पात्र अभ्यर्थियों को नहीं मिल पा रहा है न्याय प्रशासन की नियम पर ही लगा रहें बट्टा।
रिपब्लिक न्यूज।
भोपाल // शहडोल में शिक्षा भर्ती घोटाले का भ्रष्टाचार सरेआम हो रहा गुड गान जो कि मध्यप्रदेश में ही नहीं देश के कई राज्यों में फर्जी भर्ती कि कहानी सुनाया जा रहा है।
शहडोल जिले में हुए शिक्षक की फर्जी भर्ती की कहानी भी सभी को सुनाई जाती है एक ऐसा ही मामला सामने आया है जो पात्र थे उनको छोड़कर अपात्र को ही नियुक्त किया गया है। जिले के कुछ माध्यमिक शिक्षक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2018 में जिसकी द्वितीय काउंसलिंग लोक शिक्षण संचालन मध्यप्रदेश भोपाल एवं जनजाति कार्य विभाग भोपाल के द्वारा संयुक्त रूप से कराई जा रही है जिसकी आदेश प्रथम काउंसलिंग में नामों को दोहराव संबंधी स्थिति निर्मित हो चुकी है। जिसके फलस्वरूप बाद में अतिरिक्त सूची जारी की गई है पुनः एक बार नियोजन प्रक्रिया में स्पष्ट निर्देश ना होने के कारण लोक शिक्षण संचनालय भोपाल एवं जनजाति कार्य विभाग के द्वारा संयुक्त रुप से कराई जा रही है जिसमें ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने पोर्टल पर अपने दस्तावेज सत्यापन हेतु अपलोड किए हैं एवं उनका नाम दस्तावेज सत्यापन की सूची में भी आ चुका है जो कि पहले से ही प्रथम काउंसलिंग से चयनित होकर लोक शिक्षण संचनालय अथवा जनजाति कार्य विभाग में नियुक्ति पा चुके हैं कई माह से सेवा भी दे रहे हैं। क्योंकि उन अभ्यार्थियों के अंक मेरिट क्रम मे होने के कारण जितनी बार भी माध्यमिक शिक्षक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती की काउंसलिंग कराई जाएगी एवं यदि उनके द्वारा दस्तावेज अपलोड किया जाता है तो उनका नाम रोल नंबर सूची के अंतर्गत की आएगी। जिससे मेरिट क्रम में आगे आने वाले पात्र अभ्यर्थियों के साथ उचित न्याय नहीं होगा जिसमें उन्हें एक बार फिर रोल नंबर नाम के दोहराव की स्थिति निर्मित हो जाएगी। माध्यमिक शिक्षक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2018 के भी अभ्यार्थी हैं जो इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से प्रथम काउंसलिंग अपनी सेवा देने के साथ-साथ संयुक्त काउंसलिंग लोक शिक्षण संचनालय मध्य प्रदेश भोपाल एवं जनजाति कार्य विभाग में अपनी दस्तावेज सत्यापन हेतु अपलोड कर दिए गए हैं एवं उनका रोल नंबर दस्तावेज सत्यापन की सूची भी जारी किया जा चुका। संयुक्त काउंसलिंग के माध्यम से जिन शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है वह अपना दोनों जगह उल्लू सीधा करना चाहते हैं जो की पात्र अभ्यर्थी भी हैं उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा प्रशासन उचित निर्णय लेगा उन कर्मचारियों की नियुक्ति हो चुकी है उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि मध्य प्रदेश शासन के एजुकेशन विभाग पर यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति हो जाती है तो उसे उस विभाग से एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य होता है। ऐसी स्थिति पर प्रशासन को विभाग को संबंधित कर्मचारी को एनओसी जारी नहीं किया जाना चाहिए जिससे पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
