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अवैध कबाड़ियों का आतंक कई गांव में छाया अंधेरा, बिजली के खांभो से कांटे गए तार कबाड़ माफियाओं के कारोबार में लगा रहें चार चांद।

कबाड़ माफिया की सरपरस्ती अवैध कबाड़ियों का आतंक कई गांव में छाया अंधेरा, बिजली पोल से कांटे गए तारकबाड़ माफियाओं के कारोबार में लगा रहें चार चांद।

रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल जिले के ग्रामीण अंचलों से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। 

क्षेत्र में सक्रिय कबाड़ माफियाओं के बढ़ते आतंक के कारण आज करीब गांवों की गरीब ग्रामीण जनता अंधेरे में जीने को मजबूर है। कबाड़ के अवैध कारोबारियों द्वारा की जा रही करतूतों और आपराधिक गतिविधियों का सीधा नुकसान सीधे-साधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यदि प्रशासन समय रहते अनीश कबाड़ी के मुख्य ठीहे पवन धर्मकांटा में सघन जांच शुरू करता है, तो एक बहुत बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है। आरोप है कि इस ठीहे पर फाइनेंस की दोपहिया वाहनों से लेकर बड़े-बड़े भारी-भरकम ट्रकों को लाया जाता है। इसके बाद गैस कटर की मदद से महज कुछ ही घंटों के भीतर इन वाहनों को टुकड़े-टुकड़े में काट दिया जाता है। वाहनों को नष्ट करने के बाद इस अवैध कबाड़ को खपाने के लिए जबलपुर और रायपुर जैसे बड़े शहरों में सुरक्षित ठिकाने लगा दिया जाता है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली और आश्चर्य की बात यह है कि इस अवैध समीकरण और नेटवर्क की पल-पल की जानकारी स्थानीय बीट प्रभारी से लेकर थाना प्रभारी तक को होती है। इसके बावजूद, कबाड़ माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्यवाही करने की बजाय, स्थानीय पुलिस प्रशासन की छत्रछाया में कबाड़ियों को कथित तौर पर संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। 

इतना ही नहीं, कबाड़ से लदी गाड़ियों को सुरक्षित परिवहन कराने और उन्हें सीमा पार करवाने की जिम्मेदारी भी निभाए जाने का गंभीर आरोप लग रहे हैं।

आज शहडोल की जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में संदिग्ध नजर आने लगें, तो इस संगठित अपराध के खिलाफ आवाज कौन उठाएगा? आखिर बिल्ली के गले में घंटी बांधने के लिए कौन आगे आएगा? 

इस पूरे अवैध नेटवर्क और कबाड़ साम्राज्य का मुख्य सरगना अनीश जिस पर केके की सरपरस्ती बताई जा रही है, जिसके हौसले इतने बुलंद हैं कि उसे कानून का कोई खौफ नहीं है।

अब देखना यह है कि खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या कबाड़ माफिया का यह काला कारोबार यूं ही ग्रामीण जनता की रोशनी छीनता रहेगा। गौरतलब हो कि पूर्व में भी इन्हीं कबाड़ियों के आतंक से क्षेत्र के लोगों में दहशत है इन्होंने बिजली पोल से पचास लाख रूपए कीमत के तार काट लिया था जिसे पुलिस ने समय रहते बरामद करके कबाड़ के नाम पर डैकती करते चोर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जबकि यहां आज हालत बदलें हुए नज़र आ रहे हैं समझना होगा कि शासकीय धन पर हाथ साफ़ करने वाले लोगों को भी यहीं प्रशासनिक तंत्र सपोर्ट में खड़ा रहेगा या ईमानदार कार्यवाही शुरू करेगा।

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