खतरे की घंटी बजती रही और सोता रहा मेडिकल कॉलेज सूरक्षा प्रबंधन।
उपद्रवियों के ताण्डव से दहला उठा मेडिकल कॉलेज छात्रावास परिसर प्रोटेक्शन की मांग स्टाफ।
रिपब्लिक न्यूज।
शहडोल// मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर मेडिकल कॉलेज परिसर में रविवार की रात बस संचालक कारोबारी के बिगड़े रहीस जादे और गुंडा प्रवृत्ति के उसके दोस्त जिनके पास अवैध हथियार होने का प्रमाण मेडिकल कॉलेज परिसर में देखा गया जो की फिल्मी गुंडों की तरह मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर के सामने ताण्डव मचाया।
जब यह बात मेडिकल कॉलेज प्रबंधक को पता चला। तुरंत उन्होंने स्थानीय थाना और उच्च अधिकारियों को फोन पर इसकी सूचना दी। और इतने बड़े घटना के बाद आखिर डीन ने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कड़ी सुरक्षा की मांग की।
लेकिन यही कदम अगर पहले उठा लिया गया होता तो शायद मेडिकल कॉलेज के अंदर अराजकता की पुनरावृत्ति नहीं होती। मेडिकल कॉलेज छात्रावास परिसर सेलेन्ट जोन क्षेत्र कि घटना से डीन डॉ. मिलिंद शिरोलकर ने माना है कि गुण्डा तत्व के व्यक्तियों द्वारा कॉलेज के अंदर पहले भी घुसपैठ कर उत्पात मचा चुके हैं। मेडिकल कॉलेज छात्रावास परिसर जैसे संवेदनशील और सेलेन्ट जोन में ऐसी वारदात का होना गंभीर खतरे का संकेत है। आनन-फानन में अब ऐसी व्यवस्था कर ली जाए कि हिंसा का कोई ताण्डव दुबारा नहीं हो।
यह बताया जाता है कि बार बार अपराधी गुण्डा तत्वों के व्यक्तियों का प्रवेश वहां गर्ल्स हॉस्टल के कारण होता है। लड़कियों से छेड़छाड़ करना अपराधियों तत्वों के व्यक्तियों का अड्डा बन चुका है।
रविवार की रात करिबन 8बजे से 9बजे के वीच घटना घटित हुआ और मचा बवाल।
छात्रों के साथ किया गया मारपीट।
रविवार की रात एक कार गर्ल्स हॉस्टल की ओर घूम रहा था। उसमें सवार युवक कभी सायरन बजाते तो कभी गाने बजाते थे। उसी समय मेडिकल के एक छात्र नावांक सिंह व उसके साथियों ने उनसे पूछा कि तुम लोग यहां क्यों घूम रहे हो। इस पर कार सवार नावेद खान व उसके साथी जो हथियारों से लेस थे उन्होने नावांक व अन्य छात्रों से मारपीट शुरू कर दी जिसमें कई छात्र घायल हुए और कुछ के हाथ पैर फैक्चर भी हुआ। कॉलेज परिसर में आतंक मचाने की नीयत से कार को काफी तेज गति से चलाते हुए रोड पर रखें स्टापर तोड़ दिए और अन्य जगहों पर तोड फ़ोड़ की गई।
लडाई यहीं शांत नहीं हुआ गुण्डा तत्वों के व्यक्तियों के द्वारा एक बार कालेज से चले जाने के बाद लगभग 200 की संख्या में पुन: हथियारों से लेस होकर आए थे और दुबारा पुन: मारपीट की। इसमें कई छात्र छात्राएं, प्रोफेसर घायल हुए हैं। हालांकि पुलिस ने सभी के खिलाफ बलवा का प्रकरण दर्ज कर लिया है लेकिन यह घटना पूरे परिसर को दहला गई है।
लेकिन शरारतों की अनदेखी क्यों?
रविवार की रात जो घटना हुई वह अचानक हुई घुसपैठ से नहीं हुई वास्तव में गुण्डा घुसपैठ काफी पहले से चल रहा था।
विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी अक्सर वहां कार में सवार होकर चक्कर लगाए जाते थे। हॉस्टल के आसपास शोर मचाया जाता था। जब किसी के द्वारा रोक टोक होती तो मारपीट की जाती थी। लेकिन कॉलेज प्रबंधन इन घटनाओं से उदासीन बना रहा और शायद किसी गंभीर घटना का इंतजार करता रहा जो कि रविवार की रात हो गई। यह वास्तव में मेडिकल कॉलेज प्रबंधक की लापरवाही का ही नतीजा है।
शायद शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसर कि घटना से सबक लेकर कुंभ करनी निंद्रा से उठेगा सुरक्षा प्रबंधन।
इस घटना के बाद नगर के लोग चिंतित हो उठे हैं उनकी चिंता यह है कि अगर यही हाल रहा तो मेडिकल कॉलेज जो शहर के एकदम बाहर है वह कैसे अधिक दिनों तक संचालित हो पाएगा। जहां इतने सारे गंभीर बीमारियों के रोगी भर्ती रहते हैं और कॉलेज का बड़ा स्टाफ काम करता है वहां कड़ी सुरक्षा जरूरी है। गर्ल्स हॉस्टल जहां गुण्डे प्रवृत्ति के लोग दिनदहाड़े अंदर घुसते हैं वहां कड़े इंतजाम होना चाहिए।
छात्राओं को भी अनुशासन में रहने की हिदायत दी जानी चाहिए। वास्तव में इस घटना से कालेज व्यवस्था की नए सिरे से पूरी समीक्षा की जानी चाहिए।
गेट पर ही एंट्री रजिस्टर हो उपलब्ध।
कॉलेज परिसर के अंदर किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध होना चाहिए मरीजों और उनके परिजनों को छोड़ कोई भी ऐसे व्यक्ति का परिसर के अंदर बिना एंट्री के आना सख्त मना किया जाए और जो व्यक्ति आ जा रहे हैं उनका नाम पता नंबर और आधार कार्ड नंबर भी इंट्री रजिस्टर पर दर्ज किया जाए जिससे आने जाने वाले व्यक्ति का काम स्पष्ट हो सके ।
