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नियम निर्देशो को ताक में रखकर कार्यालय चला रहे क्षेत्र संयोजक बनाम बाबू, फिर से खेला स्थानांतरण नीति का खेल।

सहायक आयुक्त आदिवासी कल्याण विभाग अधिकारी के अनुपस्थिति में प्रभारी सहायक आयुक्त के द्वारा स्थानांतरण नीति का खेल। 

जिला के पालक मंत्री को कर गुमराह।

जिला के कई विद्यालय किए शिक्षक विहीन।

आदिवासी कल्याण विभाग कार्यालय में क्षेत्र संयोजक का भ्रष्टाचार का बढ़ता गौरव।

शासन के नियम अनुसार स्थानांतरण नीति में खेला ऐसा खेल कर दिए विद्यालय शिक्षक विहीन अपने नजदीकी और जमात के शिक्षकों को किया मुख्यालय के करीब।

जिसमें संबंधित विभाग कार्यालय में पदस्थ बाबू महोविया, मरावी भुषण सिंह का मुख्य रूप से रहता है सहयोग।

जिला कोषालय अधिकारी के मिली भगत से कार्यरत कर्मचारियों को छोड़ संस्था के खातों में करवाया पांचवें वेतनमान एरियर राशि का भुगतान।



रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल // मुख्यालय जिला के भ्रष्टाचारी हिंदुत्व ने जब से अपना धर्म परिवर्तन किया होगा तो वह एमएस अंसारी के रूप में आदिवासी कल्याण विभाग कार्यालय शहडोल जिला में तृतीय वर्ग का बाबू बना रहा होगा, इसीलिए इस बाबू को बाबू रहते कभी कोई कर्तव्य का निर्वहन नहीं करना पड़ा।

जैसे कभी श्रीनिवास तिवारी किसी भी अरे गैरों को उठाकर प्रदेश के शीर्ष स्थानों के पद पर बैठा देते थे।

मिले प्रभार का किया दुरुपयोग शासन के आदेश अनुसार नियम निर्देशों के विरुद्ध किए गए स्थानांतरण।

वैसे ही शहडोल में क्षेत्र संयोजक एमएस अंसारी के अपने गुप्त संरक्षकों जो उनसे कर्तव्यनिष्ठ वफादार राम भक्त सेवक के रूप में चिन्हित किए हुए हैं कई ऐतिहासिक भ्रष्टाचार जिन्हें प्रमाणित करने की आवश्यकता भी नहीं समझी गई। उनका सफलता पूर्ण तरीके से निर्वहन करने के बाद प्रभारी मंत्री ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कलेक्शन के लिए अंसारी पर भरोसा किया है और अंसारी जी जमकर मंत्री जी के आशा के अनुसार सिंगल ट्रांसफर ऑर्डर कर रहे हैं।

जबकि कहां जा सकता है की कोई भी नियम निर्देशों का सरकारी नीति इस प्रकार की नहीं है जो इस प्रकार सिंगल ट्रांसफर आर्डर किए जाएं, जबकि सूची निष्पक्ष दिखने वाली एक मुझसे निकाली जाती है ताकि कम से कम दिखने में तो भ्रष्टाचार न दिखे।

लेकिन शहडोल में यह ज्ञान सक्षम योग्य अधिकारी को जो अधिकारी की पात्रता रखता हो उसे शायद हो सकता है अवश्य हो और वह ऐसे आर्डर नहीं करता लेकिन जब किसी बाबू को अधिकारी बना दिया जाए तब वह चाहे कोषालय से करोड़ों रुपए का गैरकानूनी आहरण करना हो या फिर अधिकारी बनकर या बनाया जाकर मंत्री जी से फ्रेंचाइजी लेकर के सिंगल ट्रांसफर आर्डर धड़ाधड़ कर किया जा सकता है।

क्योंकि ऐसे बाबू कम अधिकारी का कोई नैतिक दायित्व नहीं होता है। जब अनैतिकता की प्रसव पीड़ा से उसका जन्म होता है उसे मालूम होता है कि वह जन्मजात अधिकारी पद में कई गैरकानूनी कार्यों के लिए प्रकट हुआ है। 

 वहां अगर कानूनन काम करेगा तो यह उसकी वफादारी और कर्तव्यनिष्ठा के खिलाफ गद्दारी होगी।

इसीलिए मंत्री जी के इच्छा के अनुसार वह आंख मूंदकर आदिम जाति कल्याण विभाग कार्यालय में जिला का अधिकारी बनकर जिला अंतर्गत ट्रांसफर के कार्य का संपादन कर रहा है। 

ऐसे अधिकारी अंसारी का मानना यह है यह जिम्मेदारी पात्र अधिकारियों की है ताकि वे अपने कर्तव्य निष्ठा का पालन करें और जब चुनाव आता है तो वह युद्ध होता है, युद्ध में सब जायज होता है फिलहाल अघोषित चुनाव प्रक्रिया लागू हो चुकी है और ऐसे में पार्टी फंड कलेक्शन की जिम्मेदारी राम भक्त अंसारी को दी गई है।

क्योंकि पार्टी को मालूम है कि उनके पास कर्तव्यनिष्ठ जो व्यक्ति भाई साहब थे वह खुद अधिकारी के लिए बेताब हैं।  भाई का भी दावा है कि उन्हें राजमाता का आशीर्वाद प्राप्त है और वह राजमाता के नवीन दत्तक पुत्र हैं और राजमाता अपने दत्तक पुत्र को टिकट नहीं देंगी, क्योंकि ऐसा संभव नहीं हो सकता।

इस तरह भाईसाहब के सहयोग से राम भक्त अंसारी का कार्यभार पूरी कर्तव्यनिष्ठा से लेकर मैनेजमेंट का भुगतान कार्य भाई के अनुपस्थिति में उसका काम हो रहा है।

जैसे कि एक गीत है करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है इस आधार पर आदिम जाति कल्याण विभाग में खुलेआम पूरी पारदर्शिता के साथ एक बाबू को अधिकारी बनाकर मंत्री जी ने खुली लूट की छूट दे दी है और युद्ध में सब जायज है इसलिए यह भी जायज है कि वह सिंगल ट्रांसफर आर्डर धड़ाधड़ करता रहे जिससे टारगेट विधानसभा चुनाव के लक्ष्य को प्राप्त करना है अब यह अलग बात है कि ऐसे आर्डर पर जमीन में यह के विभिन्न कार्यालयों में धक्का-मुक्की मची हुई है।

ऐसे में पुर्व प्रभारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग एम एस अंसारी का अफसरशाही के इन दिनों जलवे हैं लूट सके तो लूट अंत काल पछतायेगा जब प्राण जाएंगे छूट।

इस मूल सिद्धांत पर आदिवासी विभाग इन दिनों चर्चा का गर्म विषय है कौन जाने किस मास्टर की घूस की राशि कब कौन कहां लेकर भाग जाए अब बात अन्य विभागों की भी धड़ल्ले से चल रही है।. 

मंत्री तो मंत्री उनके प्यादे भी जलवो के सुमार पर हैं। 

इसीलिए कहा गया है कि राजा से बढ़कर राजा की पिलाई होती है जिसे कहीं भी पेशाब की छूट होती है सीधी जिले में कर्मठ भाजपा कार्यकर्ता विधायक प्रतिनिधि शराब और सिगरेट के धुएं के धुंध में गलत जगह पेशाब कर दिए, लेकिन शहडोल में पिलाई बिना पिए ही शहडोल जिले के कर्मचारियों के स्थानांतरण में सफर कभी भी कहीं भी पेशाब कर देता है और कोई बोलता भी नहीं क्योंकि सबको मालूम है यह राजा की पिलाई है। 

अगले अंक में होगें प्रकाशित किसने किया स्थानांतरण शुल्क कि राशि का भुगतान पत्नी बेटी बेटा के खातों में भुगतान।

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