अन्यथा जो समझ में आता है मांगने से “चंद्र खिलौना” नहीं मिलता या फिर “चंद्र खिलौना” मांगने के आप नाटक नौटंकी कर रहे हैं…? और कोई बात नहीं….?
जहां तक हम समझे हैं चाहे वह राष्ट्रपति आदिवासी वर्ग की होने के बाद भी शहडोल के लालपुर हवाई अड्डे में आकर गारंटी दी थी लेकिन फिलहाल तो आदिवासी हितों का कल्याण होता दिखता तमाम भाजपा मोदी सरकार के नेता आदिवासियों की जमीन में कालोनी बनाकर भ्रष्ट अधिकारियों को भ्रष्टाचार की कीमत पर और भ्रमित नागरिकों को बेंच रहे हैं, इससे नहीं लगता शोषण रुकेगा वह होता ही चला जा रहा है। तो आप नागपुर में बैठकर कैसे “चंद्र-खिलौना” पा जाएंगे…? आपके दुख को हम समझ सकते हैं क्योंकि हम इसी से दुखी हैं…और इस रिश्ते से हमारे मां-बाप एक है। ….इतना अर्धसत्य समझ में आ जाए तो आपको रोने की जरुरत नहीं है क्योंकि हम भी अब कम रोते हैं।