विभागीय विशेष सूत्रों अनुसार जानकारी तत्कालीन पदस्थ कलेक्टर शहडोल की लेने जा रहे हैं शरण करोड़ों रुपए के फर्जी भुगतान करता अधिकारी जो जा रहे हैं भोपाल अपने कार्य दिवस को बढ़वाने अंसारी।
मैनेजमेंट में डिग्री प्राप्त अधिकारी जो और बढ़ा सके जिला में भ्रष्टाचार की पहेली जिसमें शामिल हैं स्थानांतरण नीति, फर्जी भुगतान की कार्यवाही।
शहडोल // मुख्यालय जिला के कई शासकीय कार्यालयों से शासकीय कार्य योजना और गुप्त जानकारियां अपने निजी स्वार्थ के लिए अपने ही सगे संबंधी और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के द्वारा जानकारी कर दी जाती है किसी बहरी व्यक्ति के साथ साझा और फिर उस कार्य की जानकारी को सूचना के अधिकार के तहत मांगी जाती है कार्यालय से जानकारी।
जिस जानकारी को सिर्फ कार्यालय के अधिकारी और उस कार्य या उससे संबंधित कर्मचारियों को ही पता है कि इस कार्यालय के किस कार्य योजना किस कार्य के लिए शासन के द्वारा बजट पास हुआ है। उसी कार्य की रूपरेखा पर ही सूचना का अधिकार लगाया जा रहा है और वही सूचना का अधिकार की जानकारी कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी के रिश्तेदार के द्वारा पुनः लगाया जा रहा है जानकारी के लिए।
कार्यालय में कौन है विभाग के जिम्मेदार जिसके द्वारा खेला जाता है इस तरह का खेल कार्यालय के जानकारी अनुसार के साथ।
संबंधित विभाग से प्राप्त जानकारी भोपाल जा रहे हैं अंसारी जिला में रहे तत्कालीन पदस्थ कलेक्टर जो हो गए हैं प्रभारी जिनके शरण में चढ़ौत्री चढ़ाने जा रहे हैं करोड़ों रुपए फर्जी भुगतान करता अधिकारी और बढ़ वाएगे अपना कार्य दिवस की जानकारी।
ऐसा ही एक मामला जिला के कार्यालय सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ दैनिक वेतन कर्मचारी कंप्यूटर ऑपरेटर रजनीश दुबे जिसके द्वारा किसी सगे संबंधी को अपने साथ कार्यालय में लाकर कंप्यूटर सीखने के नाम पर शासकीय कार्यालय में शासकीय कार्य के लिए कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है। क्या एक ऐसा जगह यही मिला है कंप्यूटर कार्य सीखने के लिए रजनीश दुबे को जो अपने सगे संबंधी मित्र या जो भी रिश्ता हो उस अजनबी व्यक्ति से जिसको रजनीश दुबे कार्यालय कार्य के दौरान अपने समीप कम्प्यूटर आपरेटर के जगह पर बैठते हैं।
विशेष सूत्रों की माने तो जानकारी अनुसार रजनीश दुबे द्वारा जो भी यह अंजान व्यक्ति कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर रजनीश दुबे के बगल में बैठता है उसको उन सभी छात्रावास अधीक्षिका अधीक्षकों को पहचान करने के पश्चात उनका नंबर देकर चढ़ौत्री की भेंट लेने के लिए कुछ दूर पीछे भेजे जाने का कार्य किया जाता है या तो फिर कार्यालय में पदस्थ प्रमुख को गुमराह करते हुए उनके नाम से भी चढ़ौत्री सेवा भाव उस अजनबी व्यक्ति द्वारा लिया जा रहा है।
एक खबर ऐसी भी चल रही है कुछ समय बाद कार्यालय से कुछ बाबुओं की सेवा समाप्त यानी रिटायरमेंट होने जा रहा है तो दूसरे साहब तीसरी साहब की भर्ती उनके स्थान पर कर देंगे। यह सिस्टम मैनेजमेंट का चल रहा है कार्यालय के दूसरे नंबर अधिकारी महोदय का और भी कई कार्यो कि जानकारियां कार्यालय से लीक होने का सिलसिला जारी है।
नियमों से बंधे हुए हैं हर जारी पत्र के प्रभारी मालिक जिस पर संबंधित निजी शिक्षण संस्था के मालिकों से मासिक भुगतान करने वाले चढ़ौत्री की राशि जो पत्नी और भाई बने सहभागी अगर इनके संबंधित सभी के बैंक पासबुक और लेनदेन वाले उपकरणों की जांच कर खंगाले जाएं तो निश्चित ही भ्रष्टाचार का आयाम नजर आएगा जो कंप्यूटर ऑपरेटर की कहानी दोहराएगा। और पत्र की प्रसार संख्या कम से कम 5000 हजार होने पर विभाग वर्ष में दो से तीन बार 15000 के विज्ञापन देती है, भुगतान प्रमाणपत्र के आधार पर यही स्थिति और भी दैनिक जारी पत्रों की है।
इस आर्थिक अपराध में मैं भी हूं और मेरे साथ वो सब है जो पत्र प्रकाशित करते हैं ।
एक दैनिक भाव वेतन भोगी कर्मचारी किस मैनेजमेंट पर पदस्थ हो गया कंप्यूटर ऑपरेटर कर्मचारी। किसके आदेश से कार्यालय में पदस्थ हूए।
विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्धारित मापदंड के आधार पर विज्ञापन जारी कर देते हैं। यदि विभाग जांच कर लें तो समझता हूं कि सभी जारी पत्र हो सकतें हैं आईने की तरह साफ और दूध का दूध पानी का पानी। यदि कोई जांच एजेंसी जांच करती है तो विभाग के अधिकारियों पर भी आंच आ आयेगी।
अगले अंक में मिलेंगे उस अजनबी व्यक्ति से जो कार्यालय कंप्यूटर ऑपरेटर के बगल में बैठता है साथ।

