Top News

भीगे हुए धान का जिम्मेदार कौन संबंधित विभाग या किसान, समर सुभाष मसाज में संबंधित विभाग बना रहा अंजान, किसान होते रहे अपने धान को बचाने के लिए परेशान।

केंद्र से लापता प्रबंधक अब कौन ढके भीगते हुए धान। 

भीगे कई कुंतल किसानों का धान कौन है जिम्मेदार।

प्रभारियों के लापरवाही के चलते शासन के खरीदे धान भीगे कई कुंटल।

संबंधित विभाग के अधिकारी बन रहे अंजान किसान होते रहे परेशान।

संबंधित धान खरीदी केंद्र प्रभारी के कार्य शैली पर उठ रहे सवाल।


रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल //  मुख्यालय के सभी धान खरीदी केंद्र पर है प्रभारी की लापरवाही अव्यवस्था कार्य शैली पर सवाल मध्य प्रदेश शासन के आदेश अनुसार इस सत्र का 1 दिसंबर 2023 से लेकर 20 जनवरी 2024 तक धान खरीदी केंद्र संचालित किए जाएंगे धान खरीदी का काम जल्द से जल्द हो सके इसके लिए शासन व्यवस्था बनाई, स्व सहायता समूहों को भी धान खरीदने के लिए परमिशन दे दिया और मध्य प्रदेश के सभी जिलों में सहायता समूह जिनकी गुणवत्ता अच्छी रही उस समूह के सदस्यों को धान खरीदी केंद्र के लिए आमंत्रण किया गया जिस पर कई स्व सहायता समूह के सदस्य धान खरीदी कार्य में लगे है।

लेकिन शासन को हजारों कुंतल धान का नुकसान उठाने के लिए गरीब किसान या संबंधित विभाग में पदस्थ कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक और वहां पर बैठे व्यक्ति है जिम्मेदार जिनके देखरेख में खरीदी जा रही थी किसानों की धान।

प्रदेश के सभी जिले में धान की खरीदी 1 दिसंबर से शुरू हुई थी जो 20 जनवरी 2024 तक चलना है क्योंकि उन दिनों चुनावी माहौल बना था इस कारण खरीदी केंद्र ही तय नहीं थे इसलिए किसानों ने सोचा कुछ समय बाद धान बेचेंगे इसी बीच अनेक वेयरहाउस ने धान खरीदी के लिए किसानों से संपर्क किया उनका कहना था कि वेयरहाउस में धान खरीदी केंद्र बनाया जा रहा है इसलिए स्थानीय किसानों को धान एकत्र करने के लिए कई वेयरहाउस में किसानों ने धान पहुंचाया।

जिला के सभी धान खरीदी केंद्र पर शासन के नियम निर्देशों और मापदंड को दर किनार करते हुए किसानों से तौल के वजन से अधिक लिया जा रहा है धान।

विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी सभी धान खरीदी केंद्र पर शासन के द्वारा बनाए गए नियम अनुसार बोरे के वज़न से भी अधिक लिया जा रहा है किसानों से धान।

वहीं शासन ने किसानों की कमाई को डबल करने का दावा है लेकिन लगता है उनके मुंह का निवाला भी छीन लिया जा रहा है हजारों किसानों ने वेयरहाउस के बाहर इस उम्मीद में धान एकत्र की थी जल्द खरीदी होगी हमारी धान किंतु उन्हें क्या मालूम था कि उनकी मेहनत पर अधिकारी और मौसम दोनों पानी फेर देंगे और हुआ भी ऐसा कई किसानों के हजारों कुंटल धान भीग गए। क्या किसानों के भीगे हुए धान शासन खरीद कर अपने अधीन वेयरहाउस में रखेगा या किसान मौसम साफ होने तक वेयरहाउस में ही अपने भीगे धान की देखरेख कर इंतजार करेंगे धान सूखने की। यह परेशानी किसानों को संबंधित धान खरीदी समिति केंद्र प्रबंधक और समिति में पदस्थ कर्मचारियों के लापरवाही का नतीजा भोग रहे हैं किसान और प्रदेश के साथ साथ केन्द्र शासन।

खरीदी धान के भीगने से करोड़ों रुपए नुकसान की आशंका जताई जा रही है, वेयरहाउस के बाहर शासन के द्वारा खरीदे धान की उठाओ में भी लापरवाही सामने आया।

वहीं स्थानीय कई किसानों के धान की तौलाई व्यवस्था भी समिति प्रबंधक के द्वारा नहीं की गई।

किसानों के भीगे हुए धान के जिम्मेदार कौन होगा संबंधित विभाग के अधिकारी या सभी समितियों के प्रबंधक।

कुछ किसानों ने यह भी बताया धान एकत्र करते लेकिन जब धान भीगने की स्थिति में आ गई तो समिति प्रबंधक और वहां पर कार्यरत कर्मचारियों के द्वारा दूसरी जगह ले जाकर बेचने की बात कर रहे थे, धान उठाने का इंतजाम तो करना ही चाहिए लेकिन ऐसा भी नहीं हो रहा है कि किसानों से कहा जा रहा है कि वह खुद ही अपनी धान उठाएं और दूसरे केंद्र पर ले जाएं।

Previous Post Next Post