शहडोल में नई राजनीतिक धमक: भाजपा विधायकों का 'हिंदू एकता' के नाम पर पुलिस के खिलाफ जुलूस, क्या है सत्ता-विपक्ष की नई 'नूरा-कुश्ती'?
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय मध्य प्रदेश के शहडोल जिला में मां दुर्गा विसर्जन के दौरान हुई पथराव की घटना ने न केवल एक धर्म विशेष पर नहीं सामाजिक तनाव को जन्म दिया, बल्कि यह एक राजनीतिक पटरी पर भी एक अनोखा मोड़ ला दिया है। यहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सहित तीनों विधायक शरद कोल, जय सिंह मरावी और मनीषा सिंह ने 'सर्व हिंदू समाज' के बैनर तले पुलिस की कथित बर्बरता कार्रवाई के खिलाफ विशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।
यह नजारा ऐसा था, मानो सत्ता पक्ष ही विपक्ष की भूमिका निभा रहा हो। घटना को हुए आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन दोषी पुलिस अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही, जिससे आम जनता में असमंजस और गुस्सा बढ़ता रहा है।
घटना की जड़ें बुढार थाना अंतर्गत केशवाही चौकी क्षेत्र में हैं। 2 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के जुलूस पर मस्जिद के पास अज्ञात लोगों द्वारा पथराव किया गया, जिसमें तीन युवक दीपू त्रिपाठी सहित गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला बताते हुए तत्काल चौकी प्रभारी के संज्ञान में शिकायत दर्ज कराई।
लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और तीन युवकों पर बर्बरता से मारपीट की, जिसका वीडियो वायरल हो गया। पुलिस ने इन युवकों पर मुकदमे भी दर्ज कर लिए, जबकि कई अन्य लोग शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना का शिकार बताए जा रहे हैं।
इस घटना के विरोध में निकाले गए जुलूस में भीड़ ने केशवाही चौकी का घेराव किया। विधायकों ने दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल हटाने, घायलों को न्याय दिलाने और मुकदमे वापस लेने की मांग की।
आज इस मामले में जुलूस के अंत में कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें आश्वासन मिला कि 'कार्रवाई निश्चित होगी'। लेकिन आठ दिन बाद भी कोई राहत राशि या उच्च स्तरीय जांच (मुख्यमंत्री या गृह मंत्री स्तर पर) की खबर नहीं है।
विधायक शरद कोल ने प्रदर्शन के दौरान कहा, "हम विधायक हैं, ये अलग बात है। लेकिन हम हिंदू भी हैं। किसी हिंदू के साथ अन्याय होने पर हम सब एक हैं।" जय सिंह मरावी और मनीषा सिंह ने भी जुलूस का नेतृत्व किया, जो शहडोल की तीनों विधायक ने भाजपा ने मजबूती से जीता है। एक विशाल गठबंधन एकता जोड़ने वाला प्रतीत होता है।
हालांकि यह प्रदर्शन कई सवाल खड़े कर रहा है। आम जनता में विरोधाभास है कि जो काम विपक्षी कांग्रेस या अन्य दलों का होना चाहिए था पुलिस की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाना वह भाजपा के विधायक खुद कर रहे हैं। क्या यह सत्ता का 'विपक्षी प्रयोग' है? या फिर हिंदू एकता के नाम पर वोट बैंक मजबूत करने की रणनीति? एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "विधायक को तो थाने में फोन करके चौकी प्रभारी हटा सकते थे, लेकिन जुलूस निकालकर ज्ञापन देना विपक्ष की राजनीति जैसा लगता है। इससे शांति-अमन बरकरार रहने की बजाय तनाव बढ़ा।"
दूसरी ओर, पुलिस विभाग में भी हलचल है। वायरल वीडियो के बाद एसपी ने चार पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही की है लेकिन केशवाही चौकी के प्रभारी या बुढार थाने के अफसरों पर अभी कोई आंच कार्रवाई नहीं हुई। अब तीनों विधायकों के जुलूस के बाद कलेक्टर शहडोल या एसपी की ओर से कोई प्रभावी कदम उठेगा या यह सब 'नूरा-कुश्ती' साबित होगा—यह देखना दिलचस्प होगा। खासकर इसलिए, क्योंकि इससे विधायकों की प्रशासन के सामने 'अहमियत' का पता चलेगा। अगर दोषी हटाए गए, घायलों को मुआवजा मिला और मुकदमे वापस हुए, तो यह भाजपा की आंतरिक ताकत दिखाएगा। वरना, विपक्ष (कांग्रेस) को नई हवा मिल सकती है।
बहरहाल, शहडोल की सड़कों पर यह 'नई प्रकार की राजनीति' चर्चा का विषय बनी हुई है। क्या भाजपा के विधायक विरोधी मुद्दों पर अपनी सफलता साबित करेंगे, या जब कानून व्यवस्था हाथ से चली जाए तो विधायक उसे लपक कर तालमेल करने का काम करते हैं। यही स्थिति सीवर लाइन में दो आदिवासियों की दुर्घटना में हत्या के बाद देखने को मिली थी दोषी कंपनी का चेक लेकर भाजपा संगठन और विधायक कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर मृतक के परिवार के घर पहुंचे थे। जिस्म भी उनकी किरकिरी हुई थी। अभी की घटना नए प्रकार की है इसकी कार्यवाही का इंतजार होगा या फिर यह भी सिर्फ एक शो-ऑफ रह जाएगा? आने वाले दिनों में इसका असर जिले की शांति और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा। फिलहाल, घायल युवकों का इलाज जारी है, और हिंदू संगठन सतर्क मोड में हैं।