रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला अनूपपुर के शासकीय तुलसी महाविद्यालय, जिसे प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा प्राप्त है, लेकिन आज भी पूरी तरह अव्यवस्था और लापरवाही के दलदल में फँसा है। यह संस्थान पढ़ाई का केंद्र न रहकर अब गंदगी, ताले और गैर-जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया है।
सबसे पहले बात करें प्राचार्य की। प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सक्सेना छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं और उनकी अनुपस्थिति में प्रभारी प्राचार्य के रूप में वनस्पति शास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापक राधा सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन यह जिम्मेदारी निभाने के बजाय प्रभारी प्राचार्य कुछ ही घंटों के लिए कॉलेज आईं और वापस चली गईं। परिणामस्वरूप प्राचार्य कक्ष, लेखा शाखा और छात्रवृत्ति शाखा पर दिन-दोपहर में ही ताले लटके रहे और पूरा कॉलेज लावारिस हालात में पड़ा रहा।
इसी बीच कॉलेज के शिक्षकों का रवैया भी किसी से छिपा नहीं रहा। प्रोफेसर अजय राज सिंह और डॉ. देवेंद्र सिंह बागरी के बीच तीखी बहस हो गई। दोनों के बीच “फालतू बातें मत करो” जैसे शब्दों की नोंकझोंक ने माहौल को गरमा दिया और छात्र-छात्राएं शिक्षा लेने की बजाय यह तमाशा देखने को मजबूर हो गए।
लेकिन असली शर्मनाक तस्वीर सामने आई कॉलेज की सफाई व्यवस्था से। डॉ. देवेंद्र सिंह बागरी ने खुद खुलासा किया कि विभाग के पास बने बाथरूम की कई दिनों से सफाई नहीं हुई है। बदबू इतनी भयानक है कि क्लासरूम में पढ़ाई करना असंभव हो गया है। एलर्जी और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन सफाई कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं और शिकायतों के बावजूद प्राचार्य तथा प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं।
जब प्रशासन ने जिम्मेदारी से मुँह मोड़ लिया तो छात्र नेताओं को आगे आना पड़ा। शिवम पटेल और सचिन पटेल ने स्वयं कॉलेज में सफाई अभियान की शुरुआत की और झाड़ू-पोंछा कर शौचालय तथा परिसर को साफ किया। यह कोई नई समस्या नहीं है। पहले भी कई बार अखबारों में महाविद्यालय की बदहाली की खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं और प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूटी है।
अब सवाल यह है कि क्या यही वह प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस है, जिस पर गर्व किया जाता है? जब प्राचार्य छुट्टियों का मज़ा लें, प्रभारी जिम्मेदारी से भाग जाएं, स्टाफ आपस में झगड़े और छात्रों को ही झाड़ू उठानी पड़े, तो प्रशासन आखिर किस बात की तनख्वाह ले रहा है?
यह कॉलेज किस चीज़ में एक्सीलेंस दिखा रहा है गंदगी में, लापरवाही में या गैर-जिम्मेदारी में?
अब वक्त आ गया है कि पूरा प्रशासन नींद से जागे और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो यह महाविद्यालय छात्रों का शिक्षा मंदिर न रहकर केवल लापरवाही और गंदगी का कब्रिस्तान बनकर रह जाएगा।
“काग़ज़ों में एक्सीलेंस, हक़ीक़त में बदबू का राज,
ये कैसा कॉलेज है जहाँ ताले हैं दिन-दोपहर के ताज।
छात्र संभालें झाड़ू, नेता उठाएँ मोर्चा यहाँ,
प्रशासन सोता रहे, तनख़्वाह गिने हर माह वहाँ।