रिपब्लिक न्यूज।।
भोपाल // जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राजनीतिक दलों को मुजरा करने की सलाह दी है तब से हर सत्ता परिवर्तन को तवायफ मंडी और राजनेताओं को मुजरा करते देखने का नजरिया नागरिकों में विकसित हो रहा है इसी तरह शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र में तवायफ मंडी का उद्घाटन हो चुका है इस मंडी में पहली किस्त के रूप में कांग्रेस पार्टी के कई पदाधिकारी सहित कार्यकर्ता एक मस्त भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर अपना नया परिचय विकसित कर लिए हैं और यह जरूरी भी है क्योंकि राजनीति का परिभाषा विकसित करते समय समाजवादी नेता जार्ज पालन देश ने कहा था राजनीति का मतलब लोगों की सेवा है यह बीते राजनीति की परिभाषा है 21वीं साड़ी की राजनीति में तब जबकि 18वीं लोकसभा का संसद चालू हो चुका है यह एक मंडी के रूप में विकसित हो चुकी है इस मंडी में करोड़ों रुपए लगा करके राजनीति का धंधा किया जाता है और यदि इसमें इतना पैसा लाभ के साथ वापस नहीं आता है तो यह घाटे का धंधा कहलाता है इस घाटे के धंधे को पूरा करने के लिए मंडी में नरेंद्र मोदी जी की भाषा में मुजरा करना भी एक आवश्यकता है तो यह मंडी तवायफ मंडी के रूप में लाभकारी तत्कालीन परिस्थितियों में सिद्ध होती ही है।
संगठनात्मक रूप से देखें तो कांग्रेस पार्टी में लगभग राजनीतिक चेतना मरी हुई है वह पूर्ण रूप से मंडी के स्वरूप को स्वीकार कर चुकी है और जो भी पहल दिखाई देती है वह सिर्फ लाभ कमाने के धंधे के दृष्टिकोण से राजनीतिक पहल के रूप में दिखाई देती है इसलिए यदि जैसी नगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जैसी नगर नगर पंचायत की पूरी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सहित तमाम कांग्रेसीकार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी में पलटी मार जाते हैं तो यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है सवाल यह है कि जिला कांग्रेस संगठन जैसीनगर में सिंबल देकर के स्थानीय लोकप्रियता और अपने काम-धाम से अगर नेताओं ने अपना पैसा लगा करके नगर परिषद में अपना सट्टा काबिज किया है और उसे प्रदेश कांग्रेस से जिला कांग्रेस से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है और ऐसी कोई रणनीति भी नहीं बन पा रही है कि जो पैसा लगाया गया है मुजरे वाली मंडी में उसका रिटर्न कहां से हो तो उसे पलटी मार कर ही अपना लाभ दिखता है क्यों उसे भारतीय जनता पार्टी में जो 5 साल मध्य प्रदेश में गारंटी के साथ रहेगी उसके साथ नहीं जाना चाहिए यदि जैसी नगर के तत्कालीन कांग्रेसीक्षत्रप राजनीति के धंधे में लाभ सहित अपना पैसा नहीं निकल पा रहे हैं और कांग्रेस में रहने के कारण जो भयानक घटा भी होने वाला है उसे स्वयं को नहीं बचा पा रहे हैं ऐसी राजनीति की तवायफ मंडी में जाने का क्या फायदा इसलिए यदि जैसी नगर के कांग्रेसी पलटी मार करके भाजपा में चले गए हैं तो यह घोषित इकरारनामा है कम से कम 5 साल इस इकरारना में पर कोई प्रश्न नहीं उठाना चाहिए जब तक की स्थानीय वाजपेई बगावत न कर दें तब तक कुछ तो मुआवजा मिल ही जाएगा और यह पारदर्शी तरीके से घोषित पलटी मारी है शहडोल नगर में यह घोषित पलटी मारी नहीं चल रही है लेकिन यहां पर भी करोड़ों रुपए दांव लगा करके सत्ता पर कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने अपना कब्जा किया था और अब उसकी भरपाई होती अगर नहीं दिख रही है तो शहडोल क्षेत्र के मंत्री दिलीप जायसवाल के साथ नयन मटका कर करके यदि घनश्याम जायसवाल अपना घाटा पूरा करते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन यह चोरी छिपे होने की बजाय जैसी नगर के कांग्रेसियों की तरह से सबक लेते हुए पारदर्शी तरीके से पलटी मारना चाहिए वैसे भी कांग्रेस संगठन में भी इसी प्रकार की पलटी मारी और बगावत का इतिहास रखने वाले कार्यकर्ताओं की भरमार है इसलिए बहुत जल्दी यह देखा जा सकता है की शहडोल नगर पालिका के कांग्रेसी अध्यक्ष सहित कई लोग मंडी में अपने लाभ के लिए मुजरा करते हुए देखे जा सकते हैं पारदर्शी तरीके से पलटी करने में यह उनका अपना निजी मामला कहा जाएगा इसमें कोई शक नहीं है अब रही बात धनपुरी नगर पालिका की वहां पर सब कुछ पहले से ठीक-ठाक चल रहा है और उपाध्यक्ष को पैसे की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं है इतना पैसा वह मुजरा वालियों पर यूं ही निछावर कर देने वाले शख्स हैं क्योंकि उनका बैकग्राउंड कोयले के काला बाजार जो तवायफ मंडी से आज की तारीख में बहुत बड़ा है उसे तवज्जो रखता है। इस तरह माना जाए तो शहडोल जिला कांग्रेस तवायफ मंडी की तरफ आकर्षित हो चुकी है और अपने लाभ के लिए तमाम पदाधिकारी मुजरा करने को तैयार हैं शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में इसी मुजरा की बात कर रहे थे इसलिए कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कब कौन कहां पलटी मार करके राजनीति में मुजरा करने में अपना गर्व समझेगा यह बात उसे वक्त और निष्ठावान हो जाती है जब जिला कांग्रेस कमेटी पलटी मार संगठन के रूप में भाजपा के साथ घोषित समझौता करके शहडोल जिले में तमाम पर्यावरण और परिस्थिति के विरुद्ध एक भी आवाज नहीं उठाती शोषण और तालाबों के विनाश पर मौन साधना ले लेती है यह जानते हुए शहडोल का विनाश जल युद्ध की ओर जा रहा है इस तरह नूरा कुश्ती में कांग्रेस और भाजपा मिलकर साथ-साथ गुजारा करते नजर आते हैं और कोई बात नहीं है आदिवासी क्षेत्र में स्थानीय आदिवासी नेतृत्व नहीं होने से यह सब होता ही रहता है क्योंकि राजनीति मे मंडी इसी तरह विकसित होती है शहडोल प्रकृति तत्व संसाधनों से भरपूर होने के बाद भी पर्यावरण विनाश का बड़ा मॉडल बनता जा रहा है और इसी मॉडल में सब अपने-अपने घाटे और मुनाफे के तहत को विकसित कर रहे हैं शहडोल पालिका अध्यक्ष का इंतजार है कि कब वह पलटी मार करके पारदर्शी तरीके से भाजपा के अध्यक्ष घोषित होंगे…?