सचिव ने अपनी ही खोल दी पोल।
मृतक परिजनो के पैसों की लिस्ट ग्राम पंचायत व्हाट्सएप ग्रुप में कर दी जारी। उसमें दो गांव के बाहर और एक अपात्र का किया जिक्र।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला के जनपद पंचायत बुढार लगातार सुर्खियां में रहने वाले और मृत्यु का पैसा हजम करने वाले मझौली के प्रभारी सचिव सुंदरलाल रजक खबरों के प्रकाशन से बौखला गए और अपने को पाक साफ बताने के लिए अपने ग्राम पंचायत मझौली के व्हाट्सएप ग्रुप में मृतक परिजनों की लिस्ट जारी कर दी और ऐसा लोगों को दिखाया कि जैसे इनसे बड़ा सत्यवादी कोई है ही नहीं,
लेकिन जब मृत परिजनों की लिस्ट गांव के लोगों को पता चला तो गांव के लोग हक्के-बक्के रह गए , सभी लोग अपना नाम उस लिस्ट में ढूंढने लगे और सभी लोगों ने इस लिस्ट की निंदा करनी शुरू कर दी और निंदा हो भी क्यों ना क्योंकि इसमें ऐसे अपात्र लोगों का नाम लिखकर जारी किया गया था जो मझौली गांव में मौजूद नहीं है।
जारी लिस्ट में अपात्र और बाहरी लोगों को दिया लाभ।
लिस्ट में देखेंगे की बिंदु क्रमांक 08 जिसमें बाबूलाल सिंह का नाम लिखा गया है जिसका भुगतान दिनांक 02/02/2025 को बताया गया है लोगों ने बताएं कि यह व्यक्ति मझौली ग्राम में रहता ही नहीं है और ना ही यह कभी यहां मौजूद था। इसी प्रकार लिस्ट के बिंदु क्रमांक 7 में छोटे सिंह का नाम दर्ज है जो कि वर्तमान में अनूपपुर जिले में रहता है और उसके पास पर्याप्त संपत्ति है इसी प्रकार इस ग्रुप के बिंदु क्रमांक 07 में विनोद त्रिपाठी का नाम अंत्येष्टि सहायता के लिए बताया गया है जबकि नारायण त्रिपाठी के पास वर्तमान में 70 एकड़ की जमीन और पर्याप्त धन संपत्ति मौजूद है ऐसे में इस व्यक्ति को अंत्येष्टि सहायता राशि देना गरीबों का अपमान है।
रामदास साहू ने बताया कि मेरे यहां कोई भी व्यक्ति मत नहीं है और ना ही कोई अंत्येष्टि सहायता राशि दी गई
लिस्ट में प्रकाशित क्रम में बिंदु क्रमांक 1 में रामदास साहू के नाम से दिनांक 02-02 2025 को ₹5000 की राशि देने का जिक्र किया गया है जब इस संबंध में रामदास साहू से बात की गई थी उसने बताया कि कोई भी व्यक्ति मेरे घर में मृत नहीं हुआ है और ना ही मैंने कोई राशि ली है।
अंत्येष्टि सहायता राशि में सरपंच पति ओर सचिव ने मिलकर किया खेल
इस संबंध में जब मीडिया की टीम ने जानने का प्रयास किया तो पता चला कि सचिव और सरपंच पति के द्वारा पूरा खेल ग्राम पंचायत में किया जा रहा है।
सरपंच और सचिव के द्वारा अपने खास लोगों को अंत्येष्टि सहायता की राशि बिना किसी पोर्टल पर दर्ज किया लगातार निकली जा रही है क्योंकि अंत्येष्टि सहायता राशि के नाम पर कोई भी व्यक्ति ध्यान नहीं देता है इस बात का फायदा उठाकर दोनों ने मिलकर यह साजिश रची और साजिश में सफल भी रहे।
सरपंच पति ने महिला रोजगार सहायक को बदनाम करने के नियत से बैगा परिवार से झूठी शिकायत कर वायरल वीडियो किया प्रकाशित।
अभी हाल ही में सरपंच पति के द्वारा गांव की रोजगार सहायक महिला के विरुद्ध एक आदिवासी परिवार से झूठी शिकायत करने और सोशल मीडिया पर वायरल करने का कार्य किया गया है। वीडियो में देखेंगे कि महिला के द्वारा ग्राम रोजगार सहायक के खिलाफ प्रधानमंत्री आवास के नाम पर रुपए लेने की बात कही गई है इस संबंध में जब महिला रोजगार सहायक के द्वारा परिवार से संपर्क किया गया तो उसने बताया यह सब कुछ सरपंच पति के द्वारा किया गया है। मुझे दबाव देकर यह करवाया गया है मैं आदिवासी महिला डर गई थी।
यह सब सरपंच पति के कहने पर कहा गया था।
अब आप सोचिए कि जब सरपंच पति इतना गिर सकता है तो वह ग्राम का भला कैसे चाहेगा और इसी उद्देश्य से सचिव के साथ मिलकर पूरी राशि का बंदरबांट कर लिया।
वायरल वीडियो से सरपंच पति पर रोजगार सहायकों में खास रोष व्याप्त है आने वाले समय में इस घटना को लेकर रोजगार सहायक संगठन के द्वारा बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा और सरपंच पति के विरोध में ज्ञापन भी सौंपने की तैयारी की जा रही है।