Top News

मुख्यमंत्री का शहडोल दौरा कार्यकर्ताओं से हुई भेंट मुलाकात और चर्चा।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का शहडोल दौरा।

पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से की भेंट को लोकसभा चुनाव जीतने के लिए बैठक में हुई चर्चा। 



रिपब्लिक न्यूज ।।

शहडोल // इसमें शक नहीं है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सायं या केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह  कुलस्ते अथवा राज्य के मंत्री दिलीप जायसवाल जो शहडोल में घूम रहे हैं उनके सामने यदि बात रखी जाए की स्थानीय लोगों को स्थानीय प्राकृतिक संसाधन यानी सहज और सुलभ उपलब्ध होने वाली निर्माण सामग्री “बालू” यानी रेत स्थानीय लोग को करीब चार माह से या तो मिल नहीं रही है अथवा उन्हें ब्लैक में दुगना कीमत देकर माफियाओं से खरीदना पड़ रहा है और जनप्रतिनिधि उसे उपलब्ध करा दें तो वह कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के संगठन विस्तार के संबंध में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर घूम रहे हैं और बाकी 

लोग उनके सहयोग में आगे पीछे घूम रहे हैं। ऐसे में इस समस्या का निराकरण करने में कौन सक्षम है..? यह आदिवासी विशेष क्षेत्र के निवासियों के लिए एक चुनौती भरी समस्या है।

अक्सर देखा जा रहा है की निर्माण सामग्री रेत की कीमत माफिया बाजार में बनाए रखने के लिए तथाकथित शहडोल जिले का ठेकेदार ग्लोबल सहकार नाम की संस्था शहडोल के आसपास रेत खदानों को चालू नहीं कर रही है।

क्योंकि उसे शहडोल से सौ-डेढ़ सौ किलोमीटर दूर व्यौहारी क्षेत्र में सुनिश्चित खदानों से रेत बेचने में करोड़ो रुपए का मुनाफा हो रहा है… और करीब 70 करोड रुपए का ठेका इस ठेकेदार ने इसलिए नहीं लिया कि वह शहडोल की जनता की सेवा करेगी …

उसे भी इस रेत खदान से हजारों करोड़ रुपये इस तरह लूटना है जिस तरह पूर्व ठेकेदार वंशिका ट्रेडर्स ने भाजपा के रामराज्य में जमकर कमाई की थी। कहते हैं कमोवेश जो रेतमाफिया वंशिका ट्रेडर्स का नौकर हुआ करता था वहीं अब रेत की फ्रेंचाइजी, ग्लोबल सहकार से लेकर अघोषित तौर पर शहडोल जिले में अपनी सल्तनत चलाने की 

कोशिश कर रहा है‌। और यदि शहडोल नगर में आसपास रेत खदानें चालू हो जाएंगे तो सस्ते में रेत आम नागरिकों को मिलने लगेगी। इससे जो ठेकेदार अपनी माफियागिरी पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर बरकरार रखना चाहता है वह कमजोर पड़ जाएगी।

 खनिज विभाग के अधिकारी बताते हैं की शहडोल जिले में  ठेका धन और उपलब्ध रेत खदानों की रेत मात्रा के हिसाब से रॉयल्टी की दरें सुनिश्चित की गई है, जो करीब पौने चार सो रुपए के आसपास पड़ती है। और स्वाभाविक है वैध रेत खदानों से ठेकाधन की वसूली होने से रही.. इसलिए पहले  प्राथमिकता उन स्थानों को दिया गया है 

जहां पर रेत सोने की भाव में बेची जा सके। और इस तरह शहडोल की आसपास की खदानों को संचालित भी नहीं किया जा रहा है।

 तो घोषित तौर पर खनिज विभाग और पुलिस विभाग  के इंस्पेक्टर इन खदानों को संचालित करते हैं…? अन्यथा यदि खदानें चालू ही नहीं हुई है तो रेत कहां से आ रही है…? इसकी चिंता महिला विधायक मनीषा सिंह को क्यों होनी चाहिए, क्योंकि वह महिला है.. इसलिए उन्हें इस माफिया गिरी से कोई मतलब नहीं है; ऐसा कहा जा सकता है।

किंतु जिम्मेदारी तो जनप्रतिनिधि की होती है कि क्षेत्र में यदि सुलभ रूप से भरपूर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन रेत उपलब्ध है तो आम नागरिक को रेत कानूनी तरीके से क्यों नहीं मिल रही है…? क्यों खदानें चालू नहीं की जा रही हैं, कोई पूछने वाला दिख नहीं रहा है तो क्या हमारी नई व्यवस्था आम नागरिकों, गाड़ी माल

कों को, व्यापारी को रेत चोर अथवा स्मगलर बना रही है…? और उसमें अपना बंदरबांट कर रही है..

 अन्यथा चार महीने से लगातार शहडोल और आसपास बड़े-बड़े निर्माण कार्य हो रहे हैं इनके पास रेत कहां से आ रही है.. खाने को कह सकते हैं कि अनूपपुर और उमरिया जिले से अथवा हवाई जहाज से रेलगाड़ी से रेत लाई गई है।

 खनिज अधिकारी देवेंद्र पटले का कहना है की खदानें माइनिंग कॉरपोरेशन के द्वारा संचालित हैं यह उनकी जिम्मेवारी है कि वह उन्हें संचालित करें किंतु इस बीच यह कड़वी सच्चाई है की लोकसभा का चुनाव आ जाने के बाद करीब दो माह तक और शहडोल के आसपास  की रेत खदानें चालू नहीं होगी फिर बरसात आ जाएगी तो चालू नहीं होगी… 

इस प्रकार शहडोल के नागरिकों को जो रेट समान रूप से सस्ते में मिलना चाहिए वह तिगने चौगुनेदाम पर उपलब्ध होगी या कह दिया जाएगा की उमरिया या अनूपपुर से रेत खरीदी जा सकती है।

भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में यह पहला अवसर होगा जब पारदर्शी तरीके से स्मगलर और माफियाओं को रेट की कालाबाजारी का एक तरह का मौखिक  लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा । जिसमें वह ग्राहकों से मनमानी लूट कर सकेंगे। विडंबना यह भी है कि ज्यादातर रेत खदानों में भाजपा के तमाम नेता अपनी अजीबिका का पालन कर रहे हैं

तो क्या ठेकेदार से फ्रेंचाइजी लेने के चक्कर में भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय इकाई ही रेत की कालाबाजारी के लिए जिम्मेदार है…! और अगर ऐसा है तो विधायक का चुप रहना उसके संगठन हित में सर्वोपरि रहेगा और जनता जनार्दन भारतीय जनता पार्टी के शासन में सहज रूप से सस्ते में उपलब्ध होने वाली निर्माण सामग्री रे

ट का काला बाजार या माफियाओं के भरोसे रेट खरीदने को मजबूर रहेंगे इसमें कोई शक नहीं है जो महंगी से महंगी रेत खरीद सकेंगे।

Previous Post Next Post