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शीतघात शीत लहर के प्रभाव से पर्याप्त सावधानी बरतें सभी जन संबंधित विशेषज्ञ अधिकारी।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने शीतघात व शीत लहर को लेकर पर्याप्त सावधानी बरतने की अपील आम नागरिकों से की गई है।

शीत लहर ठंड से करे बचाओ।

रिपब्लिक न्यूज।।


भोपाल // मध्यप्रदेश राज्य में विशेषज्ञ डॉ ने बताया कि शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्यधिक कम होने पर शीत लहर का चलना प्रारंभ हो जाता है। जिसके कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरित प्रभाव पड़ता है जैसे सर्दी जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, और हाइपोथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बनी रहती है। प्रभावी शीत लहर से बचने के लिए गर्म एवं ऐसे कपड़े जिनमें कपड़ों की कई परतें होती है वह शीत लहर से बचाव के लिए अत्यधिक प्रभावी होते है। रजाई, कंबल, स्वेटर, गर्म कपडों का उपयोग किया जाना चाहिए एवं मफलर, आवरण युक्त जलरोधी जूतों का उपयोग किया जाना चाहिए। इस संबंध में जन जागरूकता के लिए मैदानी स्तर पर आशा, आशा सुपरवाइजर्स, एएनएम, एमपीडब्ल्यू को जन जागरूकता के लिए सभी को निर्देशित करने के लिए सिविल सर्जन तथा समस्त विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

शीत घात से बचाव के लिए उपाय।

शीत लहर की आंशका होने पर स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के लिये रेडियों / टेलीविज़न / समाचार पत्र जैसे सभी मीडिया प्रकाशन का ध्यान रखा जाए ताकि यह पता चल सकें कि आगामी दिनों में शीत लहर की संभावना है या नहीं। फ्लू बुखार, नाक बहना / भरी नाक या बंद नाक जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना आमतौर पर ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होती हैं। अतिआवश्यक होने पर ही घर से बाहर रहें।

आपातकालीन स्थिति होने की स्थिति में आवश्यक वस्तुओं जैसे भोजन, पानी, ईधन, बैटरी, चार्जर आपातकालीन प्रकाश, और संबंधित दवाएं तैयार रखी जाये। घर में ठंडी हवा के प्रवेश रोकने हेतु दरवाजों तथा खिड़कियों की ठीक से बंद रखा जाये।

शीत ऋतु में मौसम के परिवर्तन होने से वातावरण का तापमान कम हो जाता है, जिससे विभिन्न प्रकार के रोग जैसे सर्दी खांसी, बुखार, निमोनिया आदि होने की संभावना रहती हैं। आमजन को पर्याप्त गर्म कपड़ों का स्टॉक किये जाने हेतु जानकारी दी जाये। ऐसे वस्त्र जिनमें कपड़ों की कई परतें होती है, वह शीत से बचाव हेतु अधिक प्रभावी होते हैं।

बिस्तर, रजाई, कंबल, स्वेटर एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का पूर्व से व्यवस्था की जाए। वृद्धों, शिशुओं एवं महिलाओं हेतु यथासंभव कुछ अतिरिक्त गर्म कपड़ों का भी भन्डारण किया जायें। शीत से होने वाले रोग के लक्षणों के उत्पन्न होने पर तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों या डॉक्टर से परामर्श करें

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