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अब नहीं होगा अवैध कॉलोनी निर्माण, लेकिन दिया तलें अंधेरा।

रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल// मुख्यालय जिला प्रशासन इन दिनों शहडोल नगर पालिका क्षेत्र के साथ साथ जिला अंतर्गत सभी प्रशासन ने कड़ाई से कॉलोनी बनाकर माफिया गिरी करने वाले अवैध कॉलोनाइजर पर नकेल लगाने का कड़ी व्यवस्था कर रखा है। अब नई सूचना के अनुसार जो भी अवैध कॉलोनाइजर हैं उनकी जमीनों को विक्रय पर प्रतिबंधित कर दिया गया है

सवाल यह है कि अगर प्रशासन स्वयं ही अनुमति देकर के बिक्री के पंजीयन को वैधता देता रहा है। अब वह उसे कैसे अवैध घोषित करेगा यह ठीक उसी प्रकार का समस्या बन रहा है जैसे की प्रशासन के स्तर पर शहडोल नगर के तमाम तालाबों पर विधिवत पंजीयन की अनुमति प्रदान कर दी गई और उन तालाबों का रखवा भी छोटा हो गया। जिससे शहडोल में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि जल स्तर घट रहा है। शहडोल नगर के मुख्य मार्ग में स्थित जेल बिल्डिंग के बगल वाले तालाब जो वर्तमान में जीवित तालाब है आज भी नजूल प्रशासन ने अपने रिकॉर्ड में उसे रिक्त जमीन यानी प्लाटिंग करके कॉलोनाइजर बनाने की अनुमति दे रखी है। आज भी इस तालाब को भू अभिलेख में तालाब का स्वरूप नहीं दिया गया है। जबकि 21वीं सदी की शुरुआत में कलेक्टर पंकज अग्रवाल और मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय दुबे ने जब इस तालाब के ऊपर ही संप्रेषण गृह का शिलान्यास करवाया था तभी यह विवादित हो गया था। परिणाम स्वरूप इस तालाब में अंततः तत्कालीन पर्यावरण मंत्री इंद्रजीत पटेल ने तालाब गहरी करण का काम किया करीब 10 लख रुपए इस तालाब में लगाए गए। बावजूद इसके प्रशासन ने इसे तालाब दर्ज नहीं किया। अब वर्तमान में यही दिखने वाला तालाब दिखने वाला वास्तव में सरकारी कागज में अवैध कॉलोनाइजर के जरिए प्लाट बनाकर रखा गया है इस तालाब में कुछ हिस्सों पर पट्टे भी जारी कर दिए गए हैं। एक किनारे में सरकारी बिल्डिंग संप्रेषण गृह बन गई है। और अब नेता और नगरपालिका मिलकर के इसमें भ्रष्टाचार के सहारे धारणाअधिकार के पट्टे भी जारी कर रही है। तो कुछ में प्रधानमंत्री आवास भी तालाब के ऊपर बनाए गए हैं। यानी शासन के निर्देश पर प्रशासन और पालिका प्रशासन तथा नगर पालिका के पार्षद मिलकर के इस तालाब को नष्ट करने का पूरी योजना बना रखे हैं। यह यह सूची समझी भोपाल स्टार की राजनीति का परिणाम हो सकता है...? तालाब में अवैध कब्जा तेजी से हो रहा है क्योंकि प्रशासन इस अवैध कॉलोनाइजर कॉलोनी को मान्यता दे रही है .बहरहाल कलेक्टर का नया आदेश इस प्रकार का है हो सकता है कलेक्टर अपने नए आदेश में इस अवैध कॉलोनी को वैध कॉलोनी बनाए जाने का विशेष आदेश पारितकरें। अगर ऐसा होता है तो यह शासन और प्रशासन का दोहरा चरित्र स्थापित होगा। फिलहाल तालाब संरक्षण के तमाम दावों के बावजूद प्रतिदिन कमिश्नर कलेक्टर और न्यायाधीश की नजर मे दिखने वाला यह इस घोषित तालाब को संरक्षित रिकॉर्ड में किया जा सकता है ताकि यहां पर अवैध कालोनी विकसित न हो सके। क्योंकि कलेक्टर ने अवैध कॉलोनाइजर की जो सूची जारी की है उसमें यह तालाब पर बसी अवैध कॉलोनी का नाम नहीं है। नए निर्देश में बताया गया है।

13 जून 2024-की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है जिला कलेक्टर तरुण भटनागर ने आदेश जारी कर कहा है कि अवैध कालोनियों की जांच हेतु गठित जांच दल एवं संबंधित राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम दृष्टया मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339-क से 339-छ तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका (कालोनी विकास) नियम, 2021 के भाग- 3 नियम- 22 का स्पष्ट रूप से उल्लंघन पाये जाने से अवैध कालोनी निर्मित करने वाले संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी करते हुए जवाब चाहा गया है कि उनके उक्त कृत्य के लिये भूमि को शासन के अधिकार में लेते हुये मध्यप्रदेश नगरपालिका (कालोनी विकास) नियम, 2021 एवं नवीन संशोधन दिनांक 25.05.2023 के नियम 23 एवं 24 एवं नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339-ग में विहित प्रावधानों के तहत दण्डात्मक कार्यवाही क्यों न की जाये। 

जारी आदेश में कहा गया है कि अभी तक नगरपालिका क्षेत्रांतर्गत ग्राम भुईबांध के खसरा क्र. 349, नरसरहा के खसरा क्र. 24/1, मतनी के खसरा क्र. 26/2, शहडोल के खसरा क्र. 289, 290 एवं 291, ग्राम सौखी के खसरा क्रमांक 120 एवं ग्राम सोहागपुर के खसरा क्र. 300, 1108, 1109, 1110, 1476, 298, 299 पर नलिनी सिंह, सुनील खरे, जया खरे, रतिया काछी, राजा सराफ, अनीश कुमार गुप्ता, इकबाल अहमद, विजय बहादुर सिंह, अजय बहादुर सिंह, अनिल बहादुर सिंह, बिन्दुराम तिवारी, सुनीता तिवारी, प्रभा मिश्रा एवं प्रमोद कुमार तिवारी के व्दारा अवैध कालोनी का निर्माण किया गया है। भूमि में अवैधानिक तरीके से कालोनी का निर्माण होने से मध्यप्रदेश नगरपालिका (कालोनी विकास) नियम, 2021 एवं नवीन संशोधन दिनांक 25.05.2023 के नियम-23 एवं 24 एवं नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339-ग के तहत कार्यवाही / दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने का प्रावधान है, जिसके परिपेक्ष्य में संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब चाहा गया है। साथ ही प्रकरण के अंतिम निराकरण अथवा आगामी आदेश पर्यंत प्रभावित भूमियों के समस्त बटांकनों के क्रय-विक्रय को प्रतिबंधित किया गया है तथा जिला पंजीयक को निर्देश जारी किये गये हैं कि उक्त भूमियों के पंजीयन के पूर्व विक्रेता एवं क्रेता से संबंधित नगरपालिका परिषद / नगर परिषद से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करें। समस्त अनुविभागीय अधिकारी (रा.) को उनके अधिकार क्षेत्रांतर्गत अवैध कालोनाइजरों की जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही तथा तहसीलदार / नायब तहसीलदार एवं राजस्व निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि उनके क्षेत्रांतर्गत यदि अवैध कालोनी निर्मित हो रही है, तो जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन सक्षम अधिकरी के समक्ष तत्काल प्रस्तुत करें। शासन द्वारा अवैध कालोनी निर्माण करने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिये गये हैं, जिसके निमित्त समय-समय पर नियम / अधिनियम तथा शासन निर्देश जारी किये गये हैं। अवैध कालोनी के संबंध में सतत निगरानी रखी जा रही है। किसी भी व्यक्ति के द्वारा अवैध कालोनी का निर्माण किये जाने पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। आम जन को भी इस संबंध में अवगत कराया जा रहा है कि भूखण्ड क्रय करने के पूर्व यह जांच कर लें कि उक्त भूखण्ड किसी अवैध कालोनी का हिस्सा तो नहीं है, ताकि भविष्य में वाद बाहुल्य ता से बचा जा सके।

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