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कम पैसों मे ज्यादा का काम यही है मिश्रा ऑनलाइन सेंटर से चालान राशि का भुगतान ।

ऑनलाइन सेंटर के संचालक द्वारा फर्जी भुगतान किया गया।


1000 राशि के बदले फर्जी तरीके से 10,000 राशि चालान की रसीद आरटीओ कार्यालय में जमा किया गया।


मिश्रा ऑनलाइन सेंटर में आरटीओ के कामकाज किया जाता हैं।



रिपब्लिक न्यूज।

शहडोल मुख्यालय अंतर्गत कई ऐसे मामले सामने आए हैं जो फर्जी कारनामों का एंपायर खड़ा किए हुए है जिसमें सिर्फ फर्जी और सिर्फ फर्जी कार्यों को किया गया है जिले के शिक्षा विभाग जहां सहायक आयुक्त यानी कमिश्नर रैंक के अधिकारी पदस्थ होते हैं उस कार्यालय से पांचवें वेतनमान एरियर राशि का भुगतान अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था पांडे शिक्षा समिति आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन की राशि 8 करोड़ 32 लाख 91 हजार₹309 जबकि यहां राशि कार्यरत कर्मचारियों के खातों पर भुगतान करना था लेकिन पूर्व प्रभारी सहायक आयुक्त एम एस अंसारी जो कि यह कार्यालय में क्षेत्र संयोजक के पद पर कार्यरत पदस्थ हैं इनके और ट्रेजरी यानी जिला कोषालय अधिकारी के मिलीभगत से तत्कालीन कलेक्टर को गुमराह कर संस्था संचालक शिव प्रसाद पांडे के मिलीभगत से संस्था के दो खातों पर भुगतान किया गया।


एक ऐसा ही मामला शिक्षा विभाग से करोड़ों रुपए की खेल सामग्री का भुगतान एक ही दुकान के नाम पर सिर्फ किया गया है।


दूसरा मामला जिला के शिक्षा विभाग के बड़े कार्यालय से कंपनी के द्वारा बंद हुए पुराने प्रोजेक्ट की सामग्री खरीद कर नए दाम नए वर्जन के प्रोजेक्ट सामग्री का भुगतान किया गया है यह राशि भी लगभग 8 करोड़ 50 लाख रुपए का है ।


ऐसा ही मामला बात किया जाए तो ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर सिर्फ फर्जी भुगतान किए गए हैं नवीन कार्यों की भौतिक सत्यापन कर जांच किया जाए तो लीज पिट सोख्ता और नाडेप जैसे कार्यों पर शासन ने करोड़ों रुपए बजट पास कर स्वच्छ भारत अभियान को दिशा प्रदान करने के लिए खर्च किए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य शुन्य हैं।


ग्राम पंचायतों के द्वारा कराए गए कार्य जिनमें नाली निर्माण कार्य पुलिया निर्माण कार्य तालाब निर्माण कार्याे पर संबंधित विभाग अधिकारियों के साथ मिलीभगत से कागजों पर हुऐ हैं और फर्जी बिल पास करा कर फर्जी तरीके से भुगतान किया गया है।


सीएम हेल्पलाइन निराकरण पदस्थ अधिकारियों के द्वारा फर्जी तरीके से शिकायत को फोर्स क्लोज किया जाता है  सूत्रों की माने तो सीएम हेल्पलाइन निराकरण संबंधित  विभाग अधिकारियों की मिलीभगत से शिकायत को बंद    कर दिया जाता है और शिकायतकर्ता को दोबारा शिकायत करने पर डरा धमका कर तुम्हारे ऊपर फर्जी एफ आई आर दर्ज करा देंगे।


ऐसा ही एक मामला फर्जी चालान जमा करने का सामने आया है जिस पर ऑनलाइन चालान सिर्फ ₹1000 की काटी जाती है और चालान की राशि का रसीद ₹10000 का जिला परिवहन कार्यालय में उपभोक्ता के द्वारा जमा करा दिया जाता है जिस पर कार्यवाही के लिए थाने पर शिकायत भी दर्ज करा दिया जाता है संबंधित विभाग कार्यालय में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी के द्वारा।


विशेष सूत्रों की माने तो यह काम संबंधित विभाग कार्यालय से मिश्रा ऑनलाइन सेंटर के द्वारा किया गया था मिश्रा ऑनलाइन सेंटर के संचालक के द्वारा ₹1000 राशि की चालान काटी गई और फर्जी तरीके से ₹10000 राशि का चालान की रसीद निकालकर जिला परिवहन कार्यालय में उपभोक्ता के द्वारा जमा कराया गया। इस प्रकार 420 बीसी का काम करने वाले ऑनलाइन संचालक जो फर्जी तरीके से 1000 के बदले 10000 की चालान रसीद निकाल कर कार्यालय में जमा कराया गया था। न जाने ऐसे कितने रसीद जमा कराए होंगे अगर सही तरीके से जांच किया जाए तो मिश्रा ऑनलाइन सेंटर के संचालक के ऊपर निश्चित ही बड़ी कार्यवाही किया जा सकता है और दुबारा भविष्य में कोई भी इस तरह का फर्जी चालान रसीद बनाकर जमा नहीं करने का दुस्साहस करेगा।


अगले अंक में प्रकाशित कौन है मिश्रा ऑनलाइन संचालक और कहां पर है ऑनलाइन सेंटर कौन करता है इस तरह का काम संचालक या सेंटर पर बैठे कर्मचारी किसके मिलीभगत से होता है 1000 के बदले ₹10000 चालान रसीद का भुगतान।


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