सत्य भ्रष्टाचार मेव जयते…?
आखिर ट्रांसपोर्ट नगर पालिका परिषद की प्राथमिकता क्यों नहीं…?
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // मुख्यालय अंतर्गत जिला प्रशासन के साथ साथ नगरीय प्रशासन के विकास में समान्य रूप से देखा जाए तो भ्रष्टाचार की ताकत और अधिकतम भ्रष्टाचार की संभावना ट्रांसपोर्ट नगर में भी उतनी ही है जितनी की नई सब्जी मंडी बनाए जाने पर भ्रष्टाचार के लाभ के अवसर बरकरार हैं, बावजूद इसके आश्चर्यजनक तरीके से शहडोल की बढ़ती रफ्तार में एक उत्कृष्ट अथवा सामान्य स्वच्छ शहर बनाने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बनाए जाने की प्राथमिकता पार्षदों और नगर पालिका परिषद के पदाधिकारी और अधिकारी की समझ में क्यों नहीं आता है। जबकि ट्रांसपोर्ट नगर न होने से ट्रांसपोर्ट की हालत शहडोल में बहुत बदतर है। पूर्व में कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं और अक्सर दुर्घटनाओं के होने की संभावना बनी रहती है। कहा यह भी जाता है कि जिस जगह नई सब्जी मंडी बनाई जा रही है वह जगह ट्रांसपोर्ट नगर के लिए अधिकृत थी या उसके आसपास अधिकृत थी फिर भी ट्रांसपोर्ट नगर नगर पालिका परिषद की निर्माण सूची का पहले कार्य क्यों नहीं हो रहा है…?
जबकि बस स्टैंड तीसरी बार बनेगा।
क्या ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन को किसी दूसरे कार्य में आवंटित करके भू माफिया के इशारे पर नए ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन उनके लाभ के लिए चयनित की जा रही है…? यह खबर नगर पालिका परिषद से छन छन कर आ रही है। तो क्या नगर पालिका परिषद भू माफिया पर इशारे पर अपनी कार्यवाहियों को संचालित करता है..?
यह बड़ा प्रश्न है।
अक्सर शहडोल में देखा गया है कि ट्रांसपोर्ट और टैक्सी स्टैंड तथा पार्किंग की समस्या विकराल होती जा रही है उसके लिए अनाधिकृत तौर पर गुंडागर्दी करके धार्मिक स्थलों पर पार्किंग की जा रही है और आध्यात्मिक वातावरण को नष्ट भी किया जा रहा है तो दूसरी तरफ सड़कों के इर्द-गिर्द पार्किंग करके मुक्त सड़क व्यवस्था को बाधित किया जाता है पूर्व में भी नगर पालिका परिषद की जो भी कार्य प्रणाली देखी गई है वह भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के लिए समर्पित कर प्रणाली का हिस्सा रहा है। और शायद इस परंपरा को नए पार्षदों और पदाधिकारी द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है…?
जैसे नया गांधी चौक आज भी उस वक्त तालाब का स्वरूप ले लेता है जब बरसात अपने रूप में आती है और आम आदमी तथा दुकानदारों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है क्योंकि पूर्व पालिका परिषद ने जिन अधूरे नालियों का निर्माण किया है वे सब भ्रष्टाचार के जरिए सिर्फ पैसा कमाने की मशीन की तरह बन गई है। विशेष कर बुढार रोड से गांधी चौक तक आने वाली नली में जो भी पैसा लगा है वह निरर्थक हो गया है। क्योंकि नई नाली से पानी की निकासी नहीं की गई है अधूरे में नाले निर्माण छोड़ दिया गया है इसलिए पूरा पानी और गंदी नाली का पानी सड़क होता हुआ नया गांधी चौक और पूरे बाजार को प्रभावित करता है। जो एक असंभव शहर का प्रमाण है। यही मॉडल अन्य कार्यों में प्राथमिकता का कारण बना हुआ है। चाहे वह मॉडल सड़क का निर्माण हो अथवा मीट मार्केट का निर्माण हो या फिर नए बस स्टैंड का निर्माण सिर्फ भ्रष्टाचार को समर्पित व्यवस्था ने परिषद को भ्रष्टाचार का मॉडल बना रखा है।
यही हाल मुड़ना नदी की बदहाल होती प्रवाह प्रणाली और गंदे नाले के रूप में बदल रही स्थिति है शहडोल स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय तो विलासिता की आजीविका जैसे बन गई है उसे कोई मतलब नहीं है और जो है प्रभावित हो रहा है जिसके लिए कोई सोच नगर पालिका परिषद बना पाने में लगभग फैल रही है।
पूर्व में एक नगर पालिका अध्यक्ष बकायदा प्रदूषण निवारण मंडल की सदस्य भी बनी किंतु उन्होंने नदी संरक्षण योजना के तहत मुड़ना नदी को और सोन नदी को वापस लाने में कोई रुचि नहीं ली। ना ही शहडोल नगर के तालाबों को सुरक्षित और संरक्षित रखने में नगर पालिका परिषद की कोई प्राथमिकता दिखाई देती है। जब भी कोई ऐसा काम करती है तो उसमें भ्रष्टाचार के जरिए ज्यादा से ज्यादा अवैध कमाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसीलिए तालाब और नदी नगर पालिका कि प्रबंधन के कारण लगभग बर्बाद होने के कगार पर हैं ।
इसी तरह पैदा करने वाली ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था पर उसकी कोई रुचि नहीं है बल्कि तथाकथित आवंटित ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन पर अब नए बस स्टैंड का निर्माण करके वह ट्रांसपोर्ट की समस्या को बरकरार रखना चाहती है। फिलहाल तो अखबारों में छपी इन खबरों में यही कड़वी सच्चाई समझ में आती है देखना होगा कि स्वच्छ और मुक्त परिवहन की व्यवस्था के लिए पालिका परिषद और पदाधिकारी कुछ अपना पुरुषार्थ दिखा पाते हैं!
अथवा “भ्रष्टाचार मेव जयते के नारे के तहत वे अपने-अपने बंदर बांट के लिए समर्पित दिखेंगे यह भी देखने को मिलेगा।