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आयुष्मान कार्ड से नहीं होता ईलाज।

 अमृता अस्पताल में नहीं होती गरीब मरीजों की डायलिसिस, आयुष्मान कार्डधारी मरीज को लौटाया गये 


शहडोल मुख्यालय जिला से लगे रीवा रोड पर स्थित निजी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अशोक लाल का कहना है, अगर किसी भी निजी अस्पताल में ऐसा हुआ है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता मेरे पास पहुंचा था, उसने शिकायत पत्र सौंपा है। 

मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है।

शहडोल में जहां एक ओर केंद्र सरकार गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज की गारंटी देकर गरीब तबके के लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी कर रखी है। वहीं, दूसरी ओर शहडोल के नामचीन निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड सिर्फ दिखावा साबित हो रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला शहडोल के दो निजी अस्पतालों में देखने को मिला, जहां से आयुष्मान कार्डधारी गरीब मरीज को बिना डायलिसिस के ही लौटा दिया।

नौरोजाबाद जिला उमरिया के नायका दफाई वार्ड नंबर 10 निवासी नईम उल्ला पिता धूरे उम्र 55 वर्ष ने अपनी व्यथा में बताया कि वह किड्नी की बीमारी से ग्रसित हैं। सात-आठ महीने से उनकी बीमारी दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। उसका इलाज अहमदाबाद के एक अस्पताल में भी चला, लेकिन कोई खास आराम नहीं मिला है। वहां के चिकित्सकों द्वारा उन्हें सलाह दी गई कि उन्हें डायलिसिस करवाना पड़ेगा।

मरीज नईम उल्ला ने बताया कि उमरिया जिला की डायलिसिम मशीन कई दिनों से खराब है। इस कारण शनिवार को वह डायलिसिस करवाने शहडोल आया। सबसे पहले वह श्रीराम अस्पताल गया, जहां पर यह कहा गया आयुष्मान कार्ड पर उसकी डायलिसिस यहां अभी नहीं हो पाएगी। उसे कल आना होगा तब देखेंगे। तत्पश्चात वह रीवा रोड पर स्थित अमृता अस्पताल डायलिसिस कराने अपने पुत्र के साथ ऑटो करके गया। जहां पर उसने आयुष्मान कार्ड दिखाया और डायलिसिस किए जाने की आरजू मिन्नते किया।

अमृता अस्पताल में आयुष्मान कार्ड देखते ही उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यहां पर किसी सरकार का कोई कार्ड नहीं चलता है। तीन हजार रुपये हो तो डायलिसिस हो जाएगी, नहीं तो चलते बनो। मरीज नईम के पुत्र ने बताया कि अमृता अस्पताल के कर्मचारियों ने यह भी बहाना बनाया कि अभी उनकी सीट खाली नहीं है। किसी और दिन आना तो देखा जाएगा।

ऊंची दुकान, फीका पकवान

नईम के पुत्र युसुफ सिद्दीकी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से की गई शिकायत में आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड अमृता अस्पताल में दिखाने पर इलाज नहीं बल्कि दुत्कार मिलती है। उसने बताया कि शहडोल के अमृता अस्पताल का हम लोगों ने बड़ा नाम सुना था। लेकिन यहां पर तो नगद पैसा भुगतान करने पर ही इलाज की सुविधा मिलती है। युसुफ ने शिकायत में बताया कि डायलेजर के 1,000 रुपये डायलिसिस के 1,300 रुपये कुल तीन हजार रुपये उनसे मांगे जा रहे थे। इतनी राशि हमारे पास नहीं थी। सिवा आयुष्मान कार्ड के युसूफ का कहना है कि घंटों तक अमृता अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें रोके रखा। तब कहीं जाकर हम जिला चिकित्सालय शहडोल आए, जहां डायलिसिस हो गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अशोक लाल का कहना है कि अगर किसी भी निजी अस्पताल में ऐसा हुआ है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता मेरे पास पहुंचा था, उसने शिकायत पत्र सौंपा है। मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है, जिसमें आयुष्मान भारत के जिला नोडल अधिकारी डॉक्टर राजेश मिश्रा और अन्य डॉक्टर शामिल हैं। 

जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 अमृता हॉस्पिटल के पीआरओ राहुल सोनी से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन अम्रता हास्पिटल मैनेजमेंट पीआरओ राहुल सोनी फोन ही रिसीव नहीं कर रहे थे।

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