अधिकारियों के मिलीभगत से संस्थाओं और विभागों के कार्यालयों में अधिकारी पद के लालच के लिए भ्रष्टाचारियों का दिन प्रतिदिन जिले में संख्या बढ़ते जा रहे हैं ।
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का धज्जियां उड़ाते हुए अधिकारी।
कमिश्नर कार्यालय में दफन हो रहा कलेक्टर जांच प्रतिवेदन की विनय सहयोग से फाइल विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी की।
रिपब्लिक न्यूज।
शहडोल // मुख्यालय के एक जनप्रतिनिधि ने अपने क्षेत्र के निरंतर विकास के लिए हमेशा अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दिन रात मेहनत करते हुए देखा जा सकता है इसी प्रकार एक मामला उनके क्षेत्र का समक्ष आया उन्होंने तत्काल उस पर कार्यवाही के लिए जिला कलेक्टर को लेटर लिखते हुए तत्काल कार्यवाही करने की मांग की और ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारी को तत्काल हटाते हुए कार्यवाही की मांग भी किया नहीं तो विधानसभा में सवाल खड़ा करेंगे।
विशेष सूत्रों अनुसार स्थानीय क्षेत्र के नेतृत्व करने वाले ने कहां मेरे क्षेत्रीय एरिया का मामला है इस बात को हम विधानसभा तक लेकर जाएंगे। अधिकारियों के सह पर खुलेआम तो नहीं किया जा रहा भ्रष्टाचार । कई प्रकार से लेन देन का चल रहा खुलेआम मूल भाव का बाजार । पूर्व में एक मामला जनपद विकास खंड जयसिंह नगर के बाद अब बुढार के एक विकास खंड अधिकारी का ऑडियो आया सामने जिसमें साफ-साफ बोला जा रहा है आओ अधीक्षक पद का आदेश देता हूं कुछ व्यवस्था सेवा के साथ कार्यालय आना और जल्दी आना सेवा के साथ ।
जबकि आदेश पत्र कई दिन पूर्व से जिले के दो वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च न्यायालय कोर्ट के द्वारा आदेश भेजा गया था । लेकिन फिर भी छात्रावास अधीक्षक को आदेश प्राप्त नहीं हुआ। किस के सह पर अधिकारियों का बढ़ा है इतना मनोबल कोई भी काम के लिए बिना सेवा व्यवस्था के आदेश नहीं होता।
बी ई ओ बुढार एवं सहायक अध्यापक छात्रावास प्रभार को लेकर ऑडियो रिकॉर्डिंग हुआ वायरल ।
जिले के जनजाति कार्य विभाग अपने भ्रष्टाचार के मामलों और विभाग के उच्च स्तरीय जांच के लिए सुर्खियों में बना रहता है। जिसमें लोकायुक्त में चल रहे जांच प्रमुख हैं अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था पांडे शिक्षा समिति के संचालक शिव प्रसाद पांडे के द्वारा अंशदान कि राशि सीपीएफ खातों के खुले बिना पांचवें वेतनमान एरियर राशि भुगतान आठ करोड रूपए संस्था के खातों में भुगतान किया गया पूर्व प्रभारी सहायक आयुक्त एमएस अंसारी क्षेत्र संयोजक और जिला कोषालय अधिकारी शहडोल के मिलीभगत से।
भ्रष्टाचार के कई मामलों में विभाग के कई आला अधिकारी एवं कर्मचारी की भूमिका जांच के घेरे में है। इसी बीच बुढार खंड शिक्षा क्षेत्र से एक ऐसा मामला का ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं आरोप सामने आया है जिसे सुनकर जनजाति कार्य विभाग की कार्यशैली का बड़ा खुलासा होता नजर आ रहा है। अभी तक जो आरोप कागजों में दिखाई दे रहा था। अब वह आरोप ऑडियो रिकॉर्डिंग में सुने भी जा रहे हैं। सुनने वाले शिक्षक द्वारा ही खुलासा किया जा रहा है।
बुढार ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम टिकुरी माध्यमिक विद्यालय कन्या आश्रम के अधीक्षक विनोद बरगाही सहायक अध्यापक को रसमोहनी सीनियर बालक छात्रावास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। जिनके ऊपर कुछ शिकायतें की गई थी । लगाए गए आरोपो के विरुद्ध विनोद बरगाही माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाकर दाखिल किया अपना याचिका जहां से उन्हें उक्त मामले पर स्टे आर्डर प्राप्त हो गया।
सहायक आयुक्त कार्यालय शहडोल द्वारा लगभग एक माह पंद्रह दिन विलंब से न्यायालय आदेश का पालन किए जाने का आदेश जारी किया गया । रसमोहनी सीनियर बालक छात्रावास में पदस्थ श्याम लाल पाव अधीक्षक के द्वारा प्रभार नहीं दिया गया। प्रभार न मिलने से परेशान विनोद बरगही ने माननीय उच्च न्यायालय में दाखिल कर याचिका न्याय की मांग की । जिसको संज्ञान में लेकर उच्च न्यायालय ने शहडोल कलेक्टर और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग को तत्काल प्रभाव से रसमोहनी सीनियर बालक छात्रावास का प्रभार सौंपने के लिए आदेशित किया गया ।
लेकिन सवाल यह उठता है कि न्यायपालिका के आदेशों का अवहेलना कर अधिकारी कानून व्यवस्था के नियम कानूनों निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हैं । जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के सह पर तो नहीं किया जाता है ऐसा कारनामा ॽ़
अगर ऐसा है तो फिर कौन करेगा जांच।
