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चुनाव का हो गया बहाना करोड़ों रुपए फर्जी भुगतान करता अधिकारी को है बचाना।

कार्यालय में पदस्थ संबंधित शाखा प्रभारियों को धोखे में रखकर किया गया करोड़ों रुपए राशि का फर्जी भुगतान।

कार्यरत कर्मचारियों के पांचवें वेतन मान एरियर राशि भुगतान का महा घोटाला।

तत्कालीन पदस्थ कलेक्टर को गुमराह कर जिला कोषालय अधिकारी के मिली भगत से पूर्व प्रभारी सहायक आयुक्त ने करोड़ों रुपए राशि का फर्जी तरीके से भुगतान किया।

जिले में पदस्थ तत्कालीन आईएएस अधिकारी अपर कलेक्टर और उनके टीम की जांच रिपोर्ट को झूठा करार दिया एक प्राचार्य प्रभारी संयुक्त शिक्षण संचालक अधिकारी।

रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल // मुख्यालय जिला प्रशासन के कार्यालय में कई ऐसे मामले देखने और सुनने को मिले हैं। जिसमें संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी के मिली भगत से शासन के करोड़ों रुपए राशि का फर्जी भुगतान किया गया है जो कि सिर्फ खानापूर्ति करते हुए शासन को गुमराह किया गया है। और शासन के पैसों की जमकर भ्रष्टाचार कि होली खेली गई है।

बहुचर्चित भ्रष्टाचार आठ करोड़ 32 लाख 91 हजार 309 रुपए राशि भुगतान का जो लोकायुक्त अधिकारी और कर्मचारीगण बनें कठपुतलियां जिन्होंने सिर्फ खेल खिलाया और किया मनोरंजन आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र पर संचालित अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था पांडे शिक्षा समिति के फर्जी कार्यरत कर्मचारियों के सामने।

बिना पहचान पत्र के किया गया उनसे सवाल जवाब किसी को भी कहीं से उठाकर लाए खरीदे हुए बयान करता।

मामला अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था पांडे शिक्षा समिति में 20 वर्षों से कार्यरत कर्मचारी के पांचवें वेतनमान एरियर राशि का भुगतान जो 8 करोड़ 32 लाख 91,309 रुपए के राशि का है फर्जी तरीके से संस्था के दो खातों पर किए गए। 

जबकि भुगतान कार्यरत कर्मचारियों के बैंक खातों पर करना था जिसमें पूर्व प्रभारी सहायक आयुक्त एम एस अंसारी और जिला कोषालय अधिकारी की मिली भगत संदेश के घेरे में है।

जांच कमेटी के अधिकारी गए छूट्टी और भेज दिया गया जानकारी।

जांच कमेटी कि फिल्म अधुरी किया नहीं रिलिज़ बच गया भ्रष्टाचारी अधिकारी...?

शहडोल पहली नजर में देखें तो बड़े विभाग अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ शहडोल कार्यालय आदिवासी विभाग में करोड़ों रुपए का गैरकानूनी आहरण के भ्रष्टाचार का मामला को हरी झंडी दे दी गई है मान लिया गया है कि कोई भ्रष्टाचार नहीं किया गया है और नहीं हुआ फर्जी भुगतान आप इसके लिए जिला के तत्कालीन रहे प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल के निर्देश पर बनाई गई कमेटी की जांच पर बनने वाली फिल्म की क्या स्टोरी होगी हालांकि यह बात कहना जल्दबाजी होगा क्योंकि इस कमेटी में परंपरागत भ्रष्टाचार को जानने वाले अतिरिक्त एक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अपर कलेक्टर शहडोल अर्पित वर्मा भी इस कमेटी में मेंबर हैं तो यदि कोई जांच की टिप कथन लिखी जानी है अथवा उस पर जो फिल्म बनाई जानी है क्या उसका ट्रेलर आ गया है ऐसा मानकर चलना चाहिए क्योंकि इसी जांच से संबंधित अंश भाग पर जांच अधिकारियों ने भ्रष्टाचार को हरी झंडी दे दी है।

ऐसा एक विशेष विभागीय सूत्र बताते हैं तब यह बात की संभावना अधिक बढ़ जाती है की जो बातें कही गई थी की जयसिंहनगर पर अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था पांडे शिक्षा समिति का भ्रष्टाचार के उद्देश्य बनाई गई गैर सरकारी संगठन से संबंधित जो भी अमला दिल्ली से लेकर जयसिंहनगर तक इसकी निगरानी के लिए जिम्मेदार है वह सब के सब हमाम के नंगे हैं वे अक्सर एक दूसरे की सच को नहीं देखना चाहते हैं। क्योंकि वे सब जानते हैं की पारदर्शी भ्रष्टाचार में छुपाने को क्या रह जाता है ऐसे में सिर्फ यह सच्चाई छुपाई जा सकती है की सब कुछ दिखता था इसलिए कुछ नहीं छुपाता और यही बात को दिल्ली से लेकर शहडोल तक के आईएएस लॉबी अथवा उसके अधीन पालने वाली लाबी का भ्रष्टाचार देखा नहीं जाना चाहिए उस पर सफेदपोश चादर चढ़ाई जानी चाहिए यही विकास की पहली शर्त है और शायद इसीलिए अभी जो इस पारदर्शी भ्रष्टाचार में जांच रिपोर्ट आई है वह बड़े स्तर पर बनाई गई कमेटी की फिल्म की ट्रेलर कही जा सकती है। 

आई ए एस अधिकारी के जांच को एक बड़ी चुनौती।

अधिकारी अथवा किसी आईएएस टीम के अधिकारी की योग्यता और उसकी अधिकारिता को एक बड़ी चुनौती भी मिली है यह देखना होगा जब उसके अधीन बनाई गई कमेटी के निष्कर्ष सामने आएंगे फिलहाल की जांच कमेटी की रिपोर्ट से निकला एक और सदस्य की जॉइनिंग पांडे शिक्षा समिति में शामिल भ्रष्टाचार मैनेजमेंट में डिग्री प्राप्त अधिकारी का और गौर बाबाजी का आदेश और कुछ नहीं।

शिकायतकर्ता लोकायुक्त व्यक्ति का नहीं हुआ बयान आज तक और शहडोल के कलेक्टर ने बिना संज्ञान लिए भेज दिए जानकारी लोकायुक्त भोपाल को क्या ऐसा होना चाहिए बिना संज्ञान लिए शिकायतकर्ता व्यक्ति का बयान नहीं हुआ और लोकायुक्त जांच भोपाल कार्यालय को जानकारी भेज दी जाए।

थर्ड ग्रेड बाबू क्षेत्र संयोजक पूर्व प्रभारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग एमएस अंसारी आईएएस अधिकारी लाबी रेंक में शामिल।

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