फर्जी तरीके से धान खरीदी का मामला।
सभी शासकीय धान खरीदी केंद्र से आज तक नहीं भेजा गया सही जानकारी
निजी वेयर हाउस संचालकों के मिली भगत से चल रहा फर्जी धान खरीदी का व्यापार।
दोषी मालिकों के खिलाफ हो F I R, अधिकारियों को किया जाए सस्पेंड कि कार्यवाही।
रिपब्लिक न्यूज।।
भोपाल // मध्य प्रदेश के कई जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन और घटिया धान खरीदी मामले में कार्रवाई किया जाए। और साथ में जिले के शासकीय वेयर हाउस में पदस्थ कर्मचारियों को भी सस्पेंड किया जाए।
वेयर हाउस की जांच रिपोर्ट भी भेजी जाए। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अबकी बार वेयर हाउस में पदस्थ सभी कार्यरत विभाग के कर्मचारियों और मालिकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी।
फर्जी वेयर हाउस के खिलाफ प्रमुखता से मुहिम चलाया जाए तो निश्चित ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जिसके बाद इस मामले में कार्रवाई करते हुए सभी वेयर हाउस को ब्लैक लिस्टेड किया जाए। इस मामले में पहले ही अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है।
लेकिन इस बर्ष एक दिसंबर 2023 से शुरू हुई धान की खरीदी में उस समय गंभीर मोड़ आ गया जब कई वेयरहाउसों ने बिना अनुमति ही खरीदी इस उम्मीद में शुरू कर दी थी कि उन्हें खरीदी केंद्र बनाया ही जाएगा।
सूत्रों के अनुसार।
इसके पीछे जिला प्रशासन के ही अधिकारी है। कई केंद्रों में हजारों क्विंटल धान एकत्र हो गई और उनमें ऐसी धान भी शामिल थी जो कि सड़ चुकी थी। जब मामला चर्चा में आया तो प्रशासन के हाथ-पैर फूलने लगे और आनन-फानन में जांच के लिए दौरे शुरू किए गए, लेकिन इसके बाद भी कुछ नहीं किया गया, बल्कि कई वेयरहाउसों को गुपचुप तरीके से केंद्र बना दिया गया।
फर्जी तरीके से धान खरीदी का मामला प्रदेश सरकार के नए सीएम के साथ साथ जिला प्रशासन और संबंधित विभाग अधिकारियों ने लिया संज्ञान।
यह मामला जिला प्रशासन के संबंधित विभाग अधिकारी तक पहुंचा और वहां से एक साथ मिलकर जांच दल गठित कर भेजे गए। जांच दल ने रिपोर्ट तैयार की और भेजा गया। जिसमें बताया गया कि बिना केंद्र बनाए ही हजारों क्विंटल धान की खरीदी कर ली गई और इसमें भारी मात्रा में अमानक धान की खरीदी की गई है, जिससे अच्छी धान भी खराब हो सकती है।
धान खरीदी फर्जीवाड़े मामले में जो गठित की गई जांच टीम, विभाग से आई टीम ने किसानों से की पूछताछ।
अधिकारियों की टीम ने वेयर हाऊस की जांच कर रिपोर्ट भेजी। निजी वेयर हाऊस को फायदा पहुंचाने जान बूझकर पर्याप्त केंद्र नहीं बनाए गए थे।
पिछले साल खरीदी केंद्र की जगह महज कुछ केंद्र बनाए गए। सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी यह बात भी सामने आई है कि फर्जी खरीदी केंद्रों पर नई धान के साथ सड़ी धान भी पहुंचाई गई है।
जिले अंतर्गत सभी शासकीय और अशासकीय धान खरीदी केंद्रों से आज तक सही जानकारी नहीं भेजी गई कि किस धान खरीदी केंद्र से कितने किसानों के द्वारा रजिस्ट्रेशन कराई गई कितने किसानों ने स्लाइड बुक किया और कितने कुंटल धान खरीदी की गई है।
संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त किया गया लेकिन किसी भी तरह से जानकारी नहीं प्राप्त हुआ।
