आखिर क्यों प्रधानमंत्री वर्चुअल मीटिंग में शीर्षस्थ नेताओं में जमकर हुई ठोकम ठोक….।
अपने ही पार्टी के दो दबंग नेताओं में टक्कर।
अपने-अपने कर्तव्य और दायित्व का निर्वहन करते हुए जिला के नेता।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // मुख्यालय अंतर्गत मध्य प्रदेश के शहडोल जिला के कलेक्टर कार्यालय परिसर में देश के प्रधानमंत्री वर्चुअल मीटिंग के जनमन कार्यक्रम में नेताओं का नाच।
प्रतीत होता है भारत के लोकतंत्र में अयोध्या में राष्ट्रवाद के मंदिर स्थापित होने के बाद कलयुग का रामराज्य आ ही गया है और लोकतंत्र के संवैधानिक संस्था प्रतिनिधि पारदर्शी भ्रष्टाचार अनैतिकता और अभद्रता का व्यवहार करने लगे हैं।
दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने संवैधानिक पद पर बैठे उपराज्यपाल वी के सक्सेना के खिलाफ एक ऐसे विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित करके उन पर आरोप लगाया है कि वह अशिष्ट भाषा का उपयोग करते हैं, और ना तो खुद काम करते हैं और ना हमें करने देते हैं।
यह सही भी है कि उपराज्यपाल भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता की तरह उक्त संवैधानिक पद में बैठकर आम आदमी पार्टी से हर छोटी-मोटी बातों पर अपना ठोकम - ठोंक मचाए रहते हैं। और भारत के उच्च स्तरीय शिक्षित बौद्धिक डिग्री हासिल किए हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनके साथी उपराज्यपाल की गरिमा को बचाए रखने के लिए स्वयं को छुपाते रहे। किंतु पानी सर से ऊपर हो जाने पर अब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके उपराज्यपाल की हरकतों को निर्वस्त्र कर दिया है। लेकिन बात अकेले दिल्ली की नहीं है
दिल्ली में तो निर्वस्त्र ठोकम- ठोक व्यवहार की पूर्ण प्रदर्शित होने के कारण चर्चा है क्योंकि उन्हें अपने आका को अपनी गुलामी सिद्ध करनी होती है। अन्य जगह भी यही शिकायतें पर्दे में रहकर की जाने की हरकतें देखी गई है। किंतु जहां प्रधानमंत्री वर्चुअल मीटिंग कर हजारों करोड़ों रुपए की सौगात मध्य प्रदेश शासन को दे रहे हों उस कलेक्टर परिसर में भारी जन समुदाय के साथ जहां कलेक्टर व पूरा प्रशासन भी उपस्थित हो, जिला भाजपा के शीर्षस्थ नेता अपने आप मतभेदों को लेकर इस प्रकार का एक दूसरे को ठोंकने में लगे थे की मर्यादाओं की सीमा तार तार हो रही थी। कहते हैं कलेक्टर वंदना वैद्य इन परिस्थितियों में स्वयं को सुरक्षित निकालने के लिए वहां से हट जाने में ही अपनी भलाई समझी और यह उचित भी है।
इस प्रकार का पारदर्शी एक दूसरे को ठोकने की कार्य प्रणाली भद्र समाज में स्थान नहीं पाती है शीर्षस्थ लोगों यह अपेक्षा की जाती है की निजी जीवन में आप कैसे भी रहते हो सार्वजनिक स्थानों में कम से कम प्रधानमंत्री और जिला कलेक्टर जहां बैठे हो वहां पर पर्दे में रहकर भद्रभाषा शैली में संवाद करना चाहिए या एक दूसरे को ठोंकना चाहिए चेंबर के अंदर आप किसी को भी ठोकते रहिए।
क्योंकि बार-बार अभद्रता से यदि ठोंका जाएगा तो बाकी समाज भी अपने शीर्षस्थ नेता को आदर्श मानते हुए निर्वस्त्र शब्द व्यवहार को स्वीकार कर लेंगे। जैसा कि देखा भी गया है कि चाहे निजी जीवन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह कैसे भी राजनीतिक रूप से रहते हो किंतु जब भी वह आपस में मिलते हैं तो इस प्रकार से सर्व शिष्टाचार और संवाद के साथ एक दूसरे का अभिवादन करते हैं जैसे पहली बार वह एक दूसरे से मिले हो।
यह दुखद है कि निचले स्तर पर उनका संदेश क्रियान्वित नहीं हो पाया और प्रधानमंत्री वर्चुअल मीटिंग में और कलेक्टर तथा अन्य जन समुदाय के सामने कलयुग का रामराज्य का संवाद देखा गया। हो सकता है प्रधानमंत्री ने इसे देखा भी हो और वह भी चुप हो क्योंकि आदिवासी क्षेत्रों में नव धनाड्य समाज की वह स्थिति जानते हैं..?
आशा करनी चाहिए कि भविष्य में आपसी संवाद को शालीन तरीके से तमाम मतभेदों के बाद भी भद्र शब्दों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा, अरबपति आदमियों की तरह मुस्कुराते हुए।
क्योंकि अब तो हाई कोर्ट ने भी बलात्कार के महान आरोपी स्वयं को राम और रहीम बताने वाले अपनों में लोकप्रिय बलात्कारी गुरमीत सिंह को बार-बार हरियाणा सरकार के द्वारा राहत दिए जाने पर फटकार लगा दी गई है,।
कि भविष्य में जब तक अदालत से अनुमति न हो इस धार्मिक नेता बलात्कारी राम रहीम को जेल से बाहर न रखा जाए। यह सही है की शहडोल में ऐसा निर्देश देने की क्षमता भाजपा में किसी शीर्षस्थ नेता की नहीं है किंतु अनुशासन और नैतिकता को जिंदा रखने का काम हमारे मानव समाज का ही है। सब कुछ करिए लेकिन इतना बचा कर रखिए कि जब कोई आपको देखे तो आम आदमी को जोर से कलयुग का “जय श्री राम, जय श्री राम..” ना बोलना पड़े…।
जबकि एक जिला अध्यक्ष की कुर्सी में बैठकर पूरे जिला को विकासशील और नगर को विकास गति देने में लगा हुआ है लेकिन वही।


