शिक्षक के कारनामों का अनगिनत कार्य वकालत का चोला ओढ़ के धौंस दिखाकर लोगों को कर रहे हैं परेशान हमेशा विवादित रहते है शासकीय शिक्षक मिश्रा।
स्थानीय निवासी होने का कर रहे अपने पद का दुरूपयोग शासकीय शिक्षक।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // जनपद शिक्षा केंद्र सोहागपुर के अंतर्गत पदस्थ प्राथमिक विद्यालय धनपुरा में शिक्षक मिश्रा निवासी ग्राम विक्रमपुर थाना बुढार जिला शहडोल मध्य प्रदेश का मामला आया प्रकाश में आप पहले वकालत में कार्य करते थे इसके बाद इनकी पदस्थापना एक शिक्षक के रूप में हुई उनके द्वारा ग्राम पंचायत स्तर से लेकर बड़े स्तर तक विवाद के पुलिंदा माने जाते हैं जानकारी के मुताबिक यहां भी पता चला है कि झोलाछाप डॉक्टरी भी इनके द्वारा की जाती है एक शिक्षक यदि इस प्रकार की गरिमा अपनी तार तार करें उससे तो प्रतीत होता है कि इनकी यदि जांच हो जाए तो कई ऐसे मामले उजागर होंगे। थाना बुढार की लिस्ट में मिश्रा जी का नाम हेड लिस्ट में है देखा जाए तो ऐसे कई मामले उनके विरुद्ध पंजीबद्ध हो चुके हैं जिसमें सिर्फ मामले विवाद के दिख रहे हैं आपके द्वारा ऐसे कई कृत किया जा चुके हैं जो की एक शिक्षक की गरिमा को तार-तार करते देख रहे हैं शिक्षक एक समाज का दर्पण होता है इसके बावजूद भी दर्पण का काम ना करके विवाद के काम में ज्यादा तत्परता इनकी दिखती हैं शिक्षक यदि अपने कार्य के प्रति कर्तव्य निष्ट ना रहे तो वह शिक्षक किसी काम का नहीं होता है। गुंडागर्दी के मामले कई पंजीबद्ध हो चुके हैं इसके बाद भी प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो शिक्षा विभाग के अमला भी इस पर विशेष ध्यान नहीं देते हैं जिससे उनके हौसले जो बुलंद हो जाते हैं और कई लोगों से विवाद करने की नियत और फिराक पर रहते हैं।
विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी शासकीय शिक्षक झोला छाप डॉक्टरी कार्य से भी पीछे नहीं हटते।
खुद को पुर्व सिंहपुर अनुभाग के विक्रमपुर में मिश्रा शिक्षक झोलाछाप डॉक्टरी में उतारू है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानों में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज करते दिख जायेगे। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से ग्रस्त, सभी प्रकार के एक साथ कई बिमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं।
खास बात यह है कि यह शासकीय शिक्षक झोलाछाप डॉक्टर की उम्र लगभग 50 साल के बीच है मरीज की हालत बिगड़ती है तो उससे आनन फानन में बुढार अथवा जिला अस्पताल शहडोल भेज दिया जाता है। जबकि यह लापरवाही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जानकारी में भी है।
शिक्षा विभाग को भी गुमराह करके अपने किए का नाम को पलीता लगाने में माहिर है आदमी मैं चाहिए करूं मैं चाहे वह करूं फिल्म के गीत की तरह हिट हो गया है अपने मनवाने रवैया से लोगों को परेशान करके एवं छात्रों को पढ़ने के अलावा उनके पास सिर्फ राजनीति करना और परेशान करना उनकी फितरत में है।
