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आयुक्त के बाद अपर कलेक्टर के निर्देश फिर भी नहीं सुधरे धान खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था।

  देश के प्रधानमंत्री किसानों के हितार्थ में सभी को सम्मान निधि देकर किसानों को सम्मान प्रदान कर रहे हैं।

 प्रदेश के मुखिया किसानी कार्यों को लाभ का धंधा जिससे बेरोजगार युवकों को रोजगार बनाने का वादा कर चुके हैं। जिससे किसानों का विस्तार और विकास हो सके। इस लिए किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरकार खड़ी है किसानों के खातों पर उनके अनाजों का भुगतान किया जाता है। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लोन दिलाना। किसानों के लिए अच्छे खाद बीज भी उपलब्ध कराना और जिससे अच्छे दामों पर किसानों को भी उपलब्ध हो सके। और सब्सिडी के माध्यम से किसानों को छूट मिल सके। बिचौलियों को दूर करते हुए किसानों के खाते में सीधे सब्सिडी सरकार के द्वारा जमा कराई जा रही है। वही सेठ साहूकार के कर्ज के नीचे किसान कर्ज में डूब ना जाए उनके मेहनत का सही दाम मिल सकें। शासन के आदेश अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लोन दिलाया जा रहा है और किसी ऐसे व्यक्तियों के हांथ इनका अनाज न जाए जो कम कीमत पर खरीद सके इस कारण सरकार ने समर्थन मूल पर धान गेंहू चना और भी कई प्रकार के फसलों की खरीददारी सरकार स्वयं किसानों से कर रहा है और उसका भुगतान संबंधित किसान के खातों पर ही किया जा रहा है। 

 मुख्यालय अंतर्गत उनके ही कर्मचारी किसानों को लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। किसानों ने मीडियाकर्मी को देखते ही धान खरीदी केंद्र पर किस प्रकार से किसानों को परेशान किया जाता है। किसानों ने यह भी बताया कि हमारा अनाज एकदम साफ और सही है हमने सही वजन कर कांटा किया है। कांटा करते समय यहां पर शासन और धान खरीदी केंद्र के तरफ से मौजूद पदस्थ कर्मचारी के समक्ष हमने अपने धान को बोरे में भरकर एकदम सही और सटीक कांटा किया है उसके सामने। फिर भी धान में कमियां निकालते हैं तौलाई के बाद इस तरह के कई प्रकार से हम किसान प्रताड़ित होते हैं। 

किसानों से कमीशन कार्य।

 वही कई किसानों ने चर्चा के दौरान यह भी बताया कि यहां के कर्मचारी हमसे बिना खर्च लिए कोई कार्य नहीं करते चाहे वह बोरी देने वाली बात हो या तौलाई हो या सिलाई एवं ग्रेडिंग करने तक का कमीशन मांगा जाता है। जिसमें शामिल हैं चाय लेकर आओ साथ में मेरे लिए पान और ऑपरेटर के लिए गुटखा लेकर जल्दी आना इसके बाद तुम्हारा ही फीडिंग करता हूं।



रिपब्लिक न्यूज।

शहडोल // मुख्यालय अंतर्गत एक मामला इन दिनों धान खरीदी का कार्य जोरों पर है यहां पर संभाग के तीनों जिलों के नगर आसपास गांव के किसान धान बेचने के लिए आते हैं वही खरीदी केंद्र में जो शासन के द्वारा सुविधाएं दी जा रही हैं यहां पर उन सुविधाओं का भी अभाव है। वही कई धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को पानी तक नसीब नहीं होता है किसान दिन दिन भर धूप में बोरी भरते हैं और तौलाई करने के साथ सिलाई भी करवाते हैं।

मगर उन्हें शासन की कोई भी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है शासन के द्वारा नियम बना दिया जाता है लेकिन केंद्र में कोई भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश शासन के मंत्री या जिले के संबंधित अधिकारी और कलेक्टर खरीदी केंद्रों का दौरा नहीं करते। समय-समय पर बैठक भी की जाती हैं ट्रांसपोर्टर वा रखरखाव का भी पूरा ध्यान रखा जाता है तो वहीं जिले के कलेक्टर ने कहा है कि कोई शिकायत आएगी या कोई गड़बड़ी की गई तो बराबर कार्यवाही होगी। सरकार भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर ले मगर भ्रष्टाचारी अधिकारी या कर्मचारी रास्ता निकाल ही लेते हैं सरकार ने सभी कार्यों को ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट कर रही है। फिर भी किसानों से खर्च की वसूली जा रही है अब देखना यह होगा कि जब जिला मुख्यालय के धान खरीदी का हाल यह है तो जिले के अंतिम छोर व गांव में खरीदी केंद्र का क्या हाल होगा यह एक सोचने का विषय है।



विशेष सूत्रों अनुसार करोड़ों रुपए के नुकसान कि हों रही है भरपाई इस लिए लाखों किसानों से हों रही हैं शुकती के नाम पर अधिक तौलाई।

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