Top News

माता शबरी आवासीय विद्यालय परिसर की सैकड़ों छात्रा अपने हक़ के लिए सड़क पर उतरे।

अपने हक़ के लिए सड़क पर उतरे कन्या छात्रा।

जिलाधिकारी से सीधे करेंगे शिकायत।

रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल मुख्यालय जब हक की बात हो तो आज के Gen Z शांत नहीं बैठने वाले हैं। देश की राजधानी दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन की गूंज अब मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिला शहडोल में भी साफ सुनाई देने लगी है।

बस फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मुद्दा किसी परीक्षा या नीति का नहीं बल्कि शासन से प्राप्त बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं का है। अपने हक की मांग को लेकर शहडोल जिले के बुढ़ार विकासखंड स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर की दर्जनों आदिवासी छात्राएं सड़क पर उतर आईं। छात्राओं ने कलेक्टर से सीधे अपनी बात कहने के लिए करीब 30 किलोमीटर पैदल जिला मुख्यालय जाने का फैसला कर लिया। 

हालांकि प्रशासन को जैसे ही जानकारी मिली तत्काल पहुंच कर बीच रास्ते में उन्हें समझाइश दी और समस्याओं के समाधान का आश्वासन देकर वापस छात्रावास भेज दिया लेकिन इस घटना ने व्यवस्था और छात्रावासों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। माना की कृत और प्रवेश परीक्षाएं

सड़क पर उतरे कन्या छात्राओं की शक्ति’ 30 किलोमीटर दूर के सफर के लिए पैदल मार्च, कांप उठा मुख्यालय जिला का संबंधित प्रशासनिक अमला।

मामला शहडोल जिले के बुढ़ार विकासखंड के ग्राम कटकोना स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर का है। जहां संस्था तो है लेकिन मूलभूत सुविधाएं न के बराबर हैं। इन्ही मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर एकजुट होकर छात्रावास से बाहर निकल आईं और छात्राएं पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गईं। 

वहीं सभी छात्राओं का कहना था कि जब बार-बार शिकायतों के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अब वे सीधे कलेक्टर के सामने अपनी बात रखेंगी।

छात्राओं का यह तेवर देख जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया

इसकी सूचना प्रशासन को जैसे ही मिली जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने छात्राओं से चर्चा की, इस दौरान उन्होंने छात्राओं की समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया इसके बाद छात्राएं वापस परिसर लौट गईं। छात्राओं ने बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ एक शिक्षक को यथावत रखने की भी मांग रखी। उनका कहना था कि संबंधित शिक्षक के मार्गदर्शन में विद्यालय का परीक्षा परिणाम बेहतर रहा है। मानकीकृतऔर प्रवेश परीक्षाएं

हॉस्टल की सिक्योरिटी पर बड़े पैमाने पर प्रश्न चिन्ह लगा है हालांकि पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं आवासीय परिसर से निकलकर मुख्य सड़क तक कैसे पहुंच गईं? 

वहीं यदि प्रशासन समय पर नहीं पहुंचता तो वे 30 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर जिला मुख्यालय पहुंच जातीं, यह घटना छात्रावासों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

अधिकारियों को देना पड़ा ठोस आश्वासन

प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि छात्राओं की समस्याओं का स्थायी समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में सुरक्षा में इस तरह की चूक न हो इसके लिए हॉस्टल प्रबंधन को कड़े निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

आंदोलन की प्रेरणा से उपजा यह विरोध यह साफ संदेश देता है कि अब आदिवासी अंचल की छात्राएं अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं और बदहाली के खिलाफ सड़क पर उतरने से नहीं झिझकेंगी।

Previous Post Next Post