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रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा किया गया जन विकास कल्याण के लिए बोरी बंधन सराहनीय कार्य।

 बोरी बंधन के द्वारा जल संरक्षण में जन जन की भागीदारी ।



रिपब्लिक न्यूज।

शहडोल // मुख्यालय अंतर्गत क्षेत्र में रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट गैस उत्पादन कार्य कम्पनी रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए कई जनहित आर्थिक स्थिति अच्छी हो इसलिए कई कार्य किया जा रहा है जिससे किसानों को अच्छा उत्पादन प्राप्त हो सके और क्षेत्र से बेरोजगारी दूर होकर क्षेत्र में रोजगार के कार्य अच्छे फासलों का उत्पादन हो सके। क्योंकि यहां के किसानों को जलवायु पर निर्भरता के कारण भारतीय कृषि कार्य किसी जुए से कम नहीं है और बारिश की अनिश्चितता और बार-बार सूखे के कारण जोखिम बहुत अधिक है क्योंकि कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा बारिश पर आधारित है और यहां तक ​​कि सिंचाई प्रणाली भी मानसून पर निर्भर है। 

भूजल पुनर्भरण के लिए वर्षा जल प्रमुख स्रोत है, लेकिन पानी को धारण करने वाली संरचनाओं की अनुपस्थिति के कारण, अधिकांश वर्षा जल नदियों में और फिर महासागरों में बह जाता है और इसलिए भूजल पुनर्भरण के लिए अनुपयोगी रह जाता है। सूखे या कम वर्षा वाले वर्ष में यह स्थिति और भी बदतर हो जाती है। क्योंकि उस समय भूजल का प्राकृतिक पुनर्भरण भी नहीं होता है। इस चुनौती का समाधान जल धाराओं पर लागत प्रभावी और सरल संरचनाओं का निर्माण करना है जिससे वर्षा का जल बहता है। साथ ही ऐसे गतिविधियों का दायित्व स्थानीय समुदायों पर होना चाहिए। ये संरचनाएं पानी को नदियों में बहने से रोकती हैं और भूजल को रिचार्ज करने में मदद करती हैं। बोरी बंधन एक ऐसी जल संचयन संरचना है जिसे स्थानीय ग्रामीण धाराओं पर बनाया जा सकता है।


बोरी बंधन घटते भूजल संसाधनों की समस्या का एक सरल, आर्थिक, व्यवहार्य और अत्यधिक प्रभावी समाधान है। इस विधि में बारिश के पानी को बालू से भरी प्लास्टिक की थैलियों से बनी चारदीवारी के अंदर फंसाकर नहरों और नदियों में जाने से रोका जाता है। इन प्लास्टिक की थैलियों को 'बोरी' के नाम से जाना जाता है। बंधन शब्द का अर्थ है गति को फंसाना या सीमित करना। इसलिए नाम 'बोरी बंधन' है। रुका हुआ बारिश का पानी फिर धीरे-धीरे भूजल को रिचार्ज करता है। प्लास्टिक की थैलियां काफी सस्ती हैं और बाजार में उपलब्ध हैं इसलिए गरीब से गरीब किसान भी बारिश के पानी की बर्बादी को रोकने और भूजल संसाधनों के स्तर को ऊपर उठाने के लिए इस पद्धति को लागू कर सकते हैं। बोरी बंधन पहल को पिछले कुछ वर्षों से शहडोल में रिलायंस के कोल बेड मीथेन (सीबीएम) परियोजना क्षेत्र के गांवों के समुदाय के साथ शुरुआत किया गया है और 2019-20 के बाद से इसे काफी गति मिली है। रिलायंस फाउंडेशन (आरएफ) ने अपनी सीबीएम सीएसआर परियोजना के तहत गति को सक्षम किया है इसलिए इस पहल को मुख्य रूप से इसकी लागत प्रभाव शीलता और लाभों के कारण स्थानीय समुदाय द्वारा अच्छी तरह से समझा, अनुकूलित और स्वीकार किया गया है। इस पहल ने कृषि के लिए पानी की उपलब्धता में वृद्धि की है, विशेष रूप से रबी और गर्मी के मौसम में फसल में वृद्धि और आय में सुधार हुआ है। इसके अलावा, इसने गांवों में मवेशियों और पशुओं के लिए पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद की है। पुनर्भरण के माध्यम से भूजल में सुधार पर इसका प्रभाव व्यापक है। 


बर्ष 2019-20 के दौरान, लगभग 1 लाख क्यूबिक मीटर की क्षमता वाले समुदाय द्वारा 25 बोरी बंधन संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे 158 किसानों के 134 एकड़ कृषि क्षेत्र को लाभ हुआ। अगले वर्ष के दौरान 51 ऐसी संरचनाएं बनाई गईं, दोगुनी संख्या के साथ-साथ फसल की मात्रा- 439 किसान और 536 एकड़ कृषि क्षेत्र रबी फसल बन गया, जिसमें 3.35 लाख घन मीटर पानी का संचयन किया गया। 2021-22 के दौरान यह बढ़ गया, जब सामुदायिक प्रयासों से 80 ऐसी संरचनाएं बनाई गईं, जिससे 6.18 लाख घन मीटर से अधिक क्षमता के माध्यम से 531 किसानों के 611 एकड़ क्षेत्र को फसल संघनता के साथ लाभ हुआ। इस साल 2022-23 में समुदाय में फिर से उत्साह देखा गया जिन्होंने 115 बोरी बंधन संरचनाओं का निर्माण किया, 6.25 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक वर्षा जल संचयन में मदद की और रबी मौसम के दौरान 800 से अधिक किसानों के 700 एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र में सिंचाई में मदद मिली, जबकि मवेशियों के पीने और घर के अन्य काम के लिए पर्याप्त जल सुरक्षा भी हुआ। संख्या और जल क्षमता में यह निरंतर वृद्धि पहल की ग्रहणशीलता और आगे के निर्वाह का प्रमाण है। 

वर्षों से रिलायंस फाउंडेशन के प्रयासों को फलता-फूलता देख और जनता को जागरूक करते हुए, इस वर्ष भी सरकारी और अन्य गैर सरकारी संस्थाएं समुदाय की सहायता और प्रेरणा के लिए आगे आईं। धीरे-धीरे पहल समुदाय की अंतरात्मा में आत्मसात हो रही है, जो रिलायंस फाउंडेशन के प्रयासों को समुदाय की मानसिकता में स्थायित्व परिवर्तन लाने में एक लंबा रास्ता तय करेगी। इस वर्ष विश्व जल दिवस का मुख्य थीम जिम्मेदारी से जल संसाधन का खपत एवं जल का संरक्षण व संवर्धन है तथा बोरी बंधन इसका एक बेहतरीन उदहारण है.

बोरी बंधान कार्य की इस सफलता के बारे मे सी बी एम सी एस आर प्रोजेक्ट के साइट  सी एस आर हैड राजीव श्रीवास्तव बताते हैं कि यह  सफलता  केबल  समुदाय की  सह्भगिता, उनका संकल्प एवं लगनशीलता के कारण ही संभव हो सका है,। हमारे प्रोजेक्ट ग्रामों के कृषकों ने इस संरचना को स्वीकार किया इसे अपनाया, यही कारण है कि हम चार सालो मे चार गुना से भी अधिक किसानो के साथ चार गुणा से ज्यादा संरचनाएं बनाने मे सफ़ल हुये हैं , हमारे ये प्रयास अनवरत चलते रहेंगे, इस विश्व जल दिवस के अवसर पर रिलायंस सी बी एम सी एस आर प्रोजेक्ट के माध्यम से हम सभी से इस अभियान से जुडने की अपेक्षा करते हैं ।

क्या कहते हैं स्थानीय किसान।

हमारे जीवन में खुशहाली के साथ-साथ नया सवेरा बनकर आई रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट फाउंडेशन कंपनी रबी फसल हमारे यहाँ असंभव सा जान पड़ता था क्यूंकि पानी की कमी हमेशा बनी रहती थी. लेकिन हमे जब से रिलायंस फाउंडेशन के माध्यम से बोरी बंधन का पता चला हम किसान भाई हर साल इसे अपनाकर रबी फसलें ले रहें, जिससे आमदनी में वृद्धि हुई है एवं घरेलू कार्यों के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध हो पा रहा है. पिछले वर्ष जहां मैने 2 एकड़ में गेहूं की खेती की थी वही इस वर्ष मैंने 5 एकड़ में गेहूं की खेती की है. गांव के किसान काफी खुश हैं


नंदे सिंह, धुरियाडोल। 


मैं खेती की स्थिति के बारे में बहुत चिंतित था जो दिन--दिन बिगड़ती जा रही थी, मैं बस इसे सुधारना चाहता था। लेकिन जिस दिन से हमारे क्षेत्र में सीबीएम प्रोजेक्ट गैस उत्पादन कंपनी रिलायंस फाउंडेशन ने क्षेत्र के विकास के साथ-साथ उचित दिशा भी प्रदान की जिससे मै अपनी आय को मामूली से बढ़ाकर एक अग्रणी किसान के रूप में भी स्थापित हूं. विशेषतः रबी फसलों को उगाने की क्षमता बोरी बंधन के माध्यम से हुई है जिससे केवल मैं बल्कि गांव के अन्य किसान भी काफी उत्साहित हैं.


विश्राम बैगा, जरवाही

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