मध्य प्रदेश राज्य के एक विधायक मासिक वेतन और भत्ते नहीं लेने का किया फैसला।
विधायक चैतन्य कश्यप के सैलरी न लेने के फैसले पर उमा भारती ने किए सवाल कहां इसमें कौन सी बड़ी बात है।
रिपब्लिक न्यूज।।
भोपाल // विशेषज्ञ सूत्रों की विशेष टिप्पणी – राजनीति न तो व्यापार है और न ही सरकारी नौकरी जन सेवा है। जब व्यक्ति विधायक या सांसद का चुनाव लड़ता है तब वह जनता से कहता है कि निश्वार्थ भाव से सेवा करुंगा, गरीब आदमी किसी भी तरह का चुनाव अपने जेब से रुपए लगाकर नहीं लड़ता है। जब विधायक या सांसद अपने कार्यकाल में सड़क पति से करोड़ पति कैसे बन जाता है, मैंने अपनी बात लिखी है सरकारी नौकर को ही सरकारी खजाने से वेतन भत्ते का अधिकार होना चाहिए। चैतन्य काश्यप द्वारा वेतन-भत्ते नहीं लेने के फैसले पर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस मुद्दें पर अपने विचार साझा किए हैं। सोशल मीडिया पूर्व पर उन्होंने अपने ही पार्टी नेता से सवाल-जवाब किए और कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को सैलरी आज की परिस्थिति को देखते हुए हिसाब से मिलना चाहिए।
बता दें कि चैतन्य काश्यप भाजपा के सबसे अमीर विधायक हैं।
इसमें कौनसी बड़ी बात हैं भाजपा विधायक चैतन्य कश्यप के सैलरी न लेने के फैसले पर उमा भारती ने किए सवाल
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सबसे अमीर भाजपा विधायक चैतन्य कश्यप ने वेतन और भत्ते नहीं लेने का ऐलान किया है। बता दें कि रतलाम शहर से विधायक चैतन्य काश्यप ने वेतन-भत्ते नहीं लिए है। उनके इस फैसले के बाद से सियासत गरमा गई है।
इस बीच मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस मुद्दें पर अपने विचार साझा किए हैं। सोशल मीडिया X (पूर्व में ट्विटर) पर उन्होंने अपने ही नेता से सवाल-जवाब किए और कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को सैलरी आज की परिस्थिति को देखते हुए हिसाब से मिलना चाहिए।
कौन सी बड़ी बात?
बुधवार (27 दिसंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उमा भारती ने चेतन कश्यप द्वारा लिए गए फैसले पर लिखा, ‘हाल ही में मंत्री बने तथा रतलाम के एक संपन्न जैन व्यवसायी चेतन कश्यप ने अपनी संपत्ति 296 करोड़ घोषित की हैं । अभी कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के अखबारों में उनकी तारीफ लिखी थी की वो अपना विधायक का वेतन नहीं लेते जो की साल भर का करीब 12 लाख होता हैं । 296 करोड़ वाला व्यक्ति अगर सरकार के 12 लाख छोड़ देता है तो इसमें कौनसी बड़ी बात हैं।’
उमा भारती ने दे डाली सलाह
उमा भारती ने चेतन कश्यप को सलाह देते हुए आगे लिखा, ‘चेतन कश्यप सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय वह राशि अभावग्रस्त लड़कियां की शिक्षा पर खर्च करें। उन्होंने आगे कहा कि हमे यह याद रखना पड़ेगा की सभी विधायक बड़े व्यवसायी नहीं होते और ना वो राजनीति से अपना व्यवसाय बढ़ाते हैं।’
उमा भारती ने वरूण गांधी की एक सलाह को याद करते हुए लिखा, एक बार सांसद वरुण गांधी ने कहा था की सांसदों को वेतन एवं पेंशन नहीं लेना चाहिए। वरुण गांधी ऐसा कर सकते है क्यूंकि वो हजारों करोड़ों की पैतृक संपत्ति के मालिक है। अपना सर्वस्व त्यागकर राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों को हर तरह की सहूलियत सरकार से मिलनी चाहिए।
उमा भारती ने सलाह दी और कहा अगर विधायकों और सांसदों को ईमानदारी की राह पर चलना आसान बनाना है तो चेतन कश्यप जैसे पूंजीपति विधायकों को छोड़कर सभी विधायक की वेतन एवं अन्य भत्ते आज की सभी परिस्थितियों को देखकर मिलना चाहिए।