किसी अजनबी व्यक्ति के द्वारा कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम से किया जा रहा छेड़छाड़।
कंप्यूटर सीखने के नाम पर कार्यालय के जानकारी को किया जा रहा जानकारी बाहर।
आर्थिक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं सभी कार्यालय में पदस्थ पत्र जारी कर्ता मालिक।
रिपब्लिक न्यूज ।।
शहडोल // मुख्यालय जिला के विभिन्न शासकीय कार्यालयों से शासकीय कार्य योजना और गुप्त जानकारियां अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने ही सगे संबंधी और रिश्तेदारों को कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के द्वारा जानकारी की जाती है सझा और फिर उसे जानकारी को सूचना के अधिकार के तहत मांगी जाती है जानकारी।
जिस जानकारी को सिर्फ कार्यालय के अधिकारी और उससे संबंधित कर्मचारियों को ही पता है कि किसने कार्यालय के किस कार्य योजना किस कार्य के लिए शासन के द्वारा बजट पास हुआ है। उसी कार्य की रूपरेखा पर ही सूचना का अधिकार लगाया जा रहा है और वही सूचना का अधिकार की जानकारी कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी के रिश्तेदार के द्वारा पुनः लगाया जा रहा है।
इस कार्यालय में कौन है इस विभाग के जिम्मेदार जिसके द्वारा खेला जाता है इस तरह का खेल कार्यालय के जानकारी के अनुसार के साथ।
ऐसा ही एक मामला मुख्यालय के कार्यालय सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर रजनीश दुबे जिसके द्वारा किसी सगे संबंधी को अपने साथ कार्यालय में लाकर कंप्यूटर सीखने के नाम पर शासकीय कार्यालय में शासकीय कार्य के लिए कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है।
क्या एक ऐसा जगह यही मिला है कंप्यूटर कार्य सीखने के लिए रजनीश दुबे को जो अपने सगे संबंधी मित्र या जो भी रिश्ता हो उसे अजनबी व्यक्ति से जिसको रजनीश दुबे कार्यालय कार्य के दौरान अपने समीप बैठे हैं।
विशेष सूत्रों की माने तो जानकारी अनुसार रजनीश दुबे द्वारा जो भी यह अनजान व्यक्ति रजनीश के बगल में बैठता है उसको उन सभी छात्रावास अधीक्षिका अधीक्षकों को पहचान करने के पश्चात उनका नंबर देकर चढ़ौत्री की भेंट लेने के लिए कुछ दूर पीछे भेजे जाने का कार्य किया जाता है या तो फिर कार्यालय प्रमुख को गुमराह करते हुए उनके नाम से भी चढ़ौत्री सेवा भाव उस अजनबी व्यक्ति द्वारा लिया जा रहा है।
एक खबर ऐसी भी चल रहा है कुछ समय बाद कार्यालय से कुछ बाबुओं की सेवा समाप्त यानी रिटायरमेंट होने जा रहा है तो दूसरे साहब तीसरी साहब की भर्ती उनके स्थान पर कर देंगे। यह सिस्टम मैनेजमेंट का चल रहा है कार्यालय दूसरे नंबर के अधिकारी महोदय का और भी कई जानकारियां कार्यालय से लीक होने का सिलसिला जारी है।
नियमों से बंधे हुए हैं हर जारी पत्र के मालिक मासिक करने वाले। और पत्र की प्रसार संख्या कम से कम 5000 हजार होने पर विभाग वर्ष में दो से तीन बार 15000 के विज्ञापन देती है,सी भुगतान प्रमाणपत्र के आधार पर यही स्थिति और भी दैनिक जारी पत्रों की है। इस आर्थिक अपराध में मैं भी हूं और मेरे साथ वो सब है जो पत्र प्रकाशित करते हैं ।
विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्धारित मापदंड के आधार पर विज्ञापन जारी कर देते हैं। यदि विभाग जांच कर लें तो समझता हूं कि सभी जारी पत्र हो सकतें हैं आईने की तरह साफ और दूध का दूध पानी का पानी। यदि कोई जांच एजेंसी जांच करती है तो विभाग के अधिकारियों पर भी आंच आ आयेगी।
अगले अंक में मिलेंगे उस अजनबी व्यक्ति से जो कार्यालय कंप्यूटर ऑपरेटर के बगल में बैठता है साथ।
